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Exclusive: मुंह से नहीं बल्ले से दो जवाब, जायसवाल के कोच का साफ संदेश


भारतीय बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और श्रीलंका के तेज गेंदबाज असीथा फर्नांडो के बीच दूसरे टेस्ट मैच में हुई जुबानी जंग अब मैदान से निकलकर सोशल मीडिया तक पहुंच गई है. इस मामले पर मशहूर क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने भी अपनी राय रखी थी. भोगले की टिप्पणी पर जायसवाल ने नाराजगी जाहिर करते हुए सोशल मीडिया पर जवाब दिया कि जब किसी विषय की पूरी जानकारी न हो तो उस पर नहीं बोलना चाहिए. जायसवाल ने यह भी साफ किया कि अगर मैदान पर कोई उन्हें कुछ कहेगा तो वह उसका जवाब देंगे. 

इस पूरे विवाद को लेकर एबीपी न्यूज कंसल्टेंट रवीश बिष्ट ने यशस्वी जायसवाल के बचपन के कोच ज्वाला सिंह से खास बातचीत की. ज्वाला सिंह ने जायसवाल की आक्रामकता से लेकर सोशल मीडिया पर दिए गए जवाब और मैदान पर स्लेजिंग समेत कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी. पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश. 

सवाल- आप यशस्वी जायसवाल के बचपन के कोच रहे हैं. हर्षा भोगले ने जायसवाल और असीथा फर्नांडो के बीच हुई झड़प को लेकर एक वीडियो पोस्ट किया, जिस पर जायसवाल ने भी सोशल मीडिया पर जवाब दिया. आप इसे कैसे देखते हैं?

जवाब- मुझे लगता है कि जवाब बल्ले से देना चाहिए, सोशल मीडिया पर लिखकर नहीं. सोशल मीडिया पर जवाब देने से बात बढ़ती है और उसका कोई खास फायदा नहीं होता. मेरा मानना है कि आपका काम ऐसा होना चाहिए कि जो लोग आज आपकी आलोचना कर रहे हैं, वही आगे चलकर आपकी तारीफ करें. उन्हें खुद महसूस हो कि उन्होंने इस खिलाड़ी की आलोचना की थी, लेकिन इसने अपने प्रदर्शन से जवाब दिया. अगर कोई हमारे बारे में कुछ कह रहा है या हमारी आलोचना कर रहा है तो सोशल मीडिया पर जवाब देने से बेहतर है कि हम रन बनाएं. हमारा प्रदर्शन और बर्ताव ऐसा होना चाहिए कि आलोचना करने वाले व्यक्ति को भी बाद में महसूस हो कि उसने इस खिलाड़ी के बारे में गलत राय बनाई थी. 

सवाल- असीथा फर्नांडो के साथ मैदान पर जायसवाल की जो झड़प हुई, उसके बारे में आप क्या कहेंगे?

ज्वाला सिंह का जवाब- जब आप इंटरनेशनल क्रिकेट खेलते हैं तो आप रोल मॉडल होते हैं. मेरे हिसाब से ऐसी चीजों को ज्यादातर नजरअंदाज करना चाहिए, क्योंकि क्रिकेट मुंह से नहीं खेला जाता, क्रिकेट गेंद और बल्ले से खेला जाता है. कई बार गेंदबाज आपका विकेट लेने के बाद सेलिब्रेट करता है और कुछ कह भी देता है. ऐसी परिस्थितियों में कोशिश होनी चाहिए कि उसे इग्नोर किया जाए. 

सवाल- मैच रेफरी ने असीथा फर्नांडो और यशस्वी जायसवाल दोनों पर 25 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना लगाया. इससे तो लगता है कि गेंदबाज की तरफ से भी कुछ हुआ था?

