पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में शनिवार (17 अक्टूबर) को दुर्गा पूजा पंडाल के एक हिस्से के ढहने से 17 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 35 अन्य लोग घायल भी हुए हैं. इस दुर्घटना पर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता कुणाल घोष ने दुख जताया है. उन्होंने कहा कि उत्तरी कोलकाता के चोर बागान पूजा में एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी है. पूजा के समय यह एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है.
उन्होंने कहा कि वहां मौजूद कुछ श्रद्धालुओं को मेडिकल कॉलेज ले जाने का काम चल रहा है. यह घटना कैसे या क्यों हुई, इस पर बाद में बात की जा सकती है, लेकिन अभी हमारी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना है. हम पुलिस प्रशासन से अपील करते हैं, हमारे कार्यकर्ता सहयोग कर रहे हैं. अस्पतालों में मेडिकल स्टाफ की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए. हम पुलिस के साथ सहयोग कर रहे हैं. पंडाल के अंदर अभी भी राहत और बचाव कार्य किए जाने की जरूरत है. हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. पूजा के समय यह एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है.’
कुणाल घोष ने घटना को लेकर उठाए सवाल
#WATCH | Kolkata, West Bengal | TMC leader Kunal Ghosh said, “A very unfortunate incident has occurred at the Chor Bagan Puja in North Kolkata. The process of bringing some of the devotees who were there to the Medical College is ongoing. How this incident happened or why, all that comes later, but our priority is to save people. We request the police administration; our workers are cooperating. The number of medical staff in hospitals should be increased… We are cooperating with the police. Relief and rescue operations still need to be carried out inside the pandal… We are keeping an eye on the situation. This is a very unfortunate incident during the Puja time.” (Source: Self Made)
— ANI (@ANI) October 17, 2026
TMC नेता कुणाल घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटना से जुड़े कई पोस्ट शेयर किए. उन्होंने इस घटना को लेकर जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘चोरबागान. इसकी जिम्मेदारी किसकी है? पूजा समिति के नेता कहां हैं? गिरफ्तारियां क्यों नहीं हुईं? पूजा के दौरान बारिश पहली बार तो नहीं हो रही है. ज्यादा भीड़ को संभालने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे?’
उन्होंने कहा, ‘पूजा समिति के नेताओं को जिम्मेदारी से अलग रखकर इतनी बड़ी घटना की निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती है. उनके नाम और पहचान सार्वजनिक की जानी चाहिए. नगरपालिका क्या कर रही थी? विपक्ष को दबाने के अलावा उनकी पुलिस का काम क्या है? इतनी बड़ी विफलता के बाद नगरपालिका के चेयरमैन इस्तीफा क्यों नहीं देंगे? अगर वे इस्तीफा नहीं देते, तो उन्हें पद से हटा दिया जाना चाहिए.’
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