हरियाणा में निजी मेडिकल और स्वास्थ्य शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर है. निजी मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी और पैरामेडिकल कॉलेज अब छात्रों से मनमाने तरीके से फीस नहीं वसूल सकेंगे. चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय की ओर से सभी संबंधित संस्थानों के लिए फीस वसूली को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं. नए निर्देशों का उद्देश्य छात्रों और उनके अभिभावकों से तय फीस से अधिक रकम वसूले जाने की संभावनाओं पर रोक लगाना है.
निदेशक धीरेंद्र खड़गटा की ओर से जारी आदेश स्पष्ट किया गया है कि संबंधित संस्थानों को सरकार द्वारा निर्धारित फीस संरचना का ही पालन करना होगा. यानी कॉलेज अपनी तरफ से किसी छात्र से तय फीस से अधिक रकम नहीं ले सकेंगे. नए निर्देशों के बाद संस्थानों को फीस वसूली में छात्रों को यह स्पष्ट जानकारी देनी होगी कि उनसे किस मद में कितनी राशि ली जा रही है.
तय फीस से ज्यादा रकम लेने पर रोक
जारी निर्देशों के मुताबिक कोई भी निजी संस्थान छात्र या उसके माता-पिता से निर्धारित फीस से अधिक राशि किसी भी नाम या रूप में नहीं वसूल सकेगा. फीस के अलावा किसी दूसरे मद में अतिरिक्त फीस लेने की मांग भी नियमों के दायरे में आएगी. इसका सीधा फायदा उन छात्रों को मिलेगा जो मेडिकल और अन्य स्वास्थ्य संबंधी पाठ्यक्रमों में एडमिशन लेते हैं. अक्सर एडमिशन के समय छात्रों और अभिभावकों को अलग-अलग फीस के बारे में जानकारी दी जाती है. ऐसे में नई व्यवस्था के तहत संस्थानों को निर्धारित फीस के अनुरूप ही राशि लेने और उसका स्पष्ट रिकॉर्ड रखने पर जोर दिया गया है.
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फीस की जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी
निदेशालय ने सभी संबंधित संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि निर्धारित फीस की पूरी जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रमुखता से प्रदर्शित करें. इससे छात्र एडमिशन या फीस जमा करने से पहले यह पता लगा सकेंगे कि उनके पाठ्यक्रम के लिए निर्धारित फीस कितना है. फीस संबंधी जानकारी सार्वजनिक होने से छात्रों और अभिभावकों के लिए भी संस्थान की ओर से मांगी जा रही राशि का मिलान करना आसान होगा. अगर किसी छात्र से तय फीस से अधिक रकम मांगी जाती है, तो वह उपलब्ध आधिकारिक फीस के आधार पर इसकी जानकारी ले सकता है.
हर भुगतान की रसीद देना अनिवार्य
नए निर्देशों में फीस जमा करने की प्रक्रिया में रिकॉर्ड रखने पर भी जोर दिया गया है. संस्थानों को छात्रों से वसूली गई हर फीस की रसीद जारी करनी होगी. साथ ही फीस से संबंधित पूरा रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से रखना भी आवश्यक होगा. रसीद मिलने से छात्रों के पास फीस भुगतान का आधिकारिक प्रमाण रहेगा. यह व्यवस्था केवल मेडिकल कॉलेजों तक सीमित नहीं है. निर्देशों के दायरे में निजी मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी और पैरामेडिकल कॉलेज भी शामिल हैं.
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