पाकिस्तान की सेना के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच जारी संघर्ष के दौरान सऊदी में और ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों की जल्द तैनाती पर सहमति जताई है. सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती को लेकर लिए गए फैसले में आसिम मुनीर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है.
दरअसल, पाकिस्तानी संसद ने 11 साल पहले हूती संघर्ष से खुद को दूर रखने के लिए वोटिंग की थी, लेकिन पाकिस्तान ने सऊदी अरब और तुर्किए के साथ अगस्त महीने में मक्का डिफेंस ट्रिटी पर साइन किया था, जो सऊदी साम्राज्य पर हूती विद्रोहियों के हमलों के तेज होने के बाद इस हफ्ते सोमवार (5 अक्टूबर, 2026) को लागू किया गया.
पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने क्या कहा?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट, साल 2025 में सऊदी और पाकिस्तान के बीच हुए उस समझौते पर आधारित है, जिसके तहत पाकिस्तान ने मई महीने तक सऊदी अरब में करीब 8,000 सैनिकों की तैनाती की थी.
इस संबंध में पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने कहा कि गठबंधन ने सभी जरूरी सरकारी प्रक्रियाओं का पालन किया है. हालांकि, इससे स्पष्ट नहीं होता है इसमें पाकिस्तानी कैबिनेट या संसद शामिल थी या नहीं. इसके अलावा, सैनिकों की तैनाती से जुड़ी जानकारी को ऑपरेशनल कॉन्फिडेंसियलिटी का मामला करार दिया.
अब पाकिस्तान का समय बदल गया है- कुगेलमैन
वहीं, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अटलांटिक काउंसिल में दक्षिण एशिया के सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन ने कहा कि पाकिस्तान इस वक्त एक अलग दौर में है, जहां की संसद अपेक्षाकृत कमजोर है. उन्होंने कहा, ‘पहले भी इस तरह के समय देखे गए थे, जब पाकिस्तान की संसद सेना को कहीं भी भेजने के पक्ष में वोट करती थी और पाकिस्तानी सेना भी संसद के उन फैसलों का पालन करती थी, लेकिन अब समय बदल गया है.’
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