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अमेरिकी रक्षा मंत्री ने ईरान को बताया समुद्री लुटेरा, कहा- अब हम पूरी तरह तैयार, डील नहीं की तो उड़ा देंगे पावर प्लांट


मिडिल ईस्ट संकट के बीच अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को उड़ाने की धमकी दी है. उनका ये बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमरिका के बीच सीजफायर है और स्थाई शांति के लिए दूसरे दौर की वार्ता होनी है. उन्होंने धमकी देते हुए कहा, ‘हमारी नजर आप पर है और यदि आपके नेता शांति समझौते पर राजी नहीं होते हैं तो फिर से ईरान पर हमला करेंगे.’

अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी कब तक रहेगी?

ट्रंप प्रशासन कभी शांति समझौते के करीब होने का आश्वासन देता है तो कभी ईरान के नेतृत्व को समझौते का पालन न करने पर धमकी देता है. ऐसा इसलिए क्योंकि युद्ध के आर्थिक नुकसान के कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर घरेलू दबाव लगातार बढ़ रहा है. पीट हेगसेथ ने उम्मीद जताई है कि ईरान के नेता समझदारी से निर्णय लेंगे. उन्होंने कहा, ‘ईरान के पोर्ट अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी जब जारी रहेगी जब तक हमें लगेगा की ऐसा करना जरूरी है.’

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने ईरान को बताया समुद्री लुटेरा

पीट हेगसेथ ने कहा, ‘इस समय अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है. अगर ईरान के साथ कोई डील नहीं हुई तो हम दोबारा लड़ाई शुरू कर देंगे. ईरान ये कहता है कि वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कंट्रोल करता है. वे इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को धमकी देते हैं. यह कंट्रोल नहीं, समुद्री डकैती है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ईरान की हर हरकत पर नजर रखे हुए है.’

चीन ने की होर्मुज खोलने की अपील

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने को कहा है.  तेहरान के अमेरिका के साथ युद्ध के दौरान इस अहम समुद्री मार्ग पर दबाव बढ़ाने के बीच बीजिंग की ओर यह पहली ऐसी अपील है. वांग यी ने बुधवार को अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत के दौरान अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता और सुरक्षा की गारंटी मांगी.

ईरान-अमेरका के बीच फिर से होगी वार्ता

पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान का एक मध्यस्थता प्रतिनिधिमंडल बुधवार को तेहरान पहुंचा, जहां उसने इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता के लिए नए शांति प्रस्तावों पर चर्चा की. ईरान का करीबी सहयोगी और उसके तेल का सबसे बड़ा आयातक चीन भी अमेरिकी नाकेबंदी से बढ़ते ऊर्जा संकट को लेकर चिंतित है. अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान के बंदरगाहों से तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है.

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