मध्य प्रदेश के स्कूली छात्रों और उनके माता-पिता के लिए एक बहुत जरूरी खबर सामने आई है. राज्य सरकार ने स्कूली शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से डिजिटल और आसान बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. अब मध्य प्रदेश के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की आधार कार्ड की तरह एक खास और अलग पहचान आईडी बनाई जाएगी. इस नई आईडी को APAAR ID (Automated Permanent Academic Account Registry) का नाम दिया गया है.
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा कर दी है. सरकार का मकसद हर बच्चे के पढ़ाई-लिखाई से जुड़े सारे रिकॉर्ड को एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना है, ताकि भविष्य में छात्रों को किसी भी तरह की कागजी दिक्कतों का सामना न करना पड़े. आइए जानते हैं कि यह अपार आईडी क्या है और इससे छात्रों को क्या फायदे होंगे.
क्या है 12 अंकों की APAAR ID?
अपार आईडी मुख्य रूप से 12 अंकों का एक खास नंबर होगा, जो सीधे तौर पर छात्र की पढ़ाई से जुड़ा रहेगा। इसे आप छात्रों का डिजिटल रिपोर्ट कार्ड या एजुकेशन आधार भी कह सकते हैं. केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी प्रोग्राम चलाया जा रहा है. मध्य प्रदेश में इस योजना को तेजी से लागू किया जा रहा है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 1 करोड़ स्कूली बच्चों की अपार आईडी बनाई जा चुकी है. इसका मतलब है कि राज्य के करीब 78.5 फीसदी छात्रों का यह डिजिटल खाता तैयार हो चुका है और बाकी बचे छात्रों के लिए भी काम तेजी से चल रहा है.
इस आईडी में क्या-क्या जानकारी रहेगी दर्ज?
एक बार जब किसी बच्चे की अपार आईडी बन जाएगी, तो स्कूल से लेकर कॉलेज तक की उसकी पूरी जानकारी इसमें दर्ज होती रहेगी। इस 12 अंकों के नंबर में छात्र का नाम, उम्र और उसके माता-पिता की जानकारी, उसके हर साल के परीक्षा परिणाम, टीसी और माइग्रेशन सर्टिफिकेट, स्कॉलरशिप का पूरा विवरण शामिल रहेंगे.
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छात्रों और अभिभावकों को इससे क्या फायदे होंगे?
इस डिजिटल आईडी के बन जाने से छात्रों और उनके माता-पिता को कई बड़े फायदे मिलेंगे, जब कभी आप एक शहर से दूसरे शहर जाएंगे और ऐसे में बच्चे को भी स्कूल बदलना होता है, तो इस परिस्थिति में अपार आईडी होने से नया स्कूल सिर्फ इस 12 अंकों के नंबर की मदद से बच्चे का पुराना सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन देख सकेगा और एडमिशन तुरंत हो जाएगा.
साथ ही, अपार आईडी में सारा डेटा डिजिटल रूप से बिल्कुल सुरक्षित रहेगा, जिसे कभी भी और कहीं भी ऑनलाइन डाउनलोड किया जा सकेगा. इस आईडी के जरिए सरकार सीधे तौर पर योग्य छात्रों की पहचान कर सकेगी. इससे स्कॉलरशिप का पैसा बिना किसी देरी के और सीधे सही छात्र तक पहुंच सकेगा.
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