उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) की ओर से हर साल की तरह इस साल भी महाराष्ट्र में दशहरा रैली का आयोजन किया गया. एक तरफ शिवसेना शिंदे गुट ने रैली सूखाग्रस्त किसानों को समर्पित की. वहीं उद्धव गुट ने दशहरा रैली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत बीजेपी और महायुति सरकार पर जमकर हमला बोला. उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह डबल इंजन सरकार बैठी है, बस घोषणाएं कर रही है.
वहीं मुंबई में कानून व्यवस्था को लेकर भी पूर्व सीएम ने हमला बोला. लॉरेंस बिश्नोई को लेकर उद्धव ठाकरे ने कहा, “बिश्नोई साबरमती जेल में बैठकर ढोकला-फाफड़ा खा रहा है. फडणवीस जी, अगर आपमें दम है तो अपने ‘बाबा’ के पास जाइए और उस बिश्नोई को लेकर आइए. शहरी नक्सली कहने के लिए आपकी जुबान क्यों नहीं चलती?”
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस पर क्या बोले उद्धव ठाकरे?
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस पर उद्धव ठाकरे ने कहा, “टाइगर श्रॉफ पर हमला हुआ, तो ये चमकू नेता तुरंत देखने पहुंच गए. 15 घंटे में गुंडों को पकड़ लिया, तो क्या इसके लिए उनकी तारीफ करनी चाहिए? अगर उस लड़के को गोली लग गई होती, तो आरोपी को पकड़कर क्या चाटना था?
शिवसेना यूबीटी प्रमुख ने सवाल उठाते हुए कहा, “हथियार लेकर आने वाले ये लोग आपको दिखाई नहीं दिए? अगर कोई अनहोनी हो जाती, तो आप किस मुंह से अपनी पीठ थपथपाते? अगर आपको पता चल जाता कि वे हथियार लेकर आए हैं और आपने उन्हें वहीं मार गिराया होता, तो कहा जाता कि महाराष्ट्र में कानून का राज है.
किसानों का मजाक उड़ाया गया- उद्धव ठाकरे
उन्होंने आगे कहा, “पिछले साल किसानों का मजाक उड़ाया गया था. पांच हजार रुपये की मदद दी, तो क्या कोई एहसान किया? नमो किसान योजना की दो किस्तें अभी भी बाकी हैं. कर्जमाफी हुई, लेकिन किसे कितनी रकम मिली, यह किसी को पता ही नहीं है. केंद्रीय टीम आकर चली गई, लेकिन किसे कितनी मदद मिली, यह भी किसी को नहीं पता.”
उद्धव ने परभणी के किसान का जिक्र कर साधा निशाना
उद्धव ठाकरे ने परभणी के किसान का जिक्र करते हुए कहा, “परभणी में एक गांव है. वहां के स्कूल के बच्चों की सहल (शैक्षणिक यात्रा) जाने वाली थी. एक बच्चे को नए कपड़े चाहिए थे. उसने अपने पिता से कहा कि उसे नए कपड़े चाहिए. पिता ने कहा कि सोयाबीन बेचने के बाद पैसे मिलेंगे, तब कपड़े दिला दूंगा. लेकिन सोयाबीन की फसल खराब हो गई. यह बात बच्चे को पता चली और उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.”
उद्धव ठाकरे ने रैली को लेकर क्या कहा?
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में रैली को देखकर कहा, “आज का दृश्य देखते ही रहने जैसा है. मुझे पुराने दिन याद आ गए. इस भगवे को लाल किले पर फहराना है. यह पवित्र भगवा है, जिसे छत्रपति शिवाजी महाराज और बालासाहेब ने अपनाया था. हमारी पहचान कोई भी चुरा नहीं सकता. शिवसेना प्रमुख की जन्म शताब्दी का वर्ष है और यह हीरक महोत्सवी मेलावा है. जिस शिवाजी पार्क में पहला मेलावा हुआ था, उस मैदान के नाम को भी 100 साल पूरे हो गए हैं.
उन्होंने आगे बताया, “नेता के लिए मैदान और मैदान के लिए नेता, दोनों का जन्म एक ही साल में हुआ. सोने की तरह ऐसे ही तेजस्वी बने रहो और अपनी चमक से सबको रोशन करते रहो.” उद्धव ने यह भी कहा, “मरे हुए लोग कभी क्रांति नहीं कर सकते. क्रांति मर्दों का काम है, शांति मुर्दों का काम है. मुर्गियों के दड़बे में रहने वाली मुर्गी की तरह मत जियो. बालासाहेब ठाकरे के ये वाक्य आज भी याद आते हैं.
शिवसेना यूबीटी प्रमुख ने कहा, “मुर्गियों से तो चींटियां बेहतर हैं. पहले सभाएं नीचे बैठकर होती थीं. अगर किसी चींटी पर पैर पड़ जाए या कोई उस पर बैठ जाए, तो बाकी चींटियां भागती नहीं हैं. वे एकजुट होकर काटती हैं और उस व्यक्ति का जीना मुश्किल कर देती हैं. जिस अंग पर पैर पड़ा होता है, उसी अंग को काटती हैं.”
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