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गंगा एक्सप्रेसवे: 12 जिलों में 46660 करोड़ के निवेश की तैयारी, बिछेगा उद्योगों का जाल, आज होगा उद्घाटन


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  • परियोजना का उद्देश्य सड़क को औद्योगिक विकास से जोड़ना है।

Ganga Expressway Inauguration: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे को देश को समर्पित करेंगे. इस परियोजना को उत्तर प्रदेश सरकार एक्सप्रेसवे सह इंडस्ट्रियल कॉरिडोर मॉडल के रूप में विकसित कर रही है. इसका मकसद सड़क ढांचे को औद्योगिक विकास से जोड़ना है. गंगा एक्सप्रेसवे को इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉडिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) के रूप में तैयार किया गया है, जिससे यह सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि एक औद्योगिक विकास का गालियारा बन रहा है.

अगर बार करें इस एक्सप्रेसवे की तो यह कुल 594 किलोमीटर लंबा है और इसके किनारे 12 औद्योगिक नोड्स विकसित किए जा रहे हैं. इसके लिए करीब 6507 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है. हर नोड को उसकी लोकेशन और औद्योगिक संभावना के मुताबिक तैयार किया गया है, ताकि यहां मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी गतिविधियां बढ़ सकें.

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इस योजना के तहत अब तक करीब 987 इन्वेस्ट प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. इनसे लगभग 46,660 करोड़ के इन्वेस्टमेंट की संभावना जताई जा रही है. यह इन्वेस्टमेंट मुख्य रूप से  मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर में आने की उम्मीद है.

गंगा एक्सप्रेसवे पर प्रस्तावित नोड्स का विस्तृत विवरण

  • मेरठ : 10 किमी पर, 529 एकड़
  • हापुड़ : 54 किमी पर, 304 एकड़
  • बुलंदशहर : 2,798 एकड़ (सबसे बड़ा क्लस्टर)
  • अमरोहा : 74 किमी पर, 348 एकड़
  • संभल : 100 किमी पर, 591 एकड़
  • बदायूं : 189 किमी पर, 269 एकड़
  • शाहजहांपुर : 255 किमी पर, 252 एकड़
  • हरदोई : 282 किमी पर, 335 एकड़
  • उन्नाव : 422 किमी पर, 333 एकड़
  • रायबरेली : 517 किमी पर, 232 एकड़
  • प्रतापगढ़ : 555 किमी पर, 263 एकड़
  • प्रयागराज : 601 किमी पर, 251 एकड़

12 जिलों में संतुलित विकास, हरदोई बनेगा प्रमुख केंद्र 

यह कॉरिडोर 12 जिलों को सीधे जोड़ेगा, जिससे क्षेत्रीय असमानता कम होगी. खासतौर पर हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में बड़ा इजाफा होगा.

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योगी सरकार का फोकस अब केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे औद्योगिक विकास से जोड़कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देना है. गंगा एक्सप्रेसवे के साथ विकसित हो रहा आईएमएलसी मॉडल इस विजन का प्रमुख हिस्सा है, जो उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में मजबूत कदम है.



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