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क्या प्राइवेट CNG गाड़ियों पर भी लग सकती है रोक, जानें कितना फैलाती हैं पॉल्यूशन?


दिल्ली-एनसीआर की हवा को साफ करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM ने एक और बड़ा फैसला लिया है. आयोग की 29वीं फुल कमीशन बैठक में यह तय किया गया कि दिल्ली में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी से चलने वाले नए लाइट गुड्स व्हीकल्स यानी छोटे मालवाहक वाहनों का रजिस्ट्रेशन 1 जनवरी 2027 से बंद कर दिया जाएगा. यह नियम N1 कैटेगरी यानी 3.5 टन तक क्षमता वाले वाहनों पर लागू होगा और इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे एनसीआर में लागू किया जाएगा. 

इस फैसले के सामने आते ही एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या आने वाले समय में सिर्फ मालवाहक ही नहीं, बल्कि प्राइवेट सीएनजी गाड़ियों पर भी इसी तरह की रोक लग सकती है. आइए समझते हैं इस फैसले का पूरा गणित और सीएनजी गाड़ियों से फैलने वाले प्रदूषण का सच.

आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?

CAQM का कहना है कि यह फैसला वाहनों से निकलने वाले पार्टिकुलेट मैटर यानी पीएम 2.5 प्रदूषण को कम करने के मकसद से लिया गया है. आयोग के मुताबिक लाइट गुड्स व्हीकल्स दिल्ली-एनसीआर में चलने वाले कुल वाहनों का महज 1.2 फीसदी हिस्सा हैं, लेकिन कुल पार्टिकुलेट उत्सर्जन में इनकी हिस्सेदारी करीब 3.3 फीसदी है. यानी संख्या में कम होने के बावजूद ये वाहन प्रदूषण फैलाने में कहीं ज्यादा योगदान देते हैं. यही वजह है कि आयोग ने इन्हें सबसे पहले निशाने पर लिया. 

क्या प्राइवेट CNG गाड़ियों पर भी लग सकती है रोक?

फिलहाल CAQM का यह आदेश सिर्फ छोटे मालवाहक वाहनों पर लागू है, प्राइवेट कारों पर नहीं. लेकिन दिल्ली सरकार पहले से ही अपनी नई EV पॉलिसी के तहत आने वाले वर्षों में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी वाहनों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक विकल्पों से बदलने की दिशा में काम कर रही है. इससे पहले भी सरकार दोपहिया वाहनों और ऑटो रिक्शा जैसी कैटेगरी में पेट्रोल-डीजल-सीएनजी वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की योजना बना चुकी है. 

ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रदूषण के आंकड़े इसी तरह चिंताजनक बने रहे, तो भविष्य में निजी सीएनजी वाहनों पर भी सख्ती की तलवार लटक सकती है, हालांकि अभी इसे लेकर कोई आधिकारिक फैसला या समय सीमा तय नहीं हुई है. 

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सीएनजी कितना प्रदूषण फैलाती है?

सीएनजी को आमतौर पर पेट्रोल और डीजल के मुकाबले साफ-सुथरा ईंधन माना जाता है, क्योंकि यह जलने पर पेट्रोल-डीजल के मुकाबले काफी कम धुआं और कम अवशेष छोड़ती है. इसी वजह से बीते कुछ सालों में दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी वाहनों का चलन तेजी से बढ़ा है और सरकार भी इसे पेट्रोल-डीजल के बेहतर विकल्प के तौर पर बढ़ावा देती रही है. 

हालांकि सीएनजी भी पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त ईंधन नहीं है, इसे जलाने पर भी कार्बन डाइऑक्साइड और कुछ मात्रा में अन्य हानिकारक गैसें निकलती हैं, बस इनकी मात्रा पेट्रोल-डीजल के मुकाबले कम होती है. यही वजह है कि CAQM के ताजा आदेश में भी सीएनजी को पेट्रोल-डीजल के साथ पारंपरिक ईंधन की श्रेणी में रखा गया है और इसे भी चरणबद्ध तरीके से हटाने की बात कही गई है. 

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