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Exclusive: इस्लामाबाद में रह रहा हबीबुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह, पाकिस्तानी फोन और IP एड्रेस दे रहे गुनाहों की गवाही


साल 2005 में जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले में लश्कर ए तैयबा का एक कुख्यात आतंकी कमांडर था सलीम लंगड़ा उर्फ सैफुल्लाह. इस आतंकी का असली नाम हबीबुल्लाह था, लेकिन हर किसी को अपना नाम सलीम उर्फ सैफुल्लाह ही बताया करता था. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के क़सूर जिले से ताल्लुक रखने वाले लश्कर ए तैयबा के कमांडर सलीम लंगड़ा उर्फ सैफुल्लाह ने कुलगाम के यारीपोरा में अपना बेस स्थापित किया था और यारीपोरा की ही एक महिला शब्बीरा कुच्चे से निकाह किया था. साल 2007 तक कुलगाम में इस आतंकी ने कई बार ग़ैर कश्मीरियों को निशाना बनाया और उनकी हत्या की.

2007 में कश्मीर से भाग गया था पाकिस्तान
एक पैर में घुटने के नीचे नकली टांग लगाकर चलने वाला सलीम लंगड़ा उर्फ सैफुल्लाह साल 2007 में अपने 1 साल के बेटे उमर को यारीपोरा में ही छोड़ कर अपनी पत्नी शब्बीरा के साथ पाकिस्तान भाग गया. पाकिस्तान वापस पहुंचकर कुछ साल इसने कसूर में दूध की डेरी चलायी और साल में 3 बार क़सूर में ही स्थित लश्कर ए तैयबा के मरकज़ यरमूक में जाकर आतंकियों को ट्रेनिंग दिया करता था. हालांकि साल 2012 में स्थिति बदली और लश्कर ए तैयबा के टॉप आतंकी कमांडर ज़की उर रहमान लखवी ने सलीम लंगड़ा उर्फ सैफुल्लाह को पूरे कश्मीर का प्रमुख बना दिया. जिसमें इसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान में ही बैठ कर आतंकियों की ट्रेनिंग से लेकर हमले करवाने की जिम्मेदारी थी. 

2013 में भारतीय सेना पर कराया हमला
3 सितंबर 1982 को हबीबुल्लाह नाम से क़सूर में जन्म लेने वाले इस आतंकी ने जहां 2005 से 2007 तक ख़ुद का नाम सलीम उर्फ सैफुल्लाह रखा तो लश्कर ए तैयबा द्वारा जम्मू कश्मीर का प्रमुख बनने के बाद इसने अपना नाम साजिद जट्ट रख लिया, जिसके बाद हबीबुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद उर्फ साजिद जट्ट उर्फ लंगड़ा ने जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले करवाने शुरू किए. शुरुआत में पहला बड़ा आतंकी हमला 2013 में हैदरपोरा में भारतीय सेना पर करवाया. साथ ही इसने जम्मू कश्मीर में रहने वाले भाजपा के नेताओं को निशाना बनाना शुरू किया.

पहलगाम हमले से जुड़ा नाम
इसी तरह डीकेजी आतंकी हमला, सुरनकोट आतंकी हमले में इसने भारतीय सेना को निशाना बनाया लेकिन आम लोगों पर सबसे बड़ा हमला हबीबुल्लाह ने 9 जून 2024 को रायसी में करवाया, जब शिव खोरी की तरफ हिंदू श्रद्धालुओं को ले जा रही बस में आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग की और 9 हिंदू श्रद्धालुओं की इस हमले में जान चली गई. रायसी में हमले के 10 महीने और 6 दिन के बाद 15 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले आतंकी बिलाल अफ़ज़ल उर्फ फ़ैसल जट्ट के मोबाइल फ़ोन पर हबीबुल्लाह उर्फ सैफ़ुल्लाह साजिद उर्फ अली साजिद बैसरन घाटी के पास का एक कॉर्डिनेट भेजता है और अगले दिन फिर बैसरन घाटी का एक कॉर्डिनेट भेजता है. व्हाट्सएप पर भेजे गए दोनों लोकेशन कॉर्डिनेट वाले मेसेज का बिलाल अफ़ज़ल उर्फ फैसल जट्ट अपने फ़ोन स्क्रीनशॉट ले लेता है.

पहलगाम हमले को अंजाम देने के बाद बिलाल अफ़ज़ल उर्फ फ़ैसल जट्ट, हबीब ताहिर और हनन ज़फ़र उर्फ हमज़ा अफ़ग़ानी के पास से 2 मोबाइल फ़ोन बरामद होते हैं, जिन्हें जब सेंट्रल फॉरेंसिक लेबोरेटरी भेजा जाता है तो उसमें से एक मोबाइल फ़ोन में हबीबुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ अली साजिद के व्हाट्सएप के ज़रिए भेजे गए कॉर्डिनेट का स्क्रीनशॉट और इन कॉर्डिनेट्स को अल्पाइन क्वेस्ट ऐप में सेव करने के सबूत मिलते हैं.

