Headlines

‘संवैधानिक मर्यादाओं का…’ वंदे मातरम विवाद पर राज्यपाल ने CM डीके को लिखा पत्र


कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पत्र लिखकर राज्य सरकार के उस फैसले पर फिर से विचार करने को कहा है जिसके तहत सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को दो अंतरों तक सीमित कर दिया गया है. कांग्रेस सरकार ने हाल ही में आदेश दिया था कि उसके कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएं, सिवाय उन कार्यक्रमों के जिनमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल शामिल हों.

मुख्यमंत्री को 22 सितंबर को लिखे एक पत्र में, राज्यपाल ने कहा कि आठ सितंबर, 2026 का सरकारी आदेश केंद्र द्वारा जारी दिशानिर्देशों के खिलाफ लगता है और ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026’ के संदर्भ में संवैधानिक और कानूनी सवाल खड़े करता है. उन्होंने राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान से संबंधित गृह मंत्रालय के आदेशों का हवाला दिया और कहा कि केंद्र ने वंदे मातरम् के गायन के लिए एक आधिकारिक संस्करण निर्धारित किया था.

संसद के कानून का राज्य को करना चाहिए पालन 

गहलोत ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में 2026 के संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि संसद ने धारा 3 के तहत वैधानिक संरक्षण का विस्तार राष्ट्रीय गीत तक कर दिया था. उन्होंने कहा, “संसद ने अब स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रीय सम्मान के वैधानिक ढांचे के अंतर्गत ला दिया है. इसलिए यह वांछनीय है कि राष्ट्रीय गीत के गायन से संबंधित राज्य की कार्यपालिका की कार्रवाई को किसी भिन्न राज्य-विशिष्ट संस्करण को निर्धारित करने के बजाय केंद्रीय वैधानिक और कार्यकारी ढांचे के साथ सावधानीपूर्वक सामंजस्य स्थापित किया जाए.” 

राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में हालिया संशोधन को महत्वपूर्ण बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि संसद ने सोच समझ कर वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में वैधानिक संरक्षण प्रदान किया था. गहलोत ने राज्य सरकार को सलाह दी कि वह यह जांच करें कि क्या गायन को दो अंतरों तक सीमित करने का आदेश 2026 के संशोधन, गृह मंत्रालय के निर्देशों, संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और केंद्र तथा राज्यों के बीच विधायी एवं कार्यकारी शक्तियों के वितरण के अनुरूप लगातार बनाए रखा जा सकता है, साथ ही राष्ट्रीय प्रतीकों से संबंधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित प्रोटोकॉल के पालन में एकरूपता और गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता को भी ध्यान में रखा जाए.

संवैधानिक मर्यादाओं का ध्यान रखा जाए

गहलोत ने कहा, “राज्य सरकार को 8 सितंबर 2026 के सरकारी आदेश पर पुनर्विचार करने और राज्य सरकार के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के गायन के संबंध में केंद्र सरकार के प्रचलित निर्देशों का पालन करने की सलाह देता हूं,” राज्यपाल ने यह आशा व्यक्त की कि इस मुद्दे पर “संवैधानिक मर्यादा, राष्ट्रीय प्रोटोकॉल में एकरूपता और भारत के राष्ट्रीय गीत के प्रति उचित सम्मान” के हित में विचार किया जाएगा.

इनपुट : पीटीआई(भाषा)



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *