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‘मोदी जी आपने चीन के सामने…’, जिनपिंग संग मीटिंग पर कांग्रेस ने उठाए सवाल


18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के द्विपक्षीय बैठक को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने पीएम मोदी को निशाने पर रखकर चार सवालों को जोर देकर उठाया और कहा कि देश भी अभी भी इन चार अनुत्तरित सवालों के जवाब जानना चाहता है.

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी, चीन के साथ भारत के संबंधों का सामान्य होना एक बात है, लेकिन आपकी ओर से जो देखने को मिला है, वह सोच-समझकर किया गया आत्मसमर्पण है.’

मोदी-जिनपिंग पर क्या बोले जयराम रमेश?

कांग्रेस ने रविवार (13 सितंबर, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक को लेकर पार्टी के संचार विभाग के महासचिव और सांसद जयराम रमेश की तरफ से उठाए सवालों को साझा किया गया. जयराम रमेश ने अपने वक्तव्य में कहा, ‘अब जबकि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी द्विपक्षीय शिखर बैठक खत्म हो चुकी है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ये चार अनुत्तरित सवाल हैं, जिनके जवाब देश अब भी जानना चाहता है.’ 

जयराम रमेश ने उठाए कौन से चार सवाल?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पहला सवाल किया, ‘क्या 19 जून, 2020 को चीन को दी गई आपकी कुख्यात क्लीन चिट ने भारत को कमजोर नहीं किया? 15-16 जून, 2020 की रात गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने की लड़ाई में हमारे 20 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया. सीमा पर 45 सालों में इस तरह सैनिकों की जान गंवाने की यह पहली घटना थी. इसके सिर्फ चार दिन बाद, 19 जून, 2020 को आपने सर्वदलीय बैठक में बिना किसी स्पष्ट कारण के कहा था- ना कोई हमारी सीमा में घुस आया है, ना ही कोई घुसा हुआ है. इस बयान को आज तक वापस नहीं लिया गया है. क्या इससे बाद की वार्ताओं में भारत की स्थिति बहुत कमजोर नहीं हुई?’ 

दूसरा सवाल- ‘आपने लद्दाख और अब अरुणाचल प्रदेश में चीन को क्षेत्रीय बढ़त हासिल करने की अनुमति क्यों दी? पूर्वी लद्दाख के बड़े हिस्से में हमारे पारंपरिक पेट्रोलिंग और पशुओं को चराने के अधिकारों को चुपचाप, लेकिन निश्चित रूप से छोड़ दिया गया है. इस बीच अरुणाचल प्रदेश में चीनी अतिक्रमण की खबरें भी सामने आईं हैं, जिनमें भारत की कुछ पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक पहुंच खत्म होना और नए गतिरोध शामिल हैं. अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन का रवैया और सख्त हुआ है- वह शहरों और स्थानों के नाम बदल रहा है, जिसे वह दक्षिण तिब्बत कहता है, उस पर अपने दावे दोहरा रहा है और ब्रह्मपुत्र के ग्रेट बेंड पर 60,000 मेगावाट के मेडोग मेगा-डैम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. यह परियोजना हमारे पूरे पूर्वोत्तर की जल सुरक्षा पर चीन को बेहद मजबूत नियंत्रण दे सकती है.’ 

तीसरा सवाल- ‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन के समर्थन को लेकर आपने भारत के पक्ष को नरम क्यों पड़ने दिया? 4 जुलाई, 2025 को डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से सेना के उस आकलन की बात की थी, जिसके मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की मदद करने में चीन की भूमिका गहरी और निर्णायक थी. लेकिन अचानक 25 अगस्त, 2026 को पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने VIF में दिए एक लेक्चर में बिल्कुल अलग बात कही- एक ऐसी संस्था, जिससे खुद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी करीबी तौर पर जुड़े रहे हैं. क्या यह कल की बैठक से पहले माहौल बदलने की किसी रणनीति का हिस्सा था?’

चौथा सवाल- ‘आपने चीन के साथ व्यापार घाटे को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने क्यों दिया? 2025/26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसने हमारे उद्योग के बड़े हिस्से, खासकर MSMEs, को बर्बाद कर दिया है. महत्वपूर्ण कच्चे माल, मैन्युफैक्चरिंग कम्पोनेंट्स और इंटरमीडियट गुड्स के लिए चीन पर हमारी निर्भरता खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है. Make in India और Import from China अब एक ही सिक्के के दो पहलू बन गए हैं. इस अस्वीकार्य स्थिति को बदलने का रोडमैप कहां है?’ 

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