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तमिलनाडु के लिए अलग झंडे पर विचार करेगी तमिलनाडु सरकार? विजय के मंत्री का बड़ा बयान


तिरंगे जितने मान के साथ तमिलनाडु के अलग ध्वज की मांग की गई है. यह मांग तमिलनाडु सरकार में पीडब्ल्यूडी और खेल मंत्री आधव अर्जुन ने की है. इस पर बीजेपी आग बबूला हो गई है. भाजपा नेता विनोज पी. सेल्वम ने इसकी आलोचना की है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की मांग से अलगावादी मानसिकता को बढ़ावा मिल सकता है.

इधर, अर्जुन ने कहा है कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को सबसे पहले इस प्रस्तावित ध्वज को फहराना चाहिए. साथ ही इसे घर पर फहराने की अपील की है. उनकी मांग एम करुणानिधि के उस प्रस्ताव की याद दिलाती है, जिसे 1970 में रखा गयाथा, हालांकि, कभी लागू नहीं किया जा सका. 

तमिलनाडु के मंत्री अर्जुन का यह बयान उसी दिन आया है, जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कन्नड़ झंडे को आधिकारिक मान्यता दिलाने की मांग को फिर से उठाया है. 

कई राज्यों में अलग ध्वज, खुद का ध्वज हो: अर्जुन

मंत्री ने आगे कहा कि हमें खुद का ध्वज बनाना चाहिए. कई राज्यों के पास अपने अलग-अलग ध्वज हैं. इस ध्वज में तमिलनाडु को प्राथमिकता दी जाएगी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को 18 जुलाई और 1 नवंबर को इस ध्वज को फहराना चाहिए. 18 जुलाई को तमिलनाडु दिवस बनाया जाता है. इसी दिन 1967 में मद्रास राज्य का नाम बदलने का विधानसभा में प्रस्ताव पारित हुआ था. साथ ही 1 नवंबर 1956 को भाषाई आधार पर राज्य की सीमाओं के पुनर्गठन का दिन है.  

‘ऐसे मुकाम पर जहां ध्वज बनाने की जरूरत’

उन्होंने कहा है कि हम आज ऐसे मुकाम पर हैं, जहां हमें एक ऐसा ध्वज बनाने की जरूरत है, जो राष्ट्रीय ध्वज के बराबर हो. इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2018 में संसद को बताया था कि संविधान में किसी अलग-अलग राज्य ध्वज का कोई उल्लेख नहीं है. राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर कोई दूसरा ध्वज नहीं लगाया जा सकता है. न ही एक ही खंभे पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ किसी अन्य ध्वज को एक साथ फहराया जा सकता है.  

बीजेपी ने खड़े किए सवाल

इधर, टीवीके नेता की इस मांग पर भाजपा ने सवाल खड़े किए हैं. बीजेपी नेता सेल्वम ने कहा है कि तमिल पहचान को साबित करने के लिए किसी अलग ध्वज की जरूरत नहीं है. 

उन्होंने कहा कि हमारी भाषा को आपके ध्वज का इंतजार नहीं था. हमारी सभ्यता को आपके प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है. भारतीय तिरंगे के नीचे हमारी तमिल पहचान छोटी नहीं हो जाती है. 

इसके अलावा सेल्वमन ने इस तरह की बयानबाजी को अलगावदी मानसिकता को बढ़ावा देने वाला बताया है. उन्होंने कहा है कि यह लोगों को सिखाती है कि वे अपनी तमिल और भारतीय पहचान को एक-दूसरे के विरोधी के रूप में देखें. जब हमें दोनों पर गर्व होना चाहिए तो फिर विभाजन क्यों पैदा किया जा रहा है? 



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