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प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन पर विपक्ष की शिकायत की जांच कर सकता है निर्वाचन आयोग, क्या है पूरा मामला


निर्वाचन आयोग विपक्ष की इस शिकायत की जांच करेगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन था. आयोग के सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. वामपंथी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री मोदी का शनिवार को राष्ट्र के नाम संबोधन चुनाव संबंधी आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है और इस पर कार्रवाई की जानी चाहिए.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम. ए. बेबी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राज्यसभा सांसद पी. सन्दोश कुमार ने अलग-अलग पत्रों में निर्वाचन आयोग से शिकायत की है. असम, केरल और पुडुचेरी में मतदान हो चुका है, वहीं तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को मतदान होगा. पश्चिम बंगाल में दूसरे और आखिरी चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा.

सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री के खिलाफ शिकायत की निर्वाचन आयोग के आदर्श आचार संहिता प्रभाग द्वारा ‘जांच की जाएगी’. चुनाव आचार संहिता बीते 15 मार्च को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ लागू हो गई थी और चार मई तक लागू रहेगी, जिस दिन पांच विधानसभाओं के लिए वोटों की गिनती की जाएगी.

माकपा का आरोप, पीएम मोदी ने किया आचार संहिता का उल्लंघन

अलग-अलग लगभग 700 कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने कथित उल्लंघन पर चुनाव आयोग से संपर्क किया है. माकपा के महासचिव बेबी ने अपने पत्र में कहा कि प्रधानमंत्री ने संहिता का घोर उल्लंघन किया है और इसके लिए दूरदर्शन का राजनीतिक भाषण के लिए “दुरुपयोग” किया गया. उन्होंने कहा, “इस संबोधन को किसी भी तरह से सरकारी संबोधन नहीं कहा जा सकता.”

बेबी ने आरोप लगाया कि यह भाषण स्पष्ट रूप से राजनीतिक था, जिसमें विपक्षी दलों को निशाना बनाया गया, कई दलों के नाम लिए गए और तमिलनाडु व पश्चिम बंगाल के मतदाताओं समेत जनता की राय को सत्तारूढ़ दल के पक्ष में प्रभावित करने की कोशिश की गई.”

राष्ट्र के नाम संबोधन में क्या बोले थे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने बीते शनिवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कांग्रेस और उसके सहयोगियों को चेताया था कि लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण संबंधी संशोधन का विरोध करके उसने जो ‘भ्रूण हत्या का पाप’ किया है, उसके लिए भारत की महिलाएं उन्हें सजा जरूर देंगी.

मोदी ने महिलाओं से माफी मांगी थी और कहा था कि सरकार भले ही विधेयक पारित न करा पाई हो लेकिन वह महिलाओं को सशक्त बनाने के अपने प्रयासों को कभी नहीं छोड़ेगी. लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के संसदीय चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया था.

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