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उमर खालिद-शरजील इमाम ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, मांगी जमानत


 JNU के पूर्व छात्र उमर खालिद ने 2020 के दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. गौरतलब है कि पिछले साल खालिद की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी और उन पर यह प्रतिबंध लगा दिया गया था. उस वक्त कहा गया था कि वे तभी अदालत में पेश हो सकते हैं, जब अभियोजन पक्ष संरक्षित गवाहों से पूछताछ कर ले या फिर एक साल की अवधि पूरी हो जाए, जो भी पहले हो.

JNU के पूर्व छात्र उमर खालिद  का कहना है कि अभियोजन पक्ष संरक्षित गवाहों से पूछताछ करने में विफल रहा है और एक साल का प्रतिबंध जल्द ही समाप्त होने वाला है. ऐसे में उनकी लंबी कैद अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होगी. खालिद के अलावा दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश मामले के आरोपी शरजील इमाम ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी है. उन्होंने दिल्ली दंगों से जुड़े UAPA मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.उनका कहना है कि अभियोजन पक्ष ने अभी तक एक भी गवाह से पूछताछ नहीं की है.

दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने शरजील इमाम को पहले जमानत देने से इनकार कर दिया था. यह मामला 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ा है, जिसमें UAPA के तहत केस दर्ज किया गया था. शरजील इमाम का तर्क है कि उन्हें जमानत मिलनी चाहिए, क्योंकि अभियोजन पक्ष संरक्षित गवाहों से पूछताछ करने में विफल रहा है और सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई एक साल की रोक की अवधि भी अब खत्म होने वाली है.

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने 5 जनवरी को इमाम और जेएनयू के पूर्व छात्र खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने उन्हें इस बड़ी साजिश का वैचारिक संचालक बताया. हालांकि, कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा समेत 5 अन्य आरोपियों को जमानत दे दी, क्योंकि कथित साजिश में उनकी भूमिकाएं अलग-अलग थीं. इन दोनों ने अलग-अलग सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और 30 सितंबर, 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा तीसरी बार उनकी जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी है.



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