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वांगचुक ने लद्दाख के LG वीके सक्सेना पर लगाया आरोप, स्टिंग ऑपरेशन को लेकर किया बड़ा दावा


पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उन्होंने लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) के प्रशासन के खिलाफ एक ‘स्टिंग ऑपरेशन’ का दावा किया है. वांगचुक ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना पर एक ‘कार्टेल’ (व्यापारिक गुट) चलाने और माफिया के साथ कॉरपोरेट मित्रों के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है. उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इस मामले में हस्तक्षेप और कार्रवाई करने की मांग की है.

वांगचुक का दावा है कि उनकी कानूनी टीम की तरफ से उपलब्ध कराए गए ऑडियो और वीडियो क्लिप्स से पता चलता है कि प्रशासन उनके संस्थानों को बदनाम करने और उन्हें परेशान करने के एक सुनियोजित अभियान में शामिल है.

उपराज्यपाल को लेकर वीडियो पोस्ट में बोले वांगचुक

सोनम वांगचुक ने X प्लेटफॉर्म पर साझा किए एक वीडियो पोस्ट में कहा, ‘देश के युवाओं, लद्दाख और अरुणाचल जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों की भलाई के लिए आवाज उठाने के कारण मुझे लगातार निशाना बनाया जा रहा है और बदनाम किया जा रहा है. लद्दाख में उपराज्यपाल प्रशासन की तरफ से हमारे स्कूलों को हर संभव तरीके से परेशान किया जा रहा है, लेकिन हमारे वकीलों की ओर से किए गए इस स्टिंग ऑपरेशन से साबित होता है कि उपराज्यपाल प्रशासन सीधे तौर पर अवैध रूप से बदनाम करने वाले अभियानों (और अन्य गलत गतिविधियों) में शामिल है.’

यह आलोचना तब और तेज हो गई जब एक नई स्थानीय आबकारी नीति (Excise Policy) लागू की गई. वांगचुक ने प्रशासन पर बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियों को लाने का आरोप लगाया, जिसमें सैकड़ों शराब के लाइसेंस देना भी शामिल है. उनका दावा है कि ऐसा बाहरी व्यावसायिक कार्टेल को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है.

वांगचुक ने उपराज्यपाल पर क्या लगाया आरोप?

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन स्थानीय लोगों की चिंताओं को दरकिनार करते हुए दिल्ली के प्रभावशाली लोगों या बाहरी व्यावसायिक समूहों के इशारे पर काम कर रहा है. यह विवाद तब और गहरा गया जब हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) को हाल ही में नोटिस भेजे गए और इसके नए खुले डेजर्ट फ्लावर स्कूल के कामकाज को रोक दिया गया.

सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने सार्वजनिक रूप से केंद्र शासित प्रदेश (UT) प्रशासन पर उन्हें निशाना बनाने (witch-hunt) का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि प्रशासन जानबूझकर डेजर्ट फ्लावर स्कूल के लिए जरूरी प्रशासनिक मंजूरियों में देरी कर रहा है और जमीन के पट्टे (Land Lease) से जुड़े एक लंबित विवाद का बहाना बनाकर असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है.

प्रशासन की नीतियों वांगचुक ने की थी आलोचना

अपने हालिया बयान में, वांगचुक ने कहा कि उन्होंने सबसे पहले स्टिंग ऑपरेशन की सामग्री को इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के प्रमुख के साथ निजी तौर पर साझा किया था, ताकि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें. जब वहां से कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने इसके कुछ हिस्से सार्वजनिक कर दिए. उनका मकसद यह उजागर करना था कि रणनीतिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में किस तरह की मनमानी और नुकसानदेह शासन व्यवस्था चल रही है.

वांगचुक का मानना है कि प्रशासन का यह सख्त रवैया इसलिए है, क्योंकि उन्होंने हाल ही में स्थानीय नीतियों की खुलकर आलोचना की थी. इन नीतियों में शराब के लाइसेंस से जुड़े नियम, पर्यटन प्रबंधन और सिंधु नदी पर रॉक डैम (पत्थर के बांध) जैसी पर्यावरण परियोजनाएं शामिल हैं.

लद्दाख प्रशासन ने निशाना बनाने के आरोपों को किया खारिज

हालांकि, लद्दाख प्रशासन ने स्टिंग ऑपरेशन के इन नए हिस्सों पर तुरंत कोई सीधा खंडन जारी नहीं किया है, लेकिन उसने अपनी कार्रवाई में किसी भी तरह की उत्पीड़न या जानबूझकर निशाना बनाने (witch-hunting) की बात को हमेशा खारिज किया है.

सूचना और जनसंपर्क निदेशालय (DIPR) की ओर से दी गई आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार, HIAL और उससे जुड़ी संस्थाओं की जांच पूरी तरह से ठोस जानकारियों पर आधारित है. इन जानकारियों में वित्तीय अनियमितताओं, बिना अनुमति के डिग्रियां जारी करने और विदेशी मुद्रा/FCRA नियमों के कथित उल्लंघन के मामले शामिल हैं. प्रशासन का कहना है कि कानून के तहत की गई सभी कार्रवाइयां निष्पक्ष हैं, सबूतों पर आधारित हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी हैं. 

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