‘शक्तिमान’ फेम एक्टर मुकेश खन्ना एक बार फिर से अपने बयानों की वजह से चर्चा में हैं. वो बेबाकी के साथ सामाजिक मुद्दों पर बात करते हैं और खुलकर अपनी राय रखते हैं. ऐसे में इन दिनों ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान बनाने की चर्चा हो रही है और ‘जन गण मन’ को हटाने की. इसी विवाद पर मुकेश खन्ना ने एक बार फिर से अपनी प्रतिक्रिया दी और दावा किया कि ‘जन गण मन’ ब्रिटिश शासन के दौरान जॉर्ज पंचम की तारीफ में लिखा था. इसलिए इसे राष्ट्रगान नहीं माना जा सकता है.
जन गण मन मेरे देश का राष्ट्रगान नहीं हो सकता…
दरअसल, मुकेश खन्ना ने हाल ही में समाचार एजेंसी ANI से बात की और इस दौरान का उनका वीडियो भी सामने आया है. इसमें एक्टर राष्ट्रगान विवाद पर रिएक्शन देते हुए कहते हैं, ‘देखिए वंदे मातरम का ऐसा विवाद है, जिसे खामखा तूल किया गया है. मेरी बातों को वायरल कर दिया गया है. मैंने बीच में अभी एक बात कहा था कि जन गण मन मेरे देश का राष्ट्रगान नहीं हो सकता है. ये गाया गया था उस समय जब जॉर्ज पंचम थे या उस जमाने में जब ब्रिटिश एम्पायर था. हम गुलाम थे. उस जमाने में उनके शान में ये गाना लिखा गया था.’
यह भी पढ़ें: रवि तेजा की ‘इरुमुडी’ ने बनाया रिकॉर्ड, बनी 2026 की 10वीं हाईएस्ट ग्रॉसिंग तेलुगु फिल्म
भारत माता और देश का झंडा भाग्य विधाता नहीं होते…
मुकेश खन्ना आगे सवाल करते हुए कहते हैं, ‘अधिनायक का मतलब क्या होता है? अधिनायक जय हे…भारत भाग्य विधाता मतलब आप हमारे भाग्य विधाता हैं. पंजाब सिंध गुजरात मराठा, ये सब यश कर रहे हैं आपका. जय हो जय हो. अगर हिंदी जानने वाला इसके बारे में सोचेगा तो अगर ये झंडे के लिए है तो भारत माता और देश का झंडा भाग्य विधाता नहीं होते हैं. हम उनको अपना प्रतीक मानते हैं.’
#WATCH | Mumbai, Maharashtra: Actor Mukesh Khanna says, “… Vande Mataram has been unnecessarily turned into a controversy. My comments made about “Jana Gana Mana” have gone viral. It was written during the British era, when India was under British rule. The words “Jana Gana… pic.twitter.com/EMujvKrlrd
— ANI (@ANI) August 23, 2026
यह भी पढ़ें: ‘ओछे लोगों पर टिप्पणी नहीं…’, कंगना रनौत के बयान पर बाबा रामदेव का पलटवार
वंदे मातरम देश का नेशनल एंथम बन…
‘वंदे मातरम’ को लेकर मुकेश खन्ना आगे कहते हैं, ‘वंदे मातरम में जो है हम झुक कर कहते हैं कि हे मां हम तुम्हारी वंदना करते हैं. जन गण मन अधिनायक को छोड़िए वंदे मातरम…मैं चाहता हूं कि ये हमारे देश का नेशनल एंथम बन जाए. जो इतने सालों से अंग्रेजियत झेली है. अंग्रेज चले गए अंग्रेजी छोड़ गए. आज भी हम अंग्रेजी में पढ़ना अपनी महत्ता समझते हैं. बाबू लोग अपने बच्चों को ऑक्सफोर्ड भेजते हैं. अरे साब यहां पर नालंदा यूनिवर्सिटी थी. वेद है पुराण है. गुरुकुल है. 9 लाख में से 7 लाख जला दिए गए.’
केंद्र सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन्स
भारत के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर केंद्र सरकार की ओर से नई गाइडलाइन्स जारी की गई है. सरकार की ओर से निर्देश जारी किए गए और बताया कि किन कार्यक्रमों में दोनों को गाना या बजाना जरूरी है. मंत्रालय की ओर से कहा गया कि एक ही कार्यक्रम में पहले वंदे फिर जन गण मन होगा. जिन राज्यों में राज्य गीत होता है, वहां पर भी सीक्वेंस का पालन करना होगा. 9 जुलाई को सभी राज्यों और मंत्रालयों को पत्र भेजा गया था.
