उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लंबे समय से 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शन कार्यो ने बुधवार (7 अक्टूबर) को उत्तर प्रदेश सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के घर का घेराव किया. घर के बाहर प्रदर्शन में शामिल दिव्यांग अभ्यर्थी ने जमीन पर लेटकर नारेबाजी की.
इस दौरान अभ्यर्थियों की पुलिस से नोंकझोक भी हुई. प्रदर्शनकारियों ने 2018 की भर्ती में आरक्षण का लाभ देने और 5% छूट के आधार पर संशोधित चयन सूची जारी करने की मांग की.
‘8 साल से मंत्रियों के जा रहे घर’
अभ्यर्थी आशुतोष वर्मा ने बताया कि 8 साल से अपनी मांगो को लेकर मंत्रियों के घर जा रहे थे. जिस भी मंत्री ने हम लोगों की बात नहीं सुनी उसको फिर से मंत्री नहीं बनाया गया है. चाहे वो पूर्व मंत्री अनुपमा जायसवाल हो सतीश चंद द्विवेदी हो (अनुपमा जायसवाल 2017 से 2019 तक बेसिक शिक्षा मंत्री रही, सतीश चंद द्विवेदी 2019 से 2022 तक इस विभाग के मंत्री रहे) इन लोगों ने अपने कार्यकाल के दौरान हम लोगों के साथ न्याय नहीं किया था. जिसके बाद आज दोनों मंत्री सड़क पर हैं. अगर इस बार भी हम लोगों के साथ न्याय नहीं हुआ तो संदीप सिंह को हारने से कोई रोक नहीं सकता है.
अभ्यर्थी आशुतोष वर्मा ने बताया कि हम सब पिछले आठ साल से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं. 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण के प्रावधानों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया. राज्य और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से भी आरक्षण से जुड़े नियमों के पालन के निर्देश दिए गए हैं. हम सबकी मांग है कि आयोग के आदेशों को लागू करते हुए भर्ती की संशोधित चयन सूची जारी की जाए. नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर उनका संघर्ष जारी है.
क्या है अभ्यर्थियों की मुख्य मांग?
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक 2018 में 68,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती निकाली गई थी. इसमें दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए 5 फीसदी छूट का प्रावधान था, लेकिन इन श्रेणियों के अभ्यर्थियों को छूट का लाभ नहीं मिला. सामान्य अभ्यर्थियों के साथ ही परिणाम जारी कर दिया गया. इसी को लेकर वे संशोधित चयन सूची जारी करने और आरक्षण संबंधी प्रावधानों को लागू करने की मांग कर रहे हैं.
