पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने शनिवार (3 अक्टूबर, 2026) को 2026-27 के लिए राज्यसभा के विभागवार आठ स्थायी संसदीय समितियों के पुनर्गठन के बाद किसी की भी अध्यक्षता AITC को न मिलने पर आपत्ति जताई है. उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र भी लिखा है.
राज्यसभा के सभापति को लिखे गए पत्र में तृणमूल कांग्रेस (AITC) के सांसद डेरेक ओब्रायन ने सवाल किया, ‘क्या हम संसद को एक गहरे और अंधेरे से भरे चेंबर में बदल रहे हैं?’ उन्होंने कहा, ‘राज्यसभा के अधिकार क्षेत्र में आने वाली 8 विभागों से जुड़ी संसदीय स्थायी समितियों में से किसी में भी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) को सही प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है.’
सभापति को लिखे पत्र में क्या बोले TMC सांसद?
TMC सांसद डेरेक ओब्रायन ने अपने पत्र में कहा, ‘राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़ी पार्टी है, उसके बाद कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और AITC तीसरी सबसे पार्टी है. फिर भी जिन्हें 2024-25 और 2025-26 में लगातार दो सालों तक समितियों का अध्यक्ष बनाया गया था, उन्हें अब हटा दिया गया है. 2019 में जब हम राज्यसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी थे, तब भी हमें संसदीय समिति के अध्यक्ष का पद नहीं दिया गया था.’
TMC Rajya Sabha MP Derek O’Brien writes to Chairman CP Radhakrishnan, objecting to AITC not being allotted the chairpersonship of any of the eight Department-related Standing Committees for 2026–27. pic.twitter.com/AWigGuVEpT
— ANI (@ANI) October 3, 2026
उन्होंने कहा, ‘कुछ सालों के बाद इस प्रक्रिया को ठीक किया गया, लेकिन अब फिर से वही स्थिति वापस आ गई है. असल में इन्हीं और कई अन्य कारणों की वजह से यह कहना जरूरी हो गया है कि संसद को एक गहरे और अंधेरे चेंबर में बदला जा रहा है.’
पत्र में TMC सांसद ने दिए चार उदाहरण
उन्होंने अपने पत्र में आगे कहा, ‘स्थायी समितियों की अध्यक्षता के चुनाव के तरीके के अलावा, यहां चार और उदाहरण हैः
- 2004-09 के बीच हर 10 में से 6 विधेयकों को जांच के लिए समितियों को भेजा जाता था. वहीं, 2019-24 के बीच हर 10 विधेयकों में से सिर्फ दो विधेयक जांच के लिए समितियों के पास भेजे गए.
- वर्तमान में पारित होने वाले हर 10 में से चार विधेयकों को अध्यादेश के रूप में लाया जाता है. इसके उलट, 20 साल पहले यह संख्या हर 10 बिल में से 2 विधेयकों को अध्यादेश के रूप में लाया जाता था.
- पहली लोकसभा में संसद औसतन 45 दिनों तक बैठक करती थी. दूसरे और तीसरे सत्र के दौरान लोकसभा औसतन 36 दिनों तक बैठी. वहीं, 2016-24 के बीच 17वें लोकसभा के दौरान यह औसत घटकर 18 दिन रह गया.
- लोकसभा में उपसभापति का पद साल 2019 से खाली पड़ा हुआ है.
TMC के किन-किन सांसदों से छिनी संसदीय समिति की अध्यक्षता
लोकसभा और राज्यसभा में 2026-27 के लिए स्थायी संसदीय समितियों का पुनर्गठन किया गया. इस प्रक्रिया के तहत ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) से लोकसभा सांसद कीर्ति आजाद, जो रसायन और उर्वरक संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष थे, की जगह इस साल TMC की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.
वहीं दूसरी तरफ, वाणिज्य संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष के रूप में TMC की राज्यसभा सांसद डोला सेन की जगह इस साल BJP के राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी को नियुक्त किया गया है.
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