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टाटा ट्रस्ट के समर्थन में आए शरद पवार, बोले- ‘ग्रुप का मालिकाना हक…’


टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच विवाद पर पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने मंगलवार को टाटा ग्रुप से अपील की है. उन्होंने कहा है कि अंदरूनी लीडरशिप के मसले को सही प्रक्रिया और बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए. उन्होंने बकायदा एक पत्र जारी करते हुए एक्स पर अपनी राय दी है. साथ ही टाटा ट्रस्ट का समर्थन किया है और कहा है कि बिजनेस को समाजसेवा करते रहना चाहिए. 

शरद पवार ने कहा है कि तय गवर्नेंट के स्ट्रक्चर तक तहत टाटा ट्रस्ट की इंस्टीट्यूशनल रोल और अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए. इसके अलावा कहा है कि ग्रुप का मालिकाना हक किसी एक व्यक्ति के पास नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा है कि लीडरशिप के मुद्दे को आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत सुलझाया जाना चाहिए. 

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि भारत के डेवलपमेंट में टाटा ग्रुप का अहम योगदान है और इसे बनाए रखना होगा. इसके तहत ट्रस्ट की आधारित विरासत की रक्षा करना जरूरी है. 

पवार ने जमेशदजी टाटा के विजन का किया जिक्र

पवार ने कहा कि जमेशदजी टाटा का विजन, जिसे सर दोराबजी और सर रतन टाटा ने आगे बढ़ाया है, यह था कि कंपनी से बनाई गई संपत्ति समाज को वापस मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि उनकी होल्डिंग्स को ट्रस्ट में रखा गया था जिससे ग्रुप का मालिकाना हक किसी व्यक्ति के पास न हो. बिजनेस में ज्यादातर हिस्सेदारी चैरिटेबल उद्देश्यों के लिए समर्पित ट्रस्ट के पास रहे. इसलिए टाटा संस का मालिकाना स्ट्रक्चर भी परोपकार को अपनाता है. ऑपरेटिंग कंपनियां टाटा संस के तहत आती है. सर रतन टाटा ट्रस्ट, और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट, पार्टनर ट्रस्टों के साथ, टाटा संस की लगभग 66 प्रतिश हिस्सेदारी रखते हैं. यह डिजाइन जानकर बनाया गया है, न कि संयोगवश इसे तैयार किया गया. 

पवार ने कहा कि इसलिए अच्छा बिजनेस जनहित के कामों को फंड करता है. ट्रस्ट को मिलने वाली ज्यादा हिस्सेदारी का डिविडेंट सीधे हेल्थ, एजुकेशन, रिसर्च और रूरल अजीविका में जाता है. महाराष्ट्र खुशकिस्मत है कि इसका मैन सेंटर है. मुंबई में स्थित टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल TIFR, TISS और NCPA सभी नेशनल लेवल के इंस्टीट्यूशन हैं. इनकी स्थापना ट्रस्ट ने की थी.

महाराष्ट्र को इन ट्रस्टों की मेजबानी करने पर गर्व है: शरद पवार

महाराष्ट्र को इन प्रतिष्ठित चैरिटेबल ट्रस्टों की मेजबानी करने पर गर्व है. ट्रस्ट को कमजोर करने से वे संस्थान कमजोर होंगे जिन पर देश और राज्य के लोग निर्भर हैं. एक सदी से भी ज्यादा समय से ट्रस्ट लंबे समय के मालिक रहे हैं. इन्होंने कम समय के मुनाफे से ज्यादा मूल्यों और प्रतिष्ठा को महत्व दिया है. इससे टाटा नाम में लोगों का भरोसा बना है. पवार ने 17 सितंबर 2026 को हुई मीटिंग का जिक्र करते हुए कहा है कि इसमें बोर्ड ने 4-1 से एन चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 से अगले पांच सालों के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर फिर से नियुक्त करने का फैसला किया है. 

टाटा ग्रुप के चैरिटेबल ओनरशिप की रक्षा होना चाहिए

उन्होंने कहा है कि बोर्ड ने टाटा संस को लिस्ट करने की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों को भी मंजूरी दी है. टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इन दोनों फैसलों के खिलाफ वोट दिया है, जबकि ट्रस्ट्स के दूसरे नॉमिनी वेणु श्रीनिवासन ने इनके पक्ष में वोट दिया है. टाटा ट्रस्ट्स जिसके पास टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, का मानाना है कि यह प्रस्ताव शुरु से ही अमान्य है. उनका तर्क है कि आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन के मुताबिक, चेयरमैन की नियुक्ति के लिए टाटा ट्रस्ट की तरफ से नॉमिनेट किए गए डायरेक्टर्स का ज्यादातर समर्थन जरूरी है. दो नॉमिनी के मौजूद होने पर उनका तर्क है कि नियुक्ति के लिए दोनों का समर्थन जरूरी होगा. पवार ने अपील की है कि टाटा ग्रुप महाराष्ट्र से जुड़ा एक राष्ट्रीय संस्थान है. इसकी चैरिटेबल ओनरशिप की रक्षा होना चाहिए. 





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