राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने रविवार को खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहा. उन्होंने यह बात ‘हॉर्स ट्रेडिंग और लोकतंत्र’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाषण की शुरुआत करते हुए कही.
सिब्बल ने एक कार्यक्रम में ‘हॉर्स ट्रेड एंड डेमोक्रेसी’ पर बात करते हुए खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहा. उन्होंने कहा, “मुझे कबूल करना है. मैं एक ‘दिमागी नक्सल’ हूं.
आपको बता दें कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अक्सर अपने वैचारिक विरोधियों पर हमला बोलने के लिए करते रहे हैं. पीएम मोदी का कहना रहा है कि ऐसे लोग तंत्र में बैठकर नीतियों को प्रभावित करते हैं और समाज के लिए खतरा बनते हैं.
राजनीतिक खरीद-फरोख्त पर उठाए सवाल
कपिल सिब्बल ने एक कार्यक्रम में विधायकों और सांसदों की खरीद-फरोख्त पर गहरी चिंता जताई. सिब्बल ने कहा कि प्राचीन समय में युद्ध जीतने के लिए घोड़ों की बहुत अहमियत होती थी और उन्हें बेचने वाले व्यापारी खरीदारों को बेवकूफ बनाते थे. लेकिन आज माहौल बदल चुका है अब बेचने वाले से ज्यादा खरीदने वाला चालाक हो गया है. उन्होंने कहा कि नेताओं की खरीद-फरोख्त केवल कोई छोटा-मोटा राजनीतिक घोटाला नहीं है, बल्कि यह देश के संविधान और लोकतंत्र के लिए बड़ा संकट है.
वोट का अपमान
सिब्बल के मुताबिक, यह तरीका जनता के दिए गए जनादेश का अपमान करता है. चुनाव के बाद पैसों का लालच देकर, पद का वादा करके या जांच से बचाने का डर दिखाकर जबरन बहुमत तैयार कर लिया जाता है. उन्होंने अंत में कहा कि इसका सबसे बुरा नतीजा यह होता है कि आम नागरिक वोट किसी और को देता है, लेकिन सत्ता की चाबी किसी और के हाथ में चली जाती है.
बता दें विपक्ष पीएम मोदी के दिमागी नक्सल वाले तंज को लेकर अक्सर निशाना साधता रहता है. कई बड़े नेताओं ने इस पर बयान दिया था.
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