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370 को बहाल किया जाए तो इसमें बुराई क्या? जामिया विवाद पर बोले अखिलेश के सांसद


दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ बहाल करने की मांग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. रामपुर से सपा सांसद मोहिबुल्ला नदवी ने इस पर यूनिवर्सिटी प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा जामिया के प्रति जो नजरिया है वो उसे कमजोर करने की साजिश है. 

सपा सांसद ने कहा कि जामिया की स्थापना महात्मा गांधी, मौलाना महमूद हसन देवबंदी, मौलना मोहम्मद अली जोहर, डॉक्टर मुख्तार अहमद अंसारी और बेगम उस्मान साहब जैसे दिग्गज फ्रीडम फाइटर्स ने की थी. उन सबकी कब्रें भी वहीं है. नदवी ने कहा कि इतने बड़े-बड़े फ्रीडम फाइटर्स ने जामिया को कायम किया, लेकिन अफसोस की बात है कि जामिया के प्रति हमेशा एक रवैया रहा है उसके किरदार को कमजोर करने. उन्होंने आरोप लगाया कि वहां कोई डेमोक्रेसी,कोई चैलेंज नहीं है. पुलिस अनावश्यक रूप से छात्रों को गिरफ्तार करने के लिए तैनात कर रखी है.

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सरकार पर आरोप सेना का इस्तेमाल नागरिकों को कुचलने में 

सपा सांसद ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, “फौज को, बीएसएफ को चीन बॉर्डर पर जरूरत है. सारी एनर्जी भारतीय नागरिकों को दबाने और कुचलने में लगाई जा रही है. सरहदें बहुत कमजोर होती जा रही हैं. ” उन्होंने दिल्ली पुलिस के व्यवहार पर भी सवाल उठाया और कहा कि छात्रों के प्रति बेहतर व्यवहार होना चाहिए. बोले कुछ लोगों ने उन्हें बताया कि नई उम्र के आईपीएस अधिकारियों ने बदजुबानी भी इस्तेमाल की. इसकी जांच की जा रही है.

फ्री कश्मीर-फ्री सरजिल का समर्थन

मोहिबुल्ला नदवी ने जामिया में लगे नारे और दीवारों पर लिखे नारों के लेकर सवालों पर कहा कि अगर कोई छात्र कहे कि 370 को बहाल किया जाए तो इसमें बुराई क्या है? उन्होंने कहा कि 370 असंवैधानिक तरीके से हटाया गया और वहां की विधानसभा में भी पास नहीं कराया गया.  उन्होंने पहाड़ों पर रहने वाले लोगों और ट्राइबल अधिकारी की तुलना करते हुए कहा कि अगर मुस्लिमों की किसी राज्य में आबादी ज्यादा है तो उन्हें अपने मजहब के हिसाब से रहने की आजादी क्यों नहीं मिलनी चाहिए.

इसके साथ ही नदवी ने आरोप लगाया कि देश की सारी एनर्जी मुसलमानों को दबाने में लगाई जा रही है, जबकि सरहदें सुरक्षित नहीं हैं और जवान लड़ रहे हैं. उन्होंने जामिया के वीसी से अपील की कि वे छात्रों के हक के निगेहबान हैं, फौरन बात करें. अच्छे, पॉजिटिव सोच रखने वाले छात्र नेता निकलकर आएं. जामिया या संबंधित संस्थाएं तरबियत करें, छात्रों से बात करें ताकि देश की एकता और अखंडता मजबूत हो.

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