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‘विधायक बने तो CM, सांसद का चुनाव लड़ा तो PM’, CM मोहन ने की प्रधानमंत्री की तारीफ


मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों की तारीफ की है. उन्होंने कहा कि देश ही नहीं, दुनिया में भी ऐसा अनूठा उदाहरण मिलना मुश्किल है. नरेंद्र मोदी ने जितनी बार विधायक का चुनाव लड़ा, हर बार मुख्यमंत्री बने और जितनी बार सांसद का चुनाव लड़ा, हर बार प्रधानमंत्री बने. यह अपने आप में एक विशिष्ट रिकॉर्ड है. दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि उनका गृह राज्य गुजरात है, लेकिन उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई.

उन्होंने कहा, ”जिस दौर में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया गया, उस समय देश में लगभग 25 वर्षों से गठबंधन की राजनीति का प्रभाव था. वर्ष 1984 में स्वर्गीय इंदिरा गांधी जी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला था. उसके बाद 1989 से लेकर 2013 तक देश की राजनीति में गठबंधन का दौर प्रमुखता से बना रहा.”

बीजेपी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया- मोहन यादव

CM मोहन यादव ने आगे कहा, ”उस समय यह धारणा बन गई थी कि गठबंधन के बिना केंद्र में सरकार बनाना और चलाना लगभग असंभव है. भारतीय जनता पार्टी के बारे में भी कहा जाता था कि वह अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती. ऐसे राजनीतिक माहौल में भाजपा द्वारा नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना अपने आप में एक बड़ा और चुनौतीपूर्ण निर्णय था. उस समय पार्टी के नेतृत्व को लेकर कई नामों की चर्चा होती थी, लेकिन पार्टी ने नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व पर विश्वास जताते हुए उन्हें प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया.”

उन्होंने कहा कि यह निर्णय नेतृत्व के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता और राजनीतिक विश्वास का प्रतीक था. जनता ने भी नरेंद्र मोदी जी को जिस उत्साह और विश्वास के साथ स्वीकार किया, वह भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ. वर्ष 2013 में प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में सामने आए नरेंद्र मोदी जी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की और देश के प्रधानमंत्री बने.

‘गृह मंत्री अमित शाह हर राज्य में जाकर कानूनों की समीक्षा कर रहे’

सीएम डॉ. मोहन यादव ने गृहमंत्री अमित शाह का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री एक-एक राज्य में जाकर कानूनों के क्रियान्वयन की समीक्षा कर रहे हैं. यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार केवल निर्णय लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें प्रभावी रूप से लागू कराने के लिए भी प्रतिबद्ध है.

उन्होंने कहा कि जनविश्वास अधिनियम के माध्यम से मध्यप्रदेश में लगभग 900 अनुपयोगी कानूनों को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं. वहीं, योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग का गठन, प्रगति मंच के माध्यम से परियोजनाओं की समीक्षा, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और पीएम गतिशक्ति योजना जैसी पहलों ने शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समन्वित बनाया है.

‘UPI के विस्तार ने भारत को डिजिटल लेन-देन में वैश्विक पहचान दिलाई’ 

डिजिटल तकनीक और यूपीआई के विस्तार ने भारत को डिजिटल लेन-देन के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाई है. आज देश में होने वाले डिजिटल लेन-देन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 40% बताई जाती है. वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में डिजिटल भुगतान की यह व्यवस्था देश की आर्थिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.

PM मोदी के नेतृत्व में ऊर्जा सुरक्षा को भी प्राथमिकता- मोहन यादव

CM ने आगे कहा, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ऊर्जा सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है. रिफाइनरी जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं और ऊर्जा अवसंरचना के विकास से देश की तैयारियों और क्षमता को मजबूती मिली है.सेमीकंडक्टर मिशन, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन और एआई मिशन जैसी पहलें भारत को भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. साथ ही, देश में दो लाख से अधिक स्टार्टअप युवाओं की उद्यमशीलता को नई उड़ान दे रहे हैं और उनके सपनों को साकार करने के अवसर प्रदान कर रहे हैं.”

‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होना हमारे लिए गौरव का विषय’

डॉ मोहन यादव ने कहा, ”वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होना हम सभी के लिए गौरव का विषय है. आज हम कल्पना भी नहीं कर सकते कि कभी ऐसा समय था, जब पूरे वंदे मातरम् का गायन करना संभव नहीं माना जाता था. लेकिन इसकी 150वीं वर्षगांठ पर पूरे देश में वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को लेकर एकरूपता बनी और इसकी पंक्तियों एवं गायन की व्यवस्था भी निर्धारित की गई. यह और भी सुखद लगा, जब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने स्वयं पूरे वंदे मातरम् का गायन करने की बात कही.”

अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर चंद्रयान जैसे अभियानों का जिक्र

उन्होंने कहा कि आज हम अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर चंद्रयान जैसे अभियानों तक भारत की उपलब्धियों को देख रहे हैं. हमारे वैज्ञानिकों का मनोबल बढ़ाने और असफलता के समय उन्हें गले लगाने की भावना भी कम बड़ी बात नहीं है. जब वैज्ञानिक किसी मिशन को सफल बनाने का संकल्प लेते हैं, तो कभी-कभी परिस्थितियों के कारण असफलता भी मिलती है. ऐसे समय में उन्हें निराश करने के बजाय प्रोत्साहित करना चाहिए. संसाधन लगे, धन खर्च हुआ, लेकिन कोई बात नहीं; असफलता के कारणों की जांच होगी, कमियों को दूर किया जाएगा. आज असफल हुए हैं, तो कल सफल भी होंगे. यही सकारात्मक सोच हमारे वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है.

