कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर तीखा बयान दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “ज्ञानेश कुमार, भाजपा का एजेंट था, है और रहेगा.” खरगे ने साथ ही कहा कि जब तक कांग्रेस को बैलेट पेपर से मतदान का अधिकार नहीं मिलता, तब तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी. यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, एसआईआर और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर लगातार सवाल उठा रही है.
29 सितंबर को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में खरगे ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने की जिम्मेदारी एक बार फिर कांग्रेस के सामने है. खरगे ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव को कमजोर किया है और मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं.
‘चुनाव आयोग कमजोर नहीं, मजबूत और भरोसेमंद होना चाहिए’
खरगे ने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को कमजोर करने के पक्ष में नहीं है. उनका कहना था कि आयोग इतना मजबूत और विश्वसनीय होना चाहिए कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों उसके फैसलों पर भरोसा कर सकें. उन्होंने एसआईआर के फैसले, चुनाव आयुक्तों को कथित तौर पर इंटरनल पोर्टल से बाहर रखने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े सवाल भी उठाए. खरगे ने पूछा कि एसआईआर का फैसला किसने लिया और दो चुनाव आयुक्तों को इंटरनल पोर्टल से बाहर क्यों रखा गया.
कांग्रेस ने रखीं पांच मांगें
खरगे ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की पांच मांगें भी गिनाईं. इनमें मतदाता सूची में होने वाले बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक करना, हटाए गए मतदाताओं को इसकी जानकारी देकर अपील का मौका देना, राजनीतिक दलों को मतदाता सूची से जुड़ा डेटा सरल प्रारूप में समय पर उपलब्ध कराना, गंभीर विसंगतियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और फैसलों में पारदर्शिता शामिल है. उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी बात यह है कि प्रत्येक मतदाता को यह भरोसा होना चाहिए कि उसका वोट सुरक्षित है.
‘लड़ाई किसी दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं’
खरगे ने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई किसी दल, संस्था या व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि मतदाताओं के अधिकार, संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर है. उन्होंने कहा कि चुनाव आते-जाते हैं और सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान स्थायी हैं. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबसे शक्तिशाली व्यक्ति आम मतदाता है, न कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या सत्ता में बैठा कोई नेता. खरगे ने CWC से अपील की कि मतदाता सूची पारदर्शी हो, चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष रहे, संस्थाएं स्वतंत्र रहें और हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित हो.
‘वोटबंदी’ से जोड़ा मतदाता सूची का मुद्दा
खरगे ने नोटबंदी का जिक्र करते हुए मतदाता सूची में बदलावों को ‘वोटबंदी’ बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी के दौरान गरीबों को लाइन में खड़ा होना पड़ा था, जबकि कथित ‘वोटबंदी’ में गरीबों को लाइन से ही बाहर करने की कोशिश हो रही है. उन्होंने कहा कि गरीब, दलित, वंचित और शोषित वर्ग के पास सबसे बड़ी ताकत उसका वोट है और कांग्रेस इसे छिनने नहीं देगी.
CEC हटाने और पीएम के इस्तीफे की मांग
खरगे ने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने CEC की कुछ गतिविधियों को मनमाना और अनुचित बताया है. इसी आधार पर उन्होंने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग की. साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की. ये मांगें कांग्रेस अध्यक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोपों पर आधारित हैं. खरगे ने कहा कि देश में पांच राज्यों के चुनाव सामने हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि किसी मतदाता का अधिकार प्रभावित न हो और चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों का भरोसा बना रहे.
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