एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई ने AI को लेकर दुनियाभर के नेताओं और टेक एक्सपर्ट में एक नई बहस को छेड़ दिया है. यह बहस है कि क्या AI की वर्तमान गति को धीमा किया जाना चाहिए? या इसे इसी गति से आगे बढ़ने देना चाहिए. एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई के हाल में प्रकाशित एक लेख के अनुसार उनका कहना है कि AI बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, AI का इस गति से बढ़ना इंसान के लिए खतरा भी हो सकता है.
उनका कहना है कि जिस गति से AI आगे बढ़ रहा है, वह बहुत ही जल्द दूसरी पीढ़ी की AI तकनीक बना लेगा. इस पूरी प्रक्रिया ‘रिकरसिव सेल्फ इम्प्रूवमेंट’ कहा जाता है और यह खतरनाक हो सकता है. अब इस बहस में अमेरिका के राष्ट्रपति से लेकर कई टेक एक्सपर्ट कूद पड़े हैं.
डारियो अमोदेई के बयान पर अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और कुछ अन्य अमेरिकी सांसदों ने कहा है कि AI में हमारे प्रतिद्वंद्वी खासकर चीन रुकेंगे नहीं, इसलिए अमेरिका को भी पीछे नहीं हटना चाहिए. हालांकि ट्रम्प ने “सुरक्षा उपायों” और घरेलू विनियमन की आवश्यकता को स्वीकार किया. उन्होंने सिलिकॉन वैली की कंपनियों को सरकारी हस्तक्षेप के साथ शक्तिशाली AI मॉडल बनाने में मदद करने के लिए कड़े नियमों में कटौती करने का भी आश्वाशन दिया. इसके साथ ही सुरक्षा के लिए गति को कम करने की तुलना में आर्थिक और भू-राजनीतिक सर्वोच्चता को प्राथमिकता दी.
दुनिया के टेक दिग्गजों के तर्क
दुनियाभर के टेक दिग्गजों जैसे सैम ऑल्टमैन और डेमिस हसाबिस ने AI की धीमी गति की ज़रूरत पर सहमति जताई. दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और X और स्पेस एक्स कंपनी के मालिक एलन मस्क ने तीन शब्दों ” पेस दि फ्रन्टिअर” कहकर इसके लिए सहमति जताई है.
पेपल के पूर्व चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर डेविड सैक्स ने कहा कि AI को धीमा करने की मांग पूरी तरह वाजिब नहीं है, इसमें कई लोगों के स्वार्थ छुपे हुए हैं. कई अन्य नेताओं ने इसकी आलोचना भी की है. आलोचकों का तर्क है कि अगर कंपनियां सच में धीमा करना चाहें तो खुद कर सकती हैं, सरकार से नियम मांगना कालाबाज़ारी जैसा लगता है.
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Input By : Praveen Kumar Yadav