‘हमारे खिलाड़ियों की उपलब्धियां भी देश का गौरव बढ़ा रही’

सीएम ने कहा कि इसी तरह, आज हमारे खिलाड़ियों की उपलब्धियां भी देश का गौरव बढ़ा रही हैं. एक समय था, जब हम गिने-चुने खेलों में ही भारत की सफलता की उम्मीद करते थे. हॉकी में मेजर ध्यानचंद जैसे महान खिलाड़ियों का स्वर्णिम इतिहास रहा, लेकिन उसके बाद लंबे समय तक ओलंपिक में हॉकी का स्वर्ण पदक नहीं मिला. कबड्डी जैसे कुछ खेलों में कभी-कभार सफलता मिलती थी. लेकिन आज हमारे खिलाड़ी लगभग हर खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं. एशियाई खेलों में भी भारत के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार आया है और अब निरंतरता दिखाई दे रही है.

खेलों को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया गया- मोहन यादव

उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ नई शिक्षा नीति, 2020 में खेलों को केवल एक गतिविधि तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है. इसका सकारात्मक प्रभाव भी दिखाई देने लगा है. क्रिकेट में भारत की बढ़ती ताकत इसका एक उदाहरण है. आज स्थिति यह है कि भारतीय क्रिकेट की अलग-अलग टीमें एक साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग ले रही हैं और शानदार प्रदर्शन कर रही हैं. एक समय था, जब एक ही टीम में खिलाड़ियों के चयन को लेकर काफी चुनौतियां रहती थीं. 

आज प्रतिभा की प्रचुरता ऐसी है कि भारत के पास एक नहीं, बल्कि कई मजबूत टीमें हैं. अलग-अलग टीमों में खेलते हुए भी हमारे खिलाड़ी जीत का परचम लहरा रहे हैं. यह सब उस सकारात्मक माहौल का परिणाम है, जिसमें देश के वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं. वास्तव में, यह भारत के लिए एक अद्भुत और उत्साहजनक समय है.

शिक्षा, स्वास्थ्य और नारी शक्ति का जिक्र

शिक्षा, स्वास्थ्य और नारी शक्ति से लेकर सुरक्षा, संस्कृति और विरासत तक, देश ने बीते वर्षों में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं. राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया गया. स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष्मान भारत योजना के तहत ₹5 लाख तक के उपचार की सुविधा मिल रही है. वहीं, प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से लोगों को सस्ती दरों पर जेनेरिक दवाइयाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं.

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की गई है. राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी देश ने ऐसे फैसले लिए, जिन्हें कभी असंभव माना जाता था. धारा 370 को हटाना एक ऐतिहासिक निर्णय था. उस समय तरह-तरह की आशंकाएं जताई जाती थीं, यहाँ तक कि खून की नदियाँ बहने की बातें कही जाती थीं. लेकिन यह निर्णय प्रभावी ढंग से लागू हुआ.

‘भारतीय सेना की सामर्थ्य और सुरक्षा क्षमताएं और मजबूत हुईं’

सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य शक्ति, दृढ़ इच्छाशक्ति और आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई करने की क्षमता को प्रदर्शित किया. आज भारतीय सेना की सामर्थ्य और देश की सुरक्षा क्षमताएं पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई हैं. एक समय था, जब देश के विभिन्न हिस्सों में बम धमाकों और आतंकवादी घटनाओं की खबरें आती रहती थीं. आज भारत आतंकवाद के विरुद्ध मजबूती से खड़ा है और देश की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं.

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ- मोहन यादव

संस्कृति और विरासत के संरक्षण के क्षेत्र में भी देश ने नई उपलब्धियां हासिल की हैं. अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ. काशी विश्वनाथ धाम का भव्य स्वरूप सामने आया और उज्जैन में श्री महाकाल महालोक का विकास हुआ. इन प्रयासों ने भारत की आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान दी है.

एमपी में धार्मिक पर्यटन में अभूतपूर्व बदलाव हुआ- मोहन यादव

मध्यप्रदेश में भी धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है. महाकाल महालोक के विकास और बेहतर सुविधाओं के कारण उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. जहाँ पहले सीमित संख्या में श्रद्धालु आते थे, वहीं अब उनकी संख्या करोड़ों में पहुंच रही है. पिछले वर्ष लगभग 13 करोड़ लोगों के आने का उल्लेख किया गया और इस वर्ष प्रदेश में कुल 20 करोड़ पर्यटकों के आगमन का लक्ष्य बताया जा रहा है.

‘केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना समेत एमपी कई सौगातें मिलीं’

यह बदलाव दर्शाता है कि विकास, बेहतर सुविधाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के समन्वय से धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है. मोदी सरकार के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना और तापी बेसिन से जुड़ी परियोजना जैसी महत्वपूर्ण सौगातें मिली हैं. वहीं, प्रदेश का नक्सलमुक्त होना भी एक बड़ी उपलब्धि है. कभी बालाघाट जिले के सूपखार और आसपास के वन क्षेत्रों में जाना जोखिम भरा माना जाता था, लेकिन अब नक्सलवाद से मुक्ति के बाद इन क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन बहाल हुआ है.

वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश ने ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं. प्रदेश आज “चीता स्टेट” के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है. आधुनिक परिवहन और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश निरंतर आगे बढ़ रहा है. भोपाल और इंदौर में मेट्रो रेल का संचालन प्रदेश के शहरी विकास को नई गति दे रहा है. वहीं, भोपाल का रानी कमलापति रेलवे स्टेशन आधुनिक सुविधाओं और विश्वस्तरीय स्वरूप का उत्कृष्ट उदाहरण है.

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