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होम लोन टेन्योर चुनते वक्त न करें ये गलती, कुछ सालों का फर्क भी करा सकता है बड़ा नुकसान


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  • होम लोन टेन्योर ब्याज लागत पर बड़ा प्रभाव डालता है।
  • लंबी अवधि (25 साल) चुनने पर कुल ब्याज अधिक होगा।
  • छोटी अवधि (10 साल) से कुल ब्याज लागत काफी कम हो जाती है।
  • विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शुरुआत में लंबा टेन्योर चुनें, बाद में प्रीपेमेंट करें।

Home Loan Tenure Tips: अपना खुद का घर खरीदना आज भी कई लोगों को सपना होता हैं. बढ़ती कीमतों की वजह से अपने इस सपने को पूरा करने के लिए लोग बैंक से होम लोन लेते हैं. हालांकि, होम लोन लेते समय एक बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. वह है सही अवधि यानी टेन्योर चुनना. 

अक्सर लोग इस बात को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं कि EMI कम रखें या लोन जल्दी खत्म करने की कोशिश करें. असल में आपका यह फैसला ब्याज के पैसों में बहुत फर्क डाल सकता हैं. इसलिए सही बैलेंस बनाकर टेन्योर चुनना ही समझदारी मानी जाती है. आइए जानते हैं, इस बारे में.

टेन्योर का पड़ता है बड़ा फर्क

  • अगर कोई व्यक्ति 2 करोड़ रुपये का होम लोन करीब 8.5 प्रतिशत की ब्याज दर पर लेते हैं. साथ ही इस लोन का टेन्योर 20 साल के लिए तय किया जाता है तो, ब्याज करीब 2.15 करोड़ रुपये बनता है. कुल भुगतान का आंकड़ा लगभग 4.15 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है.
  • इसी लोन को 25 साल के लिए लेने पर ब्याज की रकम बढ़कर करीब 2.86 करोड़ रुपये हो जाती है. कुल भुगतान लगभग 4.86 करोड़ रुपये तक पहुंचता है. यानी कि सिर्फ 5 साल के अंतर में ब्याज में बड़ा फर्क साफ देखने को मिलता है. 

छोटे टेन्योर में मिलता है फायदा

  • अगर सेम लोन 10 साल के लिए लिया जाए, तो कुल ब्याज घटकर करीब 98 लाख रुपये रह जाता है. कुल भुगतान का आंकड़ा भी गिरकर करीब 2.98 करोड़ रुपये होता है.
  • यानी सिर्फ टेन्योर बदलने से ब्याज में बड़ा फर्क आ जाता है. लंबी अवधि में आपको काफी ज्यादा पैसा चुकाना पड़ता है.
  • 10 साल और 25 साल के टेन्योर के बीच सिर्फ ब्याज का अंतर ही करीब 1.9 करोड़ रुपये है. जो साफ दिखाता है कि लंबा लोन आरामदायक तो लगता है पर इसमें ब्याज की राशि बहुत ज्यादा होती है. 

एक्सपर्ट्स की राय

न्यूज 18 में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स अक्सर यह सुझाव देते हैं कि होम लोन लेते समय शुरुआत में लंबा टेन्योर जैसे 20 से 25 साल चुनना बेहतर रहता है. जिससे EMI का बोझ ज्यादा भारी नहीं लगता है. हालांकि, आने वाले समय में जब आपकी इनकम बढ़ने लगे, तो आप समय-समय पर प्रीपेमेंट करके लोन की अवधि कम कर सकते हैं. अगर आपके पास कुछ अतिरिक्त पैसा आता हैं तो उसे भी लोन भरने में इस्तेमाल कर सकते हैं. जिससे कुल ब्याज पर आपकी राहत मिलेगी. 

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