अमेरिका ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि ऑर्बिट में भी उनके हथियार मौजूद हैं. अमेरिकन स्पेस फोर्स के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि अमेरिका के पास ऑन-ऑर्बिट स्पेस कंट्रोल वेपन्स हैं, जो दुश्मन की कार्रवाई के खिलाफ संयुक्त सेना की रक्षा कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि इन क्षमताओं का इस्तेमाल हमलावर और रक्षात्मक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है.
इसमें काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक दोनों तरीके शामिल बताए गए हैं. अमेरिका का कहना है कि अंतरिक्ष अब राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बन गया है, क्योंकि अर्थव्यवस्था और सेना उपग्रहों पर बहुत निर्भर हैं. उन्होंने आगे कहा कि 2019 में स्पेस फोर्स इसलिए बनाई गई थी कि चीन और रूस जैसे देशों से बढ़ते खतरे का सामना किया जा सके.
‘स्पेस डोमेन में कंट्रोल जरूरी’
बयान में आगे कहा गया है कि स्पेस कंट्रोल में वे मिशन क्षेत्र शामिल हैं, जो स्पेस डोमेन में चुनौती देने और उस पर नियंत्रण रखने के लिए जरूरी हैं. इसमें दुश्मन की क्षमताओं को प्रभावित करने के लिए काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है. अमेरिका के मुताबिक स्पेस डोमेन को अब राष्ट्रीय सुरक्षा के एक अहम हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि दुनिया की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा सैटेलाइट जैसे स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर है.
अमेरिका ने बीजिंग और मॉस्को को बताया खतरा
कभी कोल्ड वॉर के दौरान अपनी ताकत दिखाने का जरिया रहा अंतरिक्ष अब एक अहम रणनीतिक इलाका बन गया है, क्योंकि देश सैन्य और तकनीकी बढ़त हासिल करने की होड़ में लगे हैं. अमेरिकी स्पेस फोर्स का कहना है कि बीजिंग और मॉस्को कई ऐसे नए सिस्टम बना रहे हैं, जिनका मकसद मिलिट्री की क्षमता बढ़ाना और यूएस की स्पेस सर्विस पर निर्भरता खत्म करना है. साथ ही वे एडवांस्ड काउंटर-स्पेस क्षमताओं का टेस्ट कर उन्हें तैनात भी कर रहे हैं.
स्पेस फोर्स का कहना है कि चीनी मिलिट्री का मानना है कि भविष्य की लड़ाइयों में स्पेस की अहम भूमिका होगी, जिससे लंबी दूरी तक सटीक हमले किए जा सकेंगे और दूसरी मिलिट्री को स्पेस-बेस्ड जानकारी का इस्तेमाल करने से रोका जा सकेगा.
बयान में कहा गया है कि चीन अपनी मिलिट्री को मॉडर्न बनाने की कोशिश के तहत स्पेस और काउंटर-स्पेस क्षमताएं भी विकसित कर रहा है. रूस दुनिया का सबसे बड़ा स्पेस प्रोग्राम चलाता है. हालांकि उसे फ़ंडिंग की दिक्कतों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. फिर भी स्पेस फोर्स के मुताबिक वह एक सक्षम स्पेस प्लेयर बना हुआ है. इसमें आगे कहा गया है कि रूस स्पेस को युद्ध के मैदान के तौर पर देखता है और उसका मानना है कि भविष्य की लड़ाइयों में स्पेस पर दबदबा एक निर्णायक फैक्टर होगा.
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