Vaishakh Vinayak Chaturthi 2026: आज वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी है. ये व्रत समस्त कार्यों में आ रहे विघ्न को दूर कर सफलता प्रदान करता है. साथ ही जीवन में कष्ट भोग रहे साधक की परेशानियां दूर होती है. इस व्रत में कथा का जरुर श्रवण करना चाहिए इसके बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है.
संकर्षण विनायक चतुर्थी व्रत कथा
एक बार राजा दशरथ ने महर्षि वशिष्ठ से कहा -हे गुरुदेव! कृपया वैशाख शुक्ल चतुर्थी व्रत का महत्व बताइए. वशिष्ठ जी बोले – गुजरात में भद्रक नाम का एक सुंदर नगर था. वहाँ राजा ब्रह्मप्रिय नाम के एक धर्मात्मा और दानी राजा राज्य करते थे.
वे बहुत ज्ञानी थे, यज्ञ करते थे और ब्राह्मणों व अतिथियों का सम्मान करते थे. लेकिन उनके जीवन में एक बड़ी समस्या थी— उनकी पत्नियाँ एक-एक करके मरती चली गईं. उनकी पांच पत्नियों की मृत्यु हो गई, जिससे वे बहुत दुखी हो गए. दुखी होकर राजा ने राज्य छोड़ दिया और जंगल में अपने गुरु श्वेतकेतु के आश्रम में पहुंच गए.
राजा ने अपनी सारी दुखभरी कहानी सुनाई. तब श्वेतकेतु जी ध्यान में गए और बोले हे राजन! यह सब इसलिए हुआ क्योंकि तुम्हारे राज्य में चतुर्थी व्रत का पालन नहीं हो रहा था. जो लोग यह व्रत नहीं करते, उनके शुभ कर्म भी फल नहीं देते. राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने पूछा “हे गुरुदेव! यह व्रत कैसे किया जाता है और किसकी पूजा होती है?
यह व्रत भगवान गणेश का होता है, जो सभी विघ्नों को दूर करने वाले हैं. उन्होंने आगे अपनी कहानी सुनाई उनके पिता उद्दालक ने उन्हें सिखाया था कि मन (चित्त) को शांत करके भगवान गणेश की उपासना करनी चाहिए. गणेश जी की कृपा से मन शांत होता है और इंसान मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त कर सकता है.
श्वेतकेतु जी ने राजा को गणेश जी का मंत्र दिया. राजा ब्रह्मप्रिय वापस अपने राज्य आए और पूरे राज्य में घोषणा कर दी. हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का व्रत किया जाए. उन्होंने खुद भी श्रद्धा से व्रत रखा और गणेश जी की पूजा की.
फलस्वरूप उनका जीवन सुखमय हो गया उन्होंने अच्छे से राज्य किया. अंत में वे भगवान में लीन (मोक्ष) हो गए दूसरी कथा (पापी ब्राह्मण की) वशिष्ठ जी ने एक और उदाहरण दिया- महाराष्ट्र में एक बहुत पापी ब्राह्मण रहता था.वह शराब पीता, चोरी करता और बुरे काम करता था.
एक दिन वह एक स्त्री के साथ गलत काम करते हुए पकड़ा गया और उस स्त्री के पति ने उसे घायल कर दिया. उस दिन चतुर्थी तिथि थी, और चोट के कारण वह ब्राह्मण पूरे दिन भूखा रहा. अगले दिन उसकी मृत्यु हो गई. लेकिन चौंकाने वाली बात यह हुई कि अनजाने में चतुर्थी का व्रत रखने के कारण उसे भी मोक्ष मिल गया.
जो मनुष्य वैशाख शुक्ल चतुर्थी के माहात्म्य का श्रवण अथवा पाठ करेगा, उसके सभी मनोरथ सिद्ध होंगे. इस प्रकार श्रीमुद्गलपुराण में वर्णित वैशाख शुक्ल चतुर्थी माहात्म्य सम्पूर्ण होता है.
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