NIA की जांच में क्या पता चला
NIA की जांच में पुष्टि हुई कि जिस मोबाइल नंबर से बिलाल अफ़ज़ल उर्फ फैसल जट्ट के फ़ोन पर बैसरन पार्क में हमला करने के कॉर्डिनेट भेजे गए थे. वो हबीबुल्लाह उर्फ सैफ़ुल्लाह साजिद उर्फ अली साजिद का है. इसके अलावा आतंकियों के पास से बरामद हुए 2 मोबाइल फ़ोन की एनआईए द्वारा जानकारी मांगे जाने पर मोबाइल निर्माता कंपनी एनआईए को बताती है कि एक मोबाइल फ़ोन कराची में स्थित फ़ैसल हाउस के पास डिलीवर हुआ था. दूसरा मोबाइल लाहौर के क़ायदे आज़म इंडस्ट्रियल एस्टेट के मकान नंबर 109-M/C-10 पते पर डिलीवर हुआ था. सूत्रों के मुताबिक़ दोनों ही पतों के ठीक बगल में लश्कर ए तैयबा की मरकज़ है ऐसे में ट्रेस से बचने के लिए लश्कर ने बगल वाली इमारतों का डिलीवरी एड्रेस डाला था.

22 अप्रैल को जब पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था, उस दिन लश्कर ए तैयबा ने अपने छद्म नाम द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के द्वारा शाम 4 बजकर 32 मिनट पर कश्मीर फाइट्स नाम के सोशल मीडिया अकाउंट से हमले की जिम्मेदारी ली थी. अकाउंट की आईपी ट्रैकिंग के बाद जांच में सामने आया है लश्कर ए तैयबा का ये आधिकारिक अकाउंट पाकिस्तान के ख़ैबर पख्तूनख़्वाह प्रांत के बटग्राम इलाके से ऑपरेट हो रहा था.

हमले के 3 दिन के बाद 25 अप्रैल को जब पाकिस्तान पर पहलगाम हमले का अंतरराष्ट्रीय दबाव बनने लगा और जैसे ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने पहलगाम हमले की निंदा की. ठीक कुछ घंटे के बाद टेलीग्राम पर TheResistanceFront नाम का एक अकाउंट बनाया जाता है और दावा किया जाता है कि हमला लश्कर ने नहीं करवाया था और हमले की पुरानी ज़िम्मेदारी जिस अकाउंट से ली गई थी वो हैक हो गया था. 

कईं बार नाम बदल चुका है हबीबुल्लाह
एबीपी न्यूज़ की एक्सक्लूसिव पड़ताल में सामने आया है TRF का ये टेलीग्राम अकाउंट जिस मोबाइल नंबर से संचालित हो रहा था वो पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में रहने वाले मोहम्मद इब्राहिम यूनुस का था. इतना ही नहीं एबीपी न्यूज़ के हाथ पहलगाम समेत दर्जन भर से ज़्यादा आतंकी हमले करने का आदेश देने वाले हबीबुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद उर्फ साजिद जट्ट उर्फ अली साजिद का पाकिस्तानी शिनाख़्ती कार्ड भी मौजूद है, जिसे ख़ुद पाकिस्तान की सरकार ने साल 2020 में जारी किया था. शिनाख़्ती कार्ड के मुताबिक़ भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी हबीबुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद उर्फ साजिद जट्ट उर्फ अली साजिद इस्लामाबाद के पोर्श सेक्टर में रहता है.

कहां है वर्तमान ठिकाना
एबीपी न्यूज़ के हाथ लगी खुफिया जानकारी के मुताबिक हबीबुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद का अभी फिलहाल अड्डा इस्लामाबाद का सोआन गार्डन में स्थित तीन मंजिला मकान है जो लश्कर का कमांड सेंटर भी है और यहां पर हबीबुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद के अलावा भारत में वांटेड एक और आतंकी ग़ुलाम अब्बास उर्फ समामा और लश्कर कमांडर हुज़ैफ़ बक्करवाल भी रहता है. हबीबुल्लाह के आदेश पर आतंकी हमले को अंजाम देने वाले तीनों आतंकी पाकिस्तान के ही रहने वाले थे. जहां बिलाल अफ़ज़ल उर्फ फ़ैसल जट्ट उर्फ सुलेमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शेखपुरा का रहने वाला था, तो हबीब ताहिर पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर के रावलकोट और हनन ज़फ़र उर्फ हमज़ा अफ़ग़ानी पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर के यूनियन काउंसिल चोकिया का रहने वाला था.

पहलगाम आतंकी हमले की पहली चार्जशीट फाइल करने के बाद एनआईए आतंकी हमले में शामिल और आतंकियों,संगठनों की जांच में लगी हुई है और चार्जशीट में भी एनआईए ने जिक्र किया है कि वो हमले में जैश ए मोहम्मद, अल कायदा और हमास के लिंक की जांच कर रही है. ऐसे में देखना होगा कि आने वाले दिनों में एनआईए को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कौन से नए सुराग मिलते हैं और आखिर कब तक सैफुल्लाह जट्ट जैसे कसाई खुलेआम पाकिस्तान में घूमते रहते हैं.

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