जम्मू कश्मीर के भारत में विलय को आज पूरे 80 साल हो गए है. 26 अक्टूबर 1947 में आज के दिन ही महाराजा हरी सिंह ने विलय की संधी पर हस्ताक्षर किए और भारतीय सेना अगले दिन जम्मू कश्मीर में पाकिस्तानी कबाइली हमलावरों को खदेड़ने पहुंच गई थी.
विलय का यह दिन जम्मू कश्मीर के इतिहास और राजनीती दोनों के साथ जुड़ गया, लेकिन विडंबना यह कि 2019 के बाद आज पहली बार इस दिवस को मानाने के लिए कोई भी सरकारी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया.
जहां 1990 के बाद से ही कश्मीरी अलगवादी संगठन उसके बाद 27 अक्टूबर जिस दिन भारतीय सेना कश्मीर घाटी में दाखिल हुई थी. इसको काला दिन के तौर पर मानाने लगे. वहीं बीजेपी के लिए यह एक राजनितिक मुद्दा बन गया. जबकि बाकी राजनितिक दल इस को नज़र अंदाज़ ही करते रहे।
बीजेपी ने विलय दिवस मनाने की घोषणा की
5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाली धारी 370 को हटाया गया और उसके बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने आज के दिन को भव्य तरीक से मनाने की बात कही. बीजेपी ने कश्मीर विलय दिवस मानाने की घोषणा कर दी है. चार साल बाद आज के दिन का स्वरुप भी बदल गया है. जहां 70 साल तक 26 अक्टूबर को कश्मीर घाटी में आज के दिन आम हड़ताल का आह्वान किया जाता था.
विरोध प्रदर्शन होते थे और पत्थर बाजी होती थी, लेकिन धारा 370 हटने के चार साल बाद आज हाल अलग है. लाल चौक समेत पूरी कश्मीर घाटी में बाजार खुले है. स्कूल कॉलेज में काम काज सामान्य है. दफ्तर और सड़कों पर यातायात सामान्य है और इस दिवस को लेकर राजनीति भी शांति के साथ हो रही है।
बीजेपी ने अपने कार्यालय में की जनसभा
बीजेपी ने इस दिन के उपलक्ष्य में प्रदेश भर में कार्यक्रम करने की घोषणा कर दी थी, लेकिन श्रीनगर में लाल चौक में जलूस निकलने की इजाज़त ना मिलने के चलते बीजेपी ने अपने ही कार्यालय में एक जनसभा की और कार्यकर्ताओं और नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सौगात देने के लिए धन्यवाद किया.
विलय दिवस पर ही बीजेपी की विरोधी महबूबा मुफ्ती ने विलय को पूर्ण कहते हुए कहा कि हमने कभी भी विलय का विरोध नहीं किया, लेकिन जिस भारत के साथ हम ने विलय किया था यह वह नहीं है. इस सब राजनीतिक वाद-प्रतिवाद के बीच आम लोग आज के दिन को लेकर काफी उत्साहित है. सरहदी इलाके कुपवाड़ा से लेकर आतंकवाद ग्रस्त दक्षिण कश्मीर के कुलगाम तक लोग आज के दिन को लेकर उत्साहित है.
इस बीच ना तो कांग्रेस और ना ही सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस ने ही इस दिवस के उपलक्ष्य में कोई बयान जारी किया, लेकिन फारूक अब्दुल्ला ने एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि कश्मीर के लोगों ने कभी भी भारत के साथ हुए विलय पर सवाल नहीं उठाया.”
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