ज्वाला सिंह- देखिए, उस वक्त मैदान पर वास्तव में क्या हुआ, मैं नहीं कह सकता. लेकिन मेरा मानना है कि दोनों तरफ एक लिमिट और मर्यादा होनी चाहिए. मैं यशस्वी को हमेशा समझाता था कि अगर कोई कुछ बोले तो बैट से जवाब दो, सब शांत हो जाएंगे. कई बार कोई खिलाड़ी पर्सनल बात बोल देता है और उसके बाद नौकझोंक हो जाती है, लेकिन मेरे हिसाब से ज्यादातर मौकों पर ऐसी बातों को इग्नोर करना बेहतर है. 

मुझे नहीं पता कि उस समय गेंदबाज ने क्या कहा था, लेकिन क्रिकेट एक जेंटलमैन गेम है और सभी को उसकी मर्यादा रखनी चाहिए. अगर किसी गेंदबाज ने आपको कुछ कहा है तो अगली पारी में जाइए और उसके खिलाफ ढेरों रन बनाइए. वही सबसे अच्छा जवाब है.

सवाल- जब यशस्वी आपके पास ट्रेनिंग करते थे, तब भी क्या वह इतने ही एग्रेसिव थे?

ज्वाला सिंह- एग्रेसिव तो वह शुरू से ही था. जरूरत पड़ने पर वह रिस्पॉन्ड भी करता था, लेकिन उस समय मैदान पर इस तरह की घटनाएं नहीं होती थीं.
अगर कोई बात होती थी तो वह मेरे साथ शेयर करता था और मैं हमेशा उससे यही कहता था कि बल्ले से जवाब दो, मुंह से जवाब देने की जरूरत नहीं है.
मैं यशस्वी को सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देता था. सचिन को जब गेंदबाज स्लेज करते थे तो वह आमतौर पर उन्हें इग्नोर करते थे. मैं उसे जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाज हेनरी ओलंगा और सचिन तेंदुलकर का उदाहरण भी देता था. मैंने यशस्वी को समझाया कि सचिन ने बातों का जवाब बातों से देने के बजाय अपने बल्ले से दिया. जवाब देने का तरीका यही होना चाहिए. अपने प्रदर्शन से जवाब दीजिए. 

सवाल- हाल ही में अजिंक्य रहाणे ने भी एक पुराने मैच का जिक्र करते हुए कहा था कि मुंबई के लिए खेलते समय यशस्वी विरोधी टीम के खिलाड़ी को काफी ज्यादा बोल रहे थे और स्थिति ऐसी हो गई थी कि उन्हें ड्रेसिंग रूम में भेजना पड़ा, नहीं तो मैच रेफरी एक्शन ले सकता था. आप इसे कैसे देखते हैं?

ज्वाला सिंह: देखिए, एग्रेसिव तो वह पहले से था, लेकिन उस समय मैं उसे समझा देता था. मैं उसे समझाता था कि अगर अच्छी बल्लेबाजी करोगे और रन बनाओगे तो सब अपने आप खामोश हो जाएंगे. मेरी कोशिश रहती थी कि वह पॉजिटिव रहे और मैदान पर शांत रहे. अब वह भारतीय टीम का हिस्सा है. इंडियन टीम का अपना अलग सेटअप है, इसलिए अब मैं उसे सीधे तौर पर कुछ नहीं कह सकता. लेकिन मैं आज भी यही कहूंगा कि उसके सामने अभी बहुत टेस्ट क्रिकेट पड़ा है. जाओ, रन बनाओ और इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी रिस्पेक्ट कमाओ. 

ज्वाला सिंह का साफ संदेश

यशस्वी जायसवाल के बचपन के कोच ज्वाला सिंह की बातों का सार साफ है. आक्रामकता खिलाड़ी के खेल का हिस्सा हो सकती है, लेकिन उसका सबसे प्रभावी जवाब शब्दों या सोशल मीडिया से नहीं, बल्कि प्रदर्शन से दिया जाना चाहिए. 

“कोई कुछ बोले तो बल्ले से जवाब दो, सब शांत हो जाएंगे”

यशस्वी के लिए उनके बचपन के कोच का संदेश भी यही है. रन बनाइए, शांत रहिए और अपने प्रदर्शन से इंटरनेशनल क्रिकेट में सम्मान कमाइए. 

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