पिछले साल यानी 2025 के अप्रैल महीने में भारत और फ्रांस के बीच रफाल फाइटर जेट के 26 मरीन वर्जन का सौदा किया था. इन रफाल को रफाल-M के नाम से जाना जाता है. इस सौदे की कुल कीमत करीब 63 हजार करोड़ है. फ्रांस की एविएशन कंपनी दासो इन विमानों का निर्माण करती है. वायुसेना के 36 रफाल लड़ाकू विमानों की तरह ही रफाल (M) भी ‘इंटरगर्वमेंटल डील’ (IGI) यानी दोनों देशों की सरकार के बीच सीधे समझौते के तहत ही खरीदे जा रहे हैं. स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत पर तैनात करने के लिए इन रफाल-M लड़ाकू विमानों को खरीदा जा रहा है. क्योंकि, भारतीय नौसेना को करीब सात करोड़ स्क्वायर किलोमीटर क्षेत्रफल वाले पूरे हिंद महासागर की सुरक्षा की जिम्मेदारी है.
युद्धपोत यानी जंगी जहाज के जरिए इतने बड़े एरिया की निगहबानी और सुरक्षा करना थोड़ा टेढ़ी खीर है. इसलिए एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात लड़ाकू विमानों से इतने बड़े समुद्री-क्षेत्र में कोई भी बड़ी घटना होने पर फाइटर जेट के जरिए तुरंत रेस्पोंस यानी जवाबी कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन भारतीय नौसेना के स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत पर तैनात करने के लिए नौसेना के पास अपने आधुनिक फाइटर जेट नहीं हैं. जबकि विक्रांत को नौसेना में कमीश्निंग हुए पूरे चार साल हो चुके हैं.
2022 में पीएम मोदी की मौजूदगी में नौसेना में शामिल हुआ था INS विक्रांत
सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में केरल के कोच्चि नेवल बेस पर INS विक्रांत को नौसेना के जंगी बेड़े में शामिल कर लिया गया था, लेकिन उस पर तैनात करने के लिए भारत के पास फिलहाल कोई मेरीटाइम फाइटर जेट नहीं है. नौसेना के पास जो फिलहाल लड़ाकू विमान हैं, वे हैं रूस के मिग-29K, जो अब पुराने एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रमादित्य पर तैनात रहते हैं. जरूरत पड़ने पर इन मिग-29K को विक्रांत पर तैनात करना पड़ता है. खैर, रफाल-M सौदे को अब डेढ़ साल हो गया है और सबके जेहन में सवाल है कि आखिर कब आएंगे ये फाइटर जेट?
जून 2024 में पीएम मोदी ने रफाल-एम के सौदे को दी थी मंजूरी
जून 2024 में जब पीएम मोदी फ्रांस के आधिकारिक दौरे पर गए थे, तब इस रफाल-M सौदे को हरी झंडी दी गई थी. यानी अब ढाई साल हो चुके हैं. तो रफाल-M पर एक बड़ा अपडेट आया. अपडेट ये कि रफाल-M इन दिनों गोवा में भारतीय नौसेना के एविएशन बेस INS हंस पर आए हुए हैं और ये फाइनल ऑपरेशनल ट्रायल के लिए आए हैं. इन ट्रायल के बाद रफाल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी दासो, इन रफाल-एम का प्रोडक्शन शुरू कर देगी, क्योंकि मिड-2028 तक दासो को रफाल-एम की डिलीवरी शुरू करनी है.
भारत के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, साल 2030 यानी डील पर हस्ताक्षर होने के अगले पांच सालों में सभी 26 carrier-borne Rafale-M भारतीय नौसेना को मिल जाएंगे. नौसेना के लिए जो 26 रफाल (M) खरीदे जा रहे हैं, उनमें 22 सिंगल सिटर फाइटर जेट होंगे और चार ट्विन-सीटर यानी ट्रेनिंग के लिए होंगे. जरूरत पड़ने पर ट्रेनर को भी फाइटर रोल में तब्दील किया जा सकता है.
किन-किन हथियारों से लैस होगा रफाल-एम?
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आत्मनिर्भर भारत के तहत रफाल-एम में स्वदेशी हथियारों का इंटीग्रेशन भी किया जाएगा. इन हथियारों में अस्त्रा और ब्रह्मोस (एंटी-शिप) मिसाइल शामिल हैं. अभी जो भारतीय वायुसेना के पास जो 36 रफाल लड़ाकू विमान हैं, उनमें सभी मिसाइलें यूरोप की बड़ी कंपनी MBDA ने सप्लाई की हैं, मिटयोर, जो वियुंड विजुअल रेंज BVR एयर-टू-एयर यानी हवा से हवा में मार करने के लिए है. इसका इस्तेमाल अमूमन डॉग-फाइट के लिए किया जाता है.
इसके अलावा मीका, शॉर्ट रेंज के लिए और स्कैल्प है- आसमान से जमीन पर मार करने के लिए, लेकिन रफाल-एम को भारत में बनी अस्त्रा, जो लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल होगी. इसके अलावा, दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइलों में शुमार ब्रह्मोस से भी रफाल-मरीन को लैस किया जा रहा है.
गोवा में रफाल-एम के ट्रायल की कैसी हुई जानकारी?
यही वजह है कि इन दिनों आईएनएस हंस नेवल एविएशन बेस पर जो ट्रायल चल रहे हैं, बेहद खास हो जाता हैं. इन रफाल-एम के ट्रायल की खबर सबसे पहले पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की थी. एडमिरल अरुण प्रकाश, रिटायरमेंट के बाद गोवा में रहते हैं और उन्होंने गोवा के आसमान में रफाल-एम की एक तस्वीर अपने अकाउंट पर शेयर की.
उसके बाद ही पता चला कि रफाल-एम ऑपरेशन्ल ट्रायल के लिए फ्रांस से गोवा आए हैं. गोवा इसलिए, क्योंकि आईएनएस हंस पर भारतीय नौसेना की SBTF (Shore Based Training Facility) मौजूद है. ये गोवा के तट पर एक एयरक्राफ्ट कैरियर नुमा ट्रेनिंग रनवे है. कैरियर पर तैनात होने वाले फाइटर जेट के पायलट को सीधे एयरक्राफ्ट पर ऑपरेशन्स की अनुमति नहीं दी जाती है. पहले इसी SBTF पर ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है.
SBTF पर रफाल-एम का क्यों चल रहा ट्रायल?
ऐसे में मान सकते हैं कि रफाल-एम के ऑपरेशनल ट्रायल इसी SBTF पर चल रहे हैं. ये ट्रायल इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि फ्रांसीसी नौसेना के जो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, वे CATOBAR यानी Catapult तकनीक इस्तेमाल करते हैं. यानी एयरक्राफ्ट कैरियर के डेक से फाइटर जेट को कैटापुल्ट की तरह लॉन्च कर टेकऑफ कराया जाता है. ठीक वैसे, जैसी अमेरिकी एयरक्राफ्ट भी इसी CATOBAR तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन भारतीय नौसेना, रूसी तकनीक से ज्यादा प्रभावित रहती है. इसलिए STOBAR यानी शॉर्ट टेक ऑफ या जिसे हम आम भाषा में स्कीइंग तकनीक कहते हैं, उसका इस्तेमाल करते हैं.
आईएनएस विक्रमादित्य की तरह स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत विक्रांत भी STOBAR तकनीक इस्तेमाल करता है. इसलिए सीधे विक्रांत पर तैनात करने से पहले भारतीय नौसेना, फ्रांस के इन रफाल-एम विमानों को SBTF फैसिलिटी पर परख रही है.
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