How To Stop Child Bedwetting Naturally: बच्चे का बार-बार रात में बिस्तर गीला करना माता-पिता के लिए चिंता की वजह बन सकता है. खासकर जब बच्चा 7 साल या उससे ज्यादा उम्र का हो और फिर भी रात में पेशाब पर उसका कंट्रोल न बन पाया हो. कई माता-पिता इसे बच्चे की लापरवाही, जिद या परवरिश में कमी से जोड़ने लगते हैं. लेकिन ऐसा करना सही नहीं है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बेडवेटिंग यानी रात में नींद के दौरान पेशाब निकल जाना बच्चों में आम समस्या है और ज्यादातर मामलों में बच्चा जानबूझकर ऐसा नहीं करता.
मधुकर रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल, दिल्ली की कंसल्टेंट इन पीडियाट्रिक साइकोलॉजी श्रेया सिंघल के मुताबिक, बच्चे के बेडवेटिंग की समस्या को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि इसके पीछे कई शारीरिक कारण हो सकते हैं. इसलिए बच्चे को डांटने या शर्मिंदा करने के बजाय सही वजह समझने पर ध्यान देना चाहिए.
बेडवेटिंग का मतलब अनुशासन की कमी नहीं
कई बच्चों में शरीर रातभर पेशाब रोकने के लिए अभी पूरी तरह तैयार नहीं होता. कुछ बच्चों का ब्लैडर रातभर पेशाब रोकने के लिए छोटा हो सकता है, जबकि कुछ बच्चों के शरीर में रात के समय ज्यादा पेशाब बनता है. कुछ बच्चे इतनी गहरी नींद में सोते हैं कि ब्लैडर भरने का संकेत मिलने के बावजूद उनकी नींद नहीं खुलती. इसके अलावा कब्ज, यूरिनरी इंफेक्शन और डायबिटीज जैसी समस्याएं भी बेडवेटिंग की वजह बन सकती हैं. कुछ मामलों में नींद के दौरान सांस लेने से जुड़ी समस्या भी इसका कारण हो सकती है. अगर माता-पिता में से किसी ने बचपन में बेडवेटिंग की है, तो बच्चे में भी इसकी संभावना बढ़ सकती है.
घर पर इन छोटी बातों का रखें ध्यान
बच्चे की दिनचर्या में कुछ छोटे बदलाव भी मदद कर सकते हैं. बच्चे को दिन में नियमित रूप से टॉयलेट जाने की आदत डालें. रात को सोने से ठीक पहले एक बार टॉयलेट जरूर करवाएं. दिन में पर्याप्त मात्रा में पानी और दूसरे तरल पदार्थ लेने दें, लेकिन शाम के समय बहुत ज्यादा तरल देने से बचें.
कोला, चाय और कैफीन वाले दूसरे ड्रिंक्स से भी बचना बेहतर है. इसके साथ ही अगर बच्चे को कब्ज की समस्या है तो उसे नजरअंदाज न करें. कब्ज होने पर आंत में जमा मल ब्लैडर पर दबाव डाल सकता है, जिससे रात में बिस्तर गीला होने की संभावना बढ़ सकती है.
अब्जॉर्बेंट पैंट्स इस्तेमाल कर सकते हैं
रात में बिस्तर को गीला होने से बचाने के लिए डिस्पोजेबल अब्जॉर्बेंट पैंट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे बच्चे और माता-पिता दोनों को रात में बेहतर नींद लेने में मदद मिल सकती है. इनके इस्तेमाल से ब्लैडर को नुकसान नहीं होता और न ही बेडवेटिंग की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है.
हालांकि, इन्हें इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि इनके भरोसे बच्चे की समस्या को पूरी तरह नजरअंदाज न किया जाए. अगर बेडवेटिंग के पीछे कोई ऐसी वजह है जिसका इलाज किया जा सकता है, तो उसका पता लगाना जरूरी है. इसके अलावा गीली पैंट लंबे समय तक पहनने से बच्चे की त्वचा में जलन या परेशानी हो सकती है. इसलिए इन्हें समय पर बदलना चाहिए.

बच्चे के सामने बात करने से बचें
7 या 8 साल की उम्र के बच्चे बेडवेटिंग की वजह से शर्मिंदगी महसूस कर सकते हैं. इसलिए अगर अब्जॉर्बेंट पैंट्स का इस्तेमाल करना हो तो बच्चे से इस बारे में अकेले और आराम से बात करें. उसके सामने दूसरे लोगों से इस विषय पर चर्चा करने या उसे शर्मिंदा करने से बचें.
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर बेडवेटिंग की समस्या लगातार बनी हुई है तो बच्चे को पीडियाट्रिशियन या यूरोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए. कई बच्चों को बेडवेटिंग अलार्म से फायदा हो सकता है. यह बच्चे को ब्लैडर के संकेतों को पहचानने में मदद करता है. हालांकि, इसके लिए इसे हर रात नियमित रूप से इस्तेमाल करना और शुरुआत में माता-पिता का सहयोग जरूरी होता है. कुछ मामलों में डॉक्टर दवा भी दे सकते हैं, लेकिन यह बच्चे की जांच और स्थिति का आकलन करने के बाद ही तय किया जाना चाहिए.
अगर बच्चा कम से कम 6 महीने तक रात में बिस्तर गीला नहीं करता था और फिर अचानक ऐसा शुरू हो गया है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. इसके अलावा पेशाब करते समय दर्द, बहुत ज्यादा प्यास लगना, दिन में बार-बार पेशाब निकलना, कब्ज या तेज खर्राटे जैसी समस्याओं के साथ बेडवेटिंग हो तो भी इसे नजरअंदाज न करें.
माता-पिता का रिएक्शन सबसे ज्यादा मायने रखता है
स्कूल का तनाव, बुलिंग या घर में अचानक हुए बदलाव की वजह से कुछ बच्चों में बेडवेटिंग दोबारा शुरू हो सकती है. हालांकि, हर बार बिस्तर गीला करने का मतलब यह नहीं है कि बच्चा किसी भावनात्मक परेशानी से गुजर रहा है. ज्यादातर बच्चे खुद भी इस समस्या को लेकर परेशान होते हैं और जानबूझकर ऐसा नहीं करते. सुबह बिस्तर गीला मिलने पर माता-पिता का रिएक्शन बच्चे पर गहरा असर डाल सकता है. चिल्लाना, धमकाना, मारना या मजाक उड़ाना बच्चे के अंदर शर्म और डर पैदा कर सकता है. इससे बच्चा अपनी परेशानी बताने से भी बचने लगता है, जबकि सजा देने से ब्लैडर के काम करने का तरीका नहीं बदलता.
इसे भी पढ़ें : Cancer Medicines Price Cut: 137 कैंसर दवाएं 70% तक सस्ती, जानिए जेब पर कितना पड़ेगा असर?
बच्चे को समझाएं कि इसमें उसकी गलती नहीं है. सोने से पहले टॉयलेट जाने जैसी छोटी-छोटी आदतों को उसकी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. अगर रिवार्ड चार्ट इस्तेमाल कर रहे हैं तो सूखी रात के बजाय कोशिश के लिए स्टार दें, जैसे समय पर टॉयलेट जाना या बिस्तर बदलने में मदद करना. बच्चे की तुलना उसके भाई-बहन या किसी दूसरे बच्चे से बिल्कुल न करें.
इसे भी पढ़ें :रात को बार-बार लग रहा पेशाब? हो सकती है ये गंभीर समस्या
