- आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने भाजपा में शामिल होने की घोषणा की।
- पंजाब के 6 सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा।
- बलबीर सिंह सीचेवाल एकमात्र AAP सांसद जिन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी।
- विक्रम साहनी ने सीचेवाल को स्वतंत्र समूह में शामिल होने को कहा था।
आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 राज्यसभा सांसदों ने दो दिन पहले शुक्रवार (24 अप्रैल, 2026) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय करने की घोषणा की थी, जिसमें राघव चड्ढा, स्वाती मालिवाल, हरभजन सिंह समेत अन्य शामिल थे. इस कुल सात राज्यसभा सांसदों में से 6 सांसद अकेले पंजाब से थे, जहां इस वक्त मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार है. हालांकि, AAP के खाते में पंजाब से कुल 7 राज्यसभा सांसद थे, जिसमें से 6 सांसदों ने पार्टी के इस्तीफा देकर बीजेपी का साथ जुड़ गए.
इस बीच आप के जिस इकलौते सांसद ने पार्टी से किनारा नहीं किया, उनका नाम बलबीर सिंह सीचेवाल है. जालंधर जिल के पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरणविद् और आध्यात्मिक नेता सीचेवाल ने रविवार (26 अप्रैल, 2026) को यह जानकारी साझा की कि उन्होंने पहले क्या जानकारी थी और उन्होंने मना क्यों किया?
साहनी ने फोन पर बताया था कई लोग साइन कर चुके हैं- सीचेवाल
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के पंजाब से राज्यसभा के इकलौते बचे सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें पहले ही संपर्क किया गया था. उन्होंने कहा, ‘विक्रम साहनी का फोन आया था. उन्होंने कहा कि वह एक स्वतंत्र समूह बना रहे हैं और कई लोग इसमें शामिल हो चुके हैं. उन्होंने मुझे भी साइन करने के लिए कहा, लेकिन मैंने उन्हें मना कर दिया. मुझे इसमें कोई रुचि नहीं थी.’
उन्होंने यह भी कहा कि साहनी ने कहा था कि जिन लोगों ने साइन किया है, उनमें यूनिवर्सिटी वाले भी शामिल हैं. उनका इशारा अशोक कुमार मित्तल की तरफ था, जो लवली प्रोफेसनल यूनिवर्सिटी (LPU) के फाउंडर हैं. वे शुक्रवार (24 अप्रैल, 2026) को हुए ऐलान के दौरान समूह नेता राघव चड्ढा और संदीप पाठक के साथ मौजूद थे.
चाय का निमंत्रण पहले कभी नहीं दिया- सीचेवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, चाय पर चर्चा की खबरों के बीच, सीचेवाल ने 16 से 18 अप्रैल के संसद सत्र के दौरान हुई एक पुरानी बातचीत को याद किया. उन्होंने कहा, ‘राघव चड्ढा ने कहा कि बाबा जी, आइए हम आपको चाय पिलाते हैं, बैठते हैं.’ इस पर मैंने जवाब देते हुए कहा, ‘आप लोग ही पी लीजिए. हालांकि, यह पहली बार था, जब उन्होंने मुझे चाय के लिए बुलाया था. इससे पहले कभी नहीं.’ जब उनसे पूछा गया कि क्या कभी दलबदल को लेकर कोई चर्चा हुई थी, तो उन्होंने साफ कहा कि नहीं, किसी ने नहीं की. अगर कोई ऐसा कहता है, तो वह झूठ बोल रहा है.’
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