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Malihabad News: मलीहाबाद में मल्ली पासी गेट हटने पर बवाल, अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे BJP नेता


उत्तर प्रदेश की सियासत में मलीहाबाद के ‘मल्ली पासी गेट’ को लेकर एक नया और बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस विवाद में विपक्ष से ज्यादा सत्ता पक्ष (बीजेपी) के ही नेता अपनी सरकार और प्रशासन के खिलाफ मुखर हो गए हैं. मलीहाबाद में मल्ली पासी के नाम पर लगाए गए गेट को रातों-रात हटाए जाने के विरोध में पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर और स्थानीय विधायक जय देवी समेत कई जनप्रतिनिधि पिछले कई दिनों से ‘प्रवास धरने’ पर बैठे हैं.

क्यों भड़का है आक्रोश?

स्थानीय विधायक जय देवी के अनुसार, क्षेत्र में विधायक निधि से कुल 12 गेट लगाए जाने थे. सभी गेट लग चुके थे, लेकिन प्रशासन ने अचानक सिर्फ इसी गेट को निशाना बनाया. पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने बताया कि 21-22 तारीख की रात करीब 1 बजे के बाद इस गेट को काटकर हटा दिया गया. हालांकि बाद में गेट बरामद हो गया, लेकिन नेताओं का सवाल यह है कि आखिर किसके आदेश और दबाव में यह कार्रवाई की गई?

नेताओं का तर्क है कि जब गेट विधायक निधि से एक तय प्रक्रिया और स्वीकृतियों के बाद बना था, तो उसे सीधे हटाना (बुलडोज़र कार्रवाई) पूरी तरह गलत है. यदि कोई तकनीकी खामी थी, तो उसे सुधारा जा सकता था.

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धरने पर डटे हैं ये प्रमुख चेहरे

इस ‘प्रवास धरने’ में बीजेपी के कई दिग्गज नेता शामिल हैं, जो प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं:

  • जय देवी (विधायक, मलिहाबाद)
  • कौशल किशोर (पूर्व केंद्रीय मंत्री)
  • अशोक रावत (सांसद, मिश्रिख)
  • बृजेश रावत (विधायक, मोहान)
  • अमरेश पुष्कर (विधायक, मोहनलालगंज)

इन सभी की एक ही मांग है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और सम्मान के प्रतीक इस गेट को तुरंत उसी जगह पर दोबारा स्थापित किया जाए.

विपक्ष का तंज और 2027 के चुनाव का ‘अलार्म’

इस मुद्दे ने पासी समाज के आत्मसम्मान का रूप ले लिया है. समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस मौके को लपकते हुए सरकार पर निशाना साधा है. सपा प्रवक्ता दीपक रंजन ने इसे समाज के सम्मान पर चोट बताते हुए कहा कि सीधे बुलडोज़र चलाकर गेट हटाना तानाशाही है.

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह मुद्दा बीजेपी के लिए 2027 के विधानसभा चुनावों में खतरे की घंटी बन सकता है. 2024 के लोकसभा चुनाव में पासी समाज (जो करीब 2-3% वोट बैंक के साथ कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है) का एक बड़ा हिस्सा सपा की ओर खिसक गया था. वरिष्ठ पत्रकार योगेश शुक्ला भी मानते हैं कि समाज अपने सम्मान की अनदेखी महसूस कर रहा है. धरने में शामिल लोगों की यह चेतावनी कि “सम्मान वापस नहीं मिला तो 2027 में जवाब देंगे,” इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पारंपरिक वोट बैंक में भारी नाराजगी पनप रही है.

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