IPL 2026 में खिलाड़ियों के चोटिल होने का सिलसिला लगातार जारी है. इसी बीच चेन्नई सुपर किंग्स भी बहुत बड़ी मुश्किल में फंस गई है. टीम के ओपनिंग बल्लेबाज आयुष म्हात्रे चोट के कारण पूरे सीजन से बाहर हो गए हैं. म्हात्रे का चोटिल होना CSK के लिए बहुत बड़ा झटका है क्योंकि म्हात्रे 6 मैचों में 201 रन बना चुके थे. इसी बीच चर्चा शुरू हो गई है कि चेन्नई टीम को RCB से एक खिलाड़ी लोन के तौर पर ले लेना चाहिए.
दरअसल यह सलाह पूर्व क्रिकेटर रविचंद्रन आश्विन की है. उन्होंने कहा था कि IPL 2026 में लोन विंडो 7वें मैच पर खत्म हो रही है, उससे पहले बढ़िया होगा कि चेन्नई विकेटकीपर बल्लेबाज अभिज्ञान कुंडू को RCB से लोन पर ले ले. मगर यह लोन की प्रक्रिया क्या होती है और क्या क्रिकेट में कोई खिलाड़ी लोन के तौर पर एक से दूसरी टीम में जा भी सकता है या नहीं. यहां समझ लीजिए क्या है पूरा नियम.
क्या है IPL में लोन लेने का नियम?
दरअसल इस लोन प्रणाली की शुरुआत 2018 में केवल अनकैप्ड खिलाड़ियों के लिए की गई थी. जिन खिलाड़ियों को पूरे सीजन मौका नहीं मिल पाता, वे बीच सीजन में किसी दूसरी टीम के लिए जाकर खेल सकते थे. 2019 में यह नियम कैप्ड खिलाड़ियों पर भी लागू कर दिया गया.
लोन के तौर पर आने वाला खिलाड़ी केवल एक सीजन के लिए दूसरी टीम में जा सकता है. अश्विन की सलाह अनुसार यदि अभिज्ञान कुंडू RCB से चेन्नई सुपर किंग्स में जाते हैं तो वे IPL 2026 के अंतिम मुकाबले तक ही चेन्नई का हिस्सा रहेंगे और आईपीएल 2027 में दोबारा बेंगलुरू टीम से जुड़ जाएंगे.
लोन सिस्टम से जुड़ी शर्तें
यह लोन सिस्टम तभी लागू हो पाता जब इसकी शर्तों का पूरी तरह पालन किया जाए. पहला ये कि ऑक्शन में खिलाड़ी को खरीदने वाली टीम, प्लेयर को लोन पर लेने वाली टीम और खुद खिलाड़ी, यानी तीनों पार्टियों के बीच एग्रीमेंट पर सहमति बननी चाहिए.
एक और शर्त यह है कि खिलाड़ी की जो असली टीम है. मतलब अभिज्ञान कुंडू को RCB के लिए सिर्फ 2 या उससे कम ही मैचों का अनुभव होना चाहिए, तभी वो CSK में जा सकते हैं.
अभिज्ञान कुंडू का ही उदाहरण लेकर चलें तो जब IPL 2026 में बेंगलुरू और चेन्नई का मैच होगा, उसमें अभिज्ञान नहीं खेल पाएंगे.
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