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अब क्राइम ब्रांच करेगी सौरव-आशुतोष के मामले की जांच, केस ट्रांसफर


सौरव दास और आशुतोष रांका के ट्रेस पासिंग केस की जांच अब क्राइम ब्रांच करेगी. पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस केस को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है. क्राइम ब्रांच इस मामले से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की जांच करेगी. सौरव और रांक जिस मामले में न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद हैं, वो ट्रेस पासिंग केस ही है.  

ट्रेंस पासिंग का मतलब अनाधिकृत प्रवेश है. सौरव दास और आशुतोष रांका सीजेपी समर्थकों के साथ 13 अक्टूबर को गेट फांदकर जंतर मंतर में घुस गए थे. जंतर मंतर को गृह मंत्रालय ने प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया हुआ है. इसके बाद भी सीजेपी के नेता तिरंगा लिए वहां पहुंचे. यहां पर उन्होंने नारेबाजी भी की. यहां मौजूद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था. बाद में पुलिस ने ट्रेंस पासिंग का केस दर्ज किया था.

  • आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ी
  • 21 अक्टूबर को फिर होगी कोर्ट में पेशी
  • कोर्ट ने कहा- दोनों आरोपियों का आचरण भरोसा पैदा नहीं करता कि वे दोबारा नियम नहीं तोड़ेंगे
  • 11 अक्टूबर को दिए गए बॉन्ड का उल्लंघन करने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
  • जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाने और सोशल मीडिया पोस्ट के आरोपों पर कोर्ट ने लिया संज्ञान
  • आरोपियों को दो दिन में लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश
  • जमानतियों की जांच में खामियां मिलने पर कोर्ट ने नए जमानती पेश करने को कहा
  • आशुतोष रांका और सौरव दास को 21 अक्टूबर दोपहर 2 बजे कोर्ट में पेश किया जाएगा
  • SEM रितु राज की अदालत ने पुलिस की दलीलें सुनने के बाद हिरासत बढ़ाने का आदेश दिया

14 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे

पुलिस ने 14 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे सहित हिरासत में लिए गए सीजेपी नेताओं को कोर्ट में पेश किया. यहां से बाकियों को हिरासत से छोड़ गिया गया लेकिन सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. 

फिर से पेश करने होंगे जमानत बॉन्ड- वकील

आज 19 अक्टूबर को SEM की कोर्ट में पेश किया गया जहां से दो दिनों के लिए और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. वकील धर्मवीर ने कोर्ट के फैसले के बाद बताया कि आज उनकी ज़मानत अर्जियां खारिज कर दी गईं. मामले को कल फिर से सूचीबद्ध (लिस्ट) किया जाएगा. कल इस मामले पर फैसला लिया जाएगा. ज़मानत बॉन्ड फिर से पेश करने होंगे. एक नया ज़मानत बॉन्ड पेश करने के बावजूद, सुरक्षा अधिकारी ने उसमें कुछ विसंगति (मिसमैच) बताई.

रिहा करने के बाद होना चाहिए था वेरिफिकेशन- वकील

आशुतोष रांका और सौरव दास की ओर से पेश हुए अभिक चिमनी ने कहा, “हम बहुत निराश हैं. यह प्रिवेंटिव कस्टडी (एहतियाती हिरासत) का मामला है. कोर्ट ने खुद कहा था कि उन्हें इन लोगों को ज्यूडिशियल कस्टडी (न्यायिक हिरासत) में भेजने की कोई ज़रूरत नहीं लगती. इसीलिए कोर्ट ने श्योरिटी (श्योरिटी) देने को कहा था. जब श्योरिटी पेश किए गए, तो उन्हें शुरू में ही कोई न कोई दिक्कत थी. फिर अगले श्योरिटी को लेकर भी समस्या खड़ी हो गई. कानून के मुताबिक, पहले उन्हें रिहा किया जाना चाहिए और उसके बाद वेरिफिकेशन, श्योरिटी आदि की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए. आज उन्होंने एक और श्योरिटी पेश किया और सभी ज़रूरी जानकारी भी दी. आदेश में उन्होंने एक कारण यह बताया कि एक फोटो मेल नहीं खा रही है. फिर उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ आशंका है… यह बहुत परेशान करने वाली बात है, हम देखते हैं कि आगे क्या करना है.”

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