डायनामाइट से पहले नाइट्रोग्लिसरीन का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर विस्फोटक के तौर पर होता था. लेकिन इसकी अस्थिरता की वजह से इसे सुरक्षित रूप से ले जाना और संभालना काफी मुश्किल था.

1864 में स्टॉकहोम में नोबेल की फैक्ट्री में नाइट्रोग्लिसरीन का एक बड़ा धमाका हुआ. इस धमाके में उनके छोटे भाई एमिल नोबेल और कई कर्मचारी मारे गए.

इस हादसे के बाद अल्फ्रेड नोबेल ने नाइट्रोग्लिसरीन को कंट्रोल करने और इसे इंसानों के व्यावहारिक इस्तेमाल के लिए सुरक्षित बनाने के तरीके पर खोज शुरू की.

नोबेल ने पाया कि लिक्विड नाइट्रोग्लिसरीन को कीसेलगुहर के साथ मिलाया जाता है तो मिट्टी उस तरल को पूरी तरह से सोख लेती है.

नई पदार्थ को ठोस छड़ों का आकार दिया जा सकता था और सामान्य हलचल, गिरने या तापमान में बदलाव से इसके फटने की संभावना काफी कम थी.

डायनामाइट को भरोसेमंद तरीके से फोड़ने के लिए ब्लास्टिंग कैप और फ्यूज की जरूरत होती थी. इससे कर्मचारियों को यह कंट्रोल करने में आसानी होती थी कि विस्फोटक कब फटेगा.

नोबेल ने इस अविष्कार का नाम डायनामाइट रखा. यह ग्रीक शब्द डायनामिक्स से आया है. इसका मतलब है शक्ति या ताकत. उन्होंने 1867 में इस अविष्कार का पेटेंट कराया.

नोबेल ने डायनामाइट मुख्य रूप से माइनिंग, कंस्ट्रक्शन, सुरंग, सड़क और नहर के लिए बनाया था. लेकिन बाद में सैन्य इस्तेमाल ने उन्हें परेशान किया और नोबेल पुरस्कार शुरू करने के उनके फैसले में बड़ी भूमिका निभाई.
Published at : 06 Oct 2026 05:31 PM (IST)
