- BJP नेताओं ने विपक्ष के विरोध को महिलाओं का अपमान बताया.
दिल्ली की सियासत में महिला आरक्षण बिल को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ता दिखाई दिया, जब कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में महिला मोर्चा की ओर से मशाल जुलूस आयोजित किया गया. प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे और कार्यक्रम का केंद्र महिला आरक्षण कानून, विपक्ष की भूमिका और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा रहा.
इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी चर्चा रही हाल ही में बीजेपी से जुड़ीं स्वाति मालीवाल की मौजूदगी थी. आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ने के बाद पहली बार वह किसी सार्वजनिक राजनीतिक मंच पर नजर आईं. मंच से बोलते हुए उन्होंने महिला आरक्षण कानून को लेकर विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए और अपने राजनीतिक अनुभव साझा किए. उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन संसद में महिलाओं की भागीदारी अब भी सीमित है.
क्या कहा स्वाति मालीवाल ने?
स्वाति मालीवाल के मुताबिक संसद में महिला प्रतिनिधित्व केवल14.4 प्रतिशत है. वहीं, इस मामले में बांग्लादेश और नेपाल जैसे देश भी आगे हैं. उन्होंने दावा किया कि महिला आरक्षण कानून को पिछले 30 वर्षों में कई बार लाने की कोशिश हुई, लेकिन हर बार राजनीतिक विरोध के कारण यह आगे नहीं बढ़ पाया. उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह AAP में थीं, तब उन्हें महिला आरक्षण बिल का समर्थन न करने के निर्देश मिले थे.
मंच से उन्होंने कहा, “मैं दो दिन पहले तक AAP में थी. मुझे कहा गया कि महिला बिल का समर्थन मत करना. मैं दो साल से संसद जा रही हूं, लेकिन मुझे बोलने का मौका तक नहीं दिया गया. जब निर्देश मिला कि महिला आरक्षण बिल को गिराना है, उसी दिन मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया.” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं को राजनीतिक अधिकार दिलाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है और यह बिल पास होकर रहेगा.
रेखा गुप्ता भी हुईं शामिल
प्रदर्शन में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी शामिल हुईं थी. उन्होंने महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष पर हमला बोला और कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी महिलाएं राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल सात बार लोकसभा में लाया गया, लेकिन कभी विरोध, कभी हंगामे और कभी राजनीतिक कारणों से इसे आगे नहीं बढ़ने दिया गया. उन्होंने विपक्षी दलों पर महिलाओं के अधिकारों को लेकर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाया.
‘विपक्ष का विरोध महिलाओं के सम्मान के खिलाफ’
दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष का विरोध महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है. उनके मुताबिक, सरकार ने स्पष्ट किया है कि परिसीमन के बाद सीटों की संख्या घटेगी नहीं, बल्कि बढ़ेगी इसलिए किसी वर्ग को नुकसान होने की आशंका नहीं है. दिल्ली से बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने ABP News से बातचीत में कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम सर्वसम्मति से पारित हुआ था और सभी दलों ने इसे समर्थन दिया था. उन्होंने कहा कि जनगणना और परिसीमन के बाद आरक्षण लागू करने पर सहमति बनी थी, लेकिन अब विपक्ष अपने ही वादे से पीछे हटता दिख रहा है.
स्वराज ने आगे कहा कि इस कानून में SC और ST महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान पहले से मौजूद है, जबकि OBC आरक्षण को लेकर अलग संवैधानिक व्यवस्था की जरूरत होगी. उनके अनुसार विपक्ष कभी मुस्लिम महिलाओं का तो कभी OBC महिलाओं का मुद्दा उठाकर मूल विषय से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है. कनॉट प्लेस में हुए इस प्रदर्शन में बीजेपी महिला मोर्चा की बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता शामिल रहीं. मशाल जुलूस के दौरान कार्यकर्ताओं ने महिला आरक्षण बिल के समर्थन में नारे लगाए और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की मांग को लेकर एकजुटता दिखाई. प्रदर्शन स्थल पर पार्टी नेताओं और समर्थकों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से अहम बना दिया.
Women Reservation Bill: पहली बार कब लाया गया था महिला आरक्षण बिल, तब से अब तक कितनी बार हुआ खारिज?
