Aja Ekadashi 2026: अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम 7:29 बजे शुरू होगी और 7 सितंबर की शाम करीब 5:03 बजे समाप्त होगी. ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या रविवार को रात का खाना खाया जा सकता है या शाम 7:29 बजे से पहले ही अन्न छोड़ना होगा?
इसका सीधा जवाब है, अगर अजा एकादशी का व्रत पूरे धार्मिक नियम से रखना है तो भोजन छोड़ने के लिए रात 7:29 बजे का इंतजार नहीं करना चाहिए. दशमी के दिन सूर्यास्त से पहले हल्का और सात्विक भोजन करना श्रेष्ठ माना गया है. हालांकि सामान्य रूप से केवल एकादशी के दिन अन्न न खाने का नियम मानने वाले लोग 6 सितंबर को तिथि शुरू होने से पहले भोजन कर सकते हैं.
7 सितंबर को ही क्यों रखा जाएगा अजा एकादशी व्रत?
एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम से शुरू हो रही है, लेकिन उस दिन सूर्योदय के समय दशमी तिथि रहेगी. 7 सितंबर को सूर्योदय एकादशी तिथि में होगा. सनातन परंपरा में अधिकांश व्रत उदया तिथि के आधार पर रखे जाते हैं. इसलिए अजा एकादशी का मुख्य व्रत 7 सितंबर को किया जाएगा.
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प्रचलित पंचांग गणना के अनुसार एकादशी तिथि 6 सितंबर को शाम 7:29 बजे से 7 सितंबर को शाम करीब 5:03 बजे तक रहेगी. पंचांग और शहर के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर संभव है.
क्या 6 सितंबर को रात का खाना खा सकते हैं?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप व्रत किस स्तर पर रखते हैं.
धार्मिक विधि से पूर्ण एकादशी व्रत रखने वाले व्यक्ति को दशमी यानी 6 सितंबर को सूर्यास्त से पहले केवल एक बार सात्विक भोजन कर लेना चाहिए. इसे ‘दशमी का एकभुक्त भोजन’ कहा जाता है. भोजन हल्का हो और उसमें प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा तथा अधिक मसालेदार चीजें न हों. सूर्यास्त के बाद अन्न न लेना श्रेष्ठ माना गया है. पारंपरिक रूप से एकादशी का अनुशासन दशमी से शुरू होकर द्वादशी के पारण तक चलता है.
इस हिसाब से व्रती को यह नहीं सोचना चाहिए कि 7:29 बजे तक भरपेट भोजन किया जा सकता है. 6 सितंबर को सूर्यास्त से पहले हल्का सात्विक भोजन करना अधिक उचित होगा.
जो व्यक्ति पूर्ण उपवास नहीं रखता और केवल एकादशी तिथि में अन्न छोड़ता है, वह अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार शाम 7:29 बजे से पहले भोजन समाप्त कर सकता है. तिथि शुरू होने के बाद चावल, गेहूं, दाल और दूसरे अनाज छोड़ देने चाहिए. इसके बाद जरूरत होने पर फल, दूध या व्रत में मान्य चीजें ली जा सकती हैं.
क्या केवल चावल छोड़ना पर्याप्त होगा?
एकादशी पर केवल चावल न खाने का नियम सबसे अधिक प्रचलित है, लेकिन व्रत का व्यापक नियम सभी प्रकार के अन्न और दालों का त्याग करना है. इसमें चावल के साथ गेहूं, आटा, सूजी, मैदा, जौ, मक्का, बाजरा और सामान्य दालें भी शामिल होती हैं.
फलाहार करने वाले लोग फल, दूध, मखाना, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, आलू और सेंधा नमक ले सकते हैं. भोजन बनाने में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बर्तन या तेल में पहले से आटे अथवा सामान्य नमक का अंश न मिला हो. वैष्णव परंपरा में एकादशी के दिन अनाज और दालों से पूरी तरह परहेज किया जाता है.
व्रत का संकल्प 6 सितंबर की रात लें या 7 सितंबर की सुबह?
व्रत की तैयारी 6 सितंबर की दशमी से शुरू हो जाएगी, लेकिन अजा एकादशी व्रत का औपचारिक संकल्प 7 सितंबर की सुबह स्नान करने के बाद लिया जा सकता है. भगवान विष्णु के सामने जल, पुष्प या तुलसी दल लेकर अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल, फलाहार अथवा केवल अन्न त्याग का संकल्प करें.
संकल्प करते समय यह कहना पर्याप्त है कि आप भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए अजा एकादशी व्रत का पालन करेंगे और द्वादशी को विधिपूर्वक पारण करेंगे. अपनी क्षमता से अधिक कठोर व्रत का संकल्प नहीं लेना चाहिए.
6 सितंबर की शाम क्या करें?
रविवार को सूर्यास्त से पहले हल्का सात्विक भोजन कर लें. भोजन में अधिक तेल, मिर्च और तली हुई चीजें न रखें. संभव हो तो उस दिन एक ही बार अन्न ग्रहण करें. शाम 7:29 बजे एकादशी तिथि शुरू होने के बाद भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें.
अगर पारिवारिक परंपरा में दशमी की रात भोजन करने की अनुमति है तो खाना तिथि शुरू होने से पहले समाप्त कर लें. इसके बाद अन्न और दाल न लें. यहां घड़ी देखकर ठीक 7:29 बजे थाली छोड़ना उचित तरीका नहीं है. भोजन पहले ही पूरा कर लेना बेहतर होगा.
बीमारी में जबरन निर्जला व्रत न रखें
एकादशी का उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि संयम और भगवान विष्णु का स्मरण करना है. बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, बीमार व्यक्ति या नियमित दवा लेने वाले लोग निर्जला व्रत करने की जिद न करें. वे चिकित्सकीय जरूरत और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार या केवल अन्न त्याग कर सकते हैं.
आखिर क्या है सही नियम?
अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा, लेकिन इसका अनुशासन 6 सितंबर की दशमी से शुरू हो जाएगा. पूरे विधि-विधान से व्रत रखने वालों के लिए सूर्यास्त से पहले एक बार सात्विक भोजन करना श्रेष्ठ है.
सामान्य रूप से अन्न त्याग करने वाले लोग अधिकतम शाम 7:29 बजे से पहले भोजन समाप्त कर सकते हैं. एकादशी लगने के बाद केवल चावल ही नहीं, बल्कि सभी अनाज और दालों से बचना चाहिए. व्रत का संकल्प 7 सितंबर की सुबह लिया जाएगा और पारण 8 सितंबर को स्थानीय पंचांग में दिए गए समय के अनुसार किया जाएगा.
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