भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र से बेटियों की तरक्की को लेकर एक बेहद शानदार और ऐतिहासिक रिपोर्ट सामने आई है. जेंडर पैरिटी इंडेक्स GPI और शिक्षा मंत्रालय की ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन AISHE की ताजा रिपोर्ट के मुताबि, उच्च शिक्षा में महिलाओं के एडमिशन में 42.2 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. रिपोर्ट के आंकड़े साफ बताते हैं कि अब कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई के मामले में लड़कियां लड़कों को काफी पीछे छोड़ रही हैं. यह रिपोर्ट देश में महिला सशक्तिकरण और बदलते सामाजिक परिवेश की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर पेश करती है, जो यह साबित करती है कि अब बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं.
जेंडर पैरिटी रिपोर्ट में लड़कियों का दबदबा
इस ताजा रिपोर्ट में सबसे खास बात जैंडर पैरिटी इंडेक्स का स्कोर है, जो 1.08 पर पहुंच गया है. शिक्षा के क्षेत्र में जब यह इंडेक्स 1.0 से ऊपर होता है, तो इसका सीधा मतलब होता है कि उच्च शिक्षा में लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या अधिक है.
बड़ी बात यह है कि देश में लगातार सातवें साल यह इंडेक्स 1.0 के पार बना हुआ है. यह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय समाज में अब बेटियों की पढ़ाई-लिखाई को लेकर सोच पूरी तरह बदल चुकी है और माता पिता उन्हें आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहयोग दे रहे हैं.
करोड़ों में पहुंची छात्राओं की संख्या
अगर हम संख्या के हिसाब से बात करें, तो उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी में आया उछाल वाकई हैरान करने वाला है. साल 2014-15 में जहां उच्च शिक्षा में एडमिशन लेने वाली छात्राओं की संख्या केवल 1.57 करोड़ थी, वहीं अब यह बढ़कर 2.24 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है.
इसका सीधा मतलब यह है कि पिछले एक दशक में करीब 67 लाख नई छात्राओं ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी में कदम रखा है. वर्तमान में उच्च शिक्षा के कुल एडमिशन में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 49.7 प्रतिशत हो चुकी है, तो इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.
ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो में भी मारी बाजी
रिपोर्ट में ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो को लेकर भी बेहद दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं. देश में 18 से 23 साल के युवाओं में उच्च शिक्षा का कुल जीईआर 30 के स्तर पर पहुंच चुका है. लेकिन जब हम इसे महिला और पुरुष के आधार पर अलग-अलग देखते हैं, तो यहां भी महिलाएं आगे खड़ी नजर आती हैं. जहां पुरुषों का ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो 28.9 प्रतिशत है, वहीं महिलाओं का रेश्यो 31.2 प्रतिशत दर्ज किया गया है. मतलब कॉलेज जाने के मामले में लड़कों के मुकाबले लड़कियां कहीं ज्यादा दिलचस्पी दिखा रही हैं.
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साइंस और टेक्नोलॉजी में भी आगे
इस रिपोर्ट के मुताबिक, साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरीगं और मैथ्स यानी STEM कोर्सेज में भी लड़कियों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है. आज देश में STEM कोर्सेज मे कुल एडमिशन 1.02 करोड़ से ज्यादा हो चुका है, जिसमें लड़कियों की हिस्सेदारी अकेले 44 प्रतिशत है. यह बदलाव दर्शाता है कि देश की बेटियां अब न सिर्फ पढ़ रही हैं, बल्कि तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों में भी एक मजबूत भविष्य की ओर कदम बढ़ा रही हैं.
कॉलेज परिसरों में बढ़ा महिला टीचर्स का मान
जब कॉलेजों में छात्राओं की संख्या बढ़ रही है, तो उन्हें पढ़ाने वाली महिला शिक्षिकाओं के ग्राफ में भी शानदार सुधार देखने को मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में कुल 17.32 लाख टीचर्स काम कर रहे हैं, जिनमें से महिला टीचर्स की हिस्सेदारी 44.9 प्रतिशत हो चुकी है. महिला फैकल्टी की संख्या में आई यह मजबूती कॉलेज परिसरों के माहौल को छात्राओं के लिए अधिक सुरक्षित, सहज और समावेशी बना रही है, जिससे आने वाले समय में महिलाओं का यह ग्राफ और भी ऊपर जाने की पूरी उम्मीद है.
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