डकवर्थ लुईस स्टर्न, यही उस नियम का नाम है, जिससे भारत ने दूसरे वनडे मैच में न्यूजीलैंड को 4 रन से हरा दिया. शॉर्ट फॉर्म में इसे DLS भी कहा जाता है. न्यूजीलैंड की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 134 रन बनाए थे. जवाब में टीम इंडिया ने 113 रन बना लिए थे, लेकिन तभी बारिश आ गई. खेल दोबारा शुरू नहीं हो सका, जिसके बाद भारत को DLS पद्धति से 4 रन से विजेता बनाया गया. मगर यह डीएलएस नियम आखिर होता क्या है?
कैसे हुई DLS नियम की रचना?
दो अंग्रेज सांख्यिकीविदों, फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस ने इस नियम की रचना की थी. पहले इसे केवल डकवर्थ लुईस के नाम से जाना जाता था. बाद में स्टीवन स्टर्न ने इसकी बेहतरी में अपना योगदान दिया, जिसके बाद इसका नाम DLS पड़ा.
कैसे काम करता है DLS?
DLS नियम कई पहलुओं को ध्यान में रखकर लागू किया जाता है. इसमें किसी टीम के बचे हुए ओवर और विकेटों की संख्या के आधार पर रिवाइज्ड टारगेट सेट किया जाता है. आसान भाषा में समझें तो यह ध्यान रखा जाता है कि किसी टीम ने अपनी पारी में कितने प्रतिशत संसाधन का इस्तेमाल किया है.
उदाहरण के तौर पर पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ने पूरे 50 ओवर खेलकर 250 रन बनाए. इस तरह उसने अपने पूरे संसाधनों यानी पूरा जोर लगाने के बाद 250 रन का स्कोर खड़ा किया. दूसरी टीम बारिश आने तक 30 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 150 रन बना चुकी थी.
अब मान लीजिए बारिश की वजह से समय खराब हो गया, जिसके कारण दूसरी टीम के ओवरों की संख्या घटाकर 40 कर दी गई. जाहिर है पहली टीम की तुलना में दूसरी टीम के पास कम संसाधन बचे हैं. इसलिए अब नया टारगेट इस आधार पर तय किया जाएगा कि दूसरी टीम के पास कितने प्रतिशत संसाधन बचे हैं.
DLS का फॉर्मूला
टीम B का टारगेट = टीम A का स्कोर x टीम B द्वारा उपयोग किए गए रिसोर्स/टीम A के रिसोर्स
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