Headlines

उत्तराखंड: मसूरी-देहरादून वैलीब्रिज पर उठे सवाल, क्या भारी वाहनों का बोझ झेल पाएगा यह पुल?


मसूरी और देहरादून को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर शिव मंदिर के पास बना नया वैलीब्रिज इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है. स्थानीय लोगों से लेकर पूर्व जनप्रतिनिधियों तक सभी की नजर इस पुल की संरचना पर टिकी है और चिंता एक ही है कि कहीं यह पुल किसी बड़े हादसे की वजह न बन जाए.

यह 40 मीटर स्पान का वैलीब्रिज मसूरी-देहरादून मार्ग पर पहले से मौजूद एक वैलीब्रिज से टाई करके बनाया गया है. देखने में यह काम भले ही पूरा लग रहा हो, लेकिन पुल के मध्य भाग की संरचना तकनीकी दृष्टि से कई सवाल खड़े करती है.

दरअसल, पुल के बीच नाले के ऊपर लोहे के गार्डर से सपोर्ट दिया गया है. यह सपोर्ट नाले की सतह से काफी अधिक ऊंचाई पर है और सबसे बड़ी बात इन गार्डरों के नीचे कोई ठोस फाउंडेशन नहीं बनाई गई है. इसके अलावा जो गार्डर लगाए गए हैं, वे पुल की चौड़ाई और भार के अनुपात में काफी पतले नजर आते हैं. इंजीनियरिंग की बुनियादी समझ रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस ढांचे को देखकर असहज हो जाएगा. बिना फाउंडेशन के खड़े पतले गार्डर, ऊंचाई पर लटकता मध्य भाग और उस पर से गुजरते भारी वाहन, यह संयोजन किसी भी दिन त्रासदी में बदल सकता है.

Meerut News: शादाब जकाती के शोरूम उद्घाटन पर विवाद, बिना परमिशन किया था इवेंट, पुलिस ने की कार्रवाई

स्थानीय लोगों की चेतावनी

मसूरी के पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल ने इस मुद्दे पर सीधे और स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर गलती से भी एक साथ दो बसें या ट्रक पुल पर आ गए, तो बड़ी दुर्घटना को कोई नहीं रोक सकता. मसूरी जैसे पर्यटन नगर में इस मार्ग पर हर रोज भारी संख्या में बसें, ट्रक और निजी वाहन गुजरते हैं. पर्यटन सीजन में तो यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है, ऐसे में पुल की क्षमता को लेकर उठ रहे सवाल महज अंदेशा नहीं, बल्कि एक वास्तविक खतरे की आहट हैं.

PWD का जवाब- जिम्मेदारी का ‘पासिंग द बक’

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि पुल के बीच में लगाई गई लोहे की गार्डर सपोर्ट निर्माण के शुरुआती चरण से ही लगाई गई थी यानी यह कोई बाद की जोड़-तोड़ नहीं है. उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन को पहले ही सूचित कर दिया गया है कि इस पुल पर एक समय में केवल एक ही भारी वाहन गुजर सकता है. यह व्यवस्था लागू करना प्रशासन की जिम्मेदारी है. लेकिन यहीं से असली सवाल शुरू होता है जब विभाग खुद मान रहा है कि पुल एक साथ दो भारी वाहनों का भार नहीं झेल सकता, तो फिर उसे आम यातायात के लिए खोला क्यों गया? और क्या सिर्फ प्रशासन को सूचित कर देना ही विभाग की जिम्मेदारी है?

बड़ा सवाल- निगरानी कौन करेगा?

व्यस्त पहाड़ी मार्ग पर हर वाहन को रोककर यह जांचना कि पुल पर पहले से कोई भारी वाहन है या नहीं यह व्यावहारिक रूप से कितना संभव है, यह किसी से छिपा नहीं है. बिना ट्रैफिक सिग्नल, बिना स्थायी बैरियर और बिना किसी तकनीकी निगरानी के महज मौखिक निर्देश से इस पुल की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती. स्थानीय निवासियों की मांग है कि इस पुल का तत्काल तकनीकी और संरचनात्मक ऑडिट कराया जाए. पुल पर भार सीमा की पट्टिका लगाई जाए और जब तक पूरी सुरक्षा सुनिश्चित न हो, भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई जाए.

Dehradun News: नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर CM धामी की बड़ी चाल, कांग्रेस को वॉकआउट तक नहीं करने का दिया मौका



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *