उत्तराखंड की चकराता विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव से पहले ही सरगर्मी तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रत्याशी रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी के बाद इलाके में नए सियासी समीकरणों की चर्चा है. वहीं इस सीट को कांग्रेस का सुरक्षित किला कहना भी गलत नहीं होगा. राज्य गठन के बाद से ही यह सीट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह के ही पास है.
दरअसल, देहरादून जिले की चकराता सीट अनुसूचित जनजाति आरक्षित है और टिहरी गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र में आती है. हिमाचल की सीमा से सटी यह सीट लगभग पूरी तरह ग्रामीण है. 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार आँकड़ों के मुताबिक यहां करीब 55 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति और करीब 33 प्रतिशत अनुसूचित जाति की है. मतदाताओं की संख्या विभिन्न स्रोतों में अलग-अलग है, पर मोटे तौर पर 1.05 लाख के आसपास बताई जाती है.
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पांच चुनाव, एक ही नाम
उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद 2002 से 2022 तक हुए पांचों चुनाव प्रीतम सिंह ने जीते, उनके पिता गुलाब सिंह भी उत्तर प्रदेश विधानसभा में इसी क्षेत्र का आठ बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. हालांकि, जीत का अंतर हर बार एक जैसा नहीं रहा है. 2007 में प्रीतम सिंह ने निर्दलीय मधु चौहान को 3741 वोट से हराया. 2012 में उत्तराखंड जनवादी पार्टी के मुन्ना सिंह चौहान 26533 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे.
2017 में देखने को मिला कड़ा मुकाबला
सबसे कड़ा मुक़ाबला 2017 में देखने को मिला, जब भाजपा ने मधु चौहान को उतारा और प्रीतम सिंह सिर्फ 1543 वोट से यह चुनाव जीत पाए. इस चुनाव में प्रीतम सिंह को 34,968 जबकि मधु चौहान को 33425 वोट मिले थे. 2022 के चुनाव में प्रीतम सिंह को 36,853 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहे भाजपा के रामशरण नौटियाल को 27417 वोट मिले थे.
जुबिन नौटियाल के पिता की वापसी
अक्टूबर 2026 में बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल ने दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ले ली , प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम के साथ वे करीब 12 साल बाद पुरानी पार्टी में लौटे, नौटियाल कांग्रेस से ज़िला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैं उन्होंने 2014 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था और 2022 में भाजपा के टिकट पर चकराता से चुनाव लड़ा था.
क्या कहता है गणित
पुराने आंकड़ों को देखें तो प्रीतम सिंह के पक्ष में लगातार जीत, पिछली बार का बड़ा अंतर और इस सीट पर भाजपा की अंदरूनी खींचतान नज़र आती है नौटियाल के पार्टी छोड़ के जाने से भाजपा का एक स्थानीय चेहरा भी कमज़ोर हुआ है , दूसरी तरफ 2017 का नतीजा याद दिलाता है कि मज़बूत स्थानीय उम्मीदवार उतारने पर मुक़ाबला कड़ा हो सकता है फ़िलहाल चकराता सीट पर कांग्रेस का पलड़ा भारी माना जा रहा है हालांकि अंतिम तस्वीर टिकटों की घोषणा के बाद ही साफ हो सकेगी.
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