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दिवाली से पहले ही दिल्ली की हवा में जहर! कई इलाकों में AQI 300 के पार


दिवाली आने में अभी वक्त है, लेकिन दिल्ली की हवा अभी से लोगों का दम घोंटने लगी है. राजधानी के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर बेहद खराब से लेकर गंभीर श्रेणी में पहुंच चुका है. CPCB के 59 मॉनिटरिंग स्टेशनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 40 स्टेशनों पर AQI 300 के पार दर्ज किया गया है. इनमें 37 इलाके बेहद खराब और 3 इलाके गंभीर श्रेणी में हैं.

एक तरफ दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए विंटर एक्शन प्लान लागू है, पानी के छिड़काव और मैकेनिकल रोड स्वीपिंग के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ हमारी ग्राउंड रिपोर्ट में कई जगहों पर धूल उड़ती नजर आई. हमने दिल्ली के तीन प्रदूषित इलाकों का जायजा लिया और लोगों से पूछा कि क्या उन्हें जमीन पर विंटर एक्शन प्लान का असर दिखाई दे रहा है?

जहांगीरपुरी में AQI 433

जहांगीरपुरी में CPCB के आंकड़ों के मुताबिक AQI 433 दर्ज किया गया. यह गंभीर श्रेणी में आता है. यहां हवा की स्थिति कितनी खराब है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेट्रो स्टेशन के बाहर मास्क बेचने वाले दुकानदार के मुताबिक, इलाके में मास्क की बिक्री बढ़ी है.

दुकानदार का कहना है कि यहां नियमित रूप से पानी का छिड़काव नहीं होता. सवाल यह है कि जब प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंच चुका है, तो धूल को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार एजेंसियां जमीन पर क्या कर रही हैं?

वजीरपुर में 330 तक पहुंचा AQI

वहीं वजीरपुर में भी CPCB के मुताबिक AQI 330 दर्ज किया गया है. यानी हवा बेहद खराब श्रेणी में है. इलाके में सड़क पर धूल-मिट्टी उड़ती दिखाई दे रही है. विंटर एक्शन प्लान लागू होने के बावजूद स्थानीय लोगों को नियमित पानी के छिड़काव का लाभ मिलता नहीं दिख रहा. 

यहां रहने वाली एक महिला बताती हैं कि उनका इस रास्ते पर रोजाना आना-जाना होता है, लेकिन उन्होंने कभी नियमित रूप से पानी का छिड़काव होते नहीं देखा. वहीं स्कूली बच्चों का कहना है कि स्कूल में उन्हें मास्क पहनकर आने की सलाह दी गई है. बच्चे भी मानते हैं कि इस इलाके में पानी का छिड़काव नहीं होता. जब बच्चों को खुद प्रदूषण से बचने के लिए मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है, तो सवाल है कि उनके आसपास की हवा को साफ रखने के लिए प्रशासन क्या कर रहा है?

पूसा, करोल बाग रोड में AQI 371

इसके अलावा दिल्ली के पूसा रोड पर CPCB के IITM मॉनिटरिंग स्टेशन पर AQI 371 दर्ज किया गया. यह बेहद खराब श्रेणी में आता है. यहां भी प्रदूषण से राहत के लिए नियमित उपाय होते नहीं दिख रहे. स्थानीय लोगों के मुताबिक, पानी का छिड़काव कभी-कभार किया जाता है. दूसरी तरफ सड़क पर लगातार भारी ट्रैफिक और वाहनों की आवाजाही प्रदूषण को और बढ़ा रही है. यानी यहां भी लोगों को साफ हवा देने के दावों और जमीन पर दिखाई देने वाली स्थिति के बीच अंतर नजर आ रहा है.

विंटर एक्शन प्लान पर बड़ा सवाल

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए विंटर एक्शन प्लान लागू किया है. इसके तहत सड़क की धूल कम करने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर निगरानी और प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष कार्रवाई जैसे उपाय शामिल हैं. लेकिन हमारी ग्राउंड रिपोर्ट में जहांगीरपुरी, वजीरपुर और पूसा रोड पर लोगों ने नियमित पानी के छिड़काव को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दिया.

40 स्टेशन पर AQI 300 के पार

गौरतलब है कि CAQM ने भी अक्टूबर में दिल्ली की सड़कों पर धूल और निर्माण मलबे को लेकर कमियां पाई थीं और संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा था. CPCB के आंकड़े बता रहे हैं कि दिल्ली के 59 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 40 पर AQI 300 के पार है. तीन स्टेशन गंभीर श्रेणी में हैं. दिवाली से पहले ही जब राजधानी की हवा का यह हाल है, तो आने वाले दिनों में स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ जाती है.

कब मिलेगी साफ हवा?

सवाल सिर्फ प्रदूषण बढ़ने का नहीं है, सवाल यह भी है कि जब विंटर एक्शन प्लान लागू है, तो क्या उसके तहत किए जा रहे उपाय जमीन पर दिखाई दे रहे हैं? क्या पानी के छिड़काव और मैकेनिकल रोड स्वीपिंग की नियमित निगरानी हो रही है? और सबसे बड़ा सवाल, दिल्ली के लोगों को साफ हवा आखिर कब मिलेगी?

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