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लद्दाख के नए जिलों से नाखुश असदुद्दीन ओवैसी? बोले- ‘मुसलमानों के एकजुट…’


लद्दाख में 5 नए जिलों के गठन को लेकर जनता में खुशी है. दूसरी ओर कुछ मुस्लिम नेता अब इसके विरोध में भी आने लगे हैं. ऑल इंडिया इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने फैसले को सांप्रदायिक रंग देते हुए और इसे चुनावी अधिकारों से वंचित करने की लड़ाई बताते हुए कहा है कि नए जिले लद्दाख के लोगों की एकता को तोड़ने के लिए बनाए गए हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि नए जिले इसलिए बनाए गए हैं ताकि कम आबादी वाले बौद्धों को, केंद्र शासित प्रदेश में ज्यादा आबादी वाले मुसलमानों की तुलना में ज्यादा जिले मिल सकें.

‘मुसलमानों के एकजुट राज्य दर्जे के आंदोलन को बांटना चाहते हैं’

असदुद्दीन ओवैसी ने X पर लिखा, “सरकार ने लद्दाख में 5 नए जिले बनाए हैं. अब 2 के बजाय 7 जिले हो गए हैं. सरकार बौद्धों और मुसलमानों के एकजुट राज्य दर्जे के आंदोलन को बांटना चाहती है. यह जम्मू-कश्मीर के पूर्ववर्ती राज्य में एक और चुनावी हेरफेर है.”

2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए ओवैसी ने आगे दावा किया कि 39% आबादी वाले बौद्धों के पास पांच बहुमत वाले ज़िले होंगे, जबकि 46% आबादी वाले मुसलमानों के पास केवल दो ज़िले होंगे.

“2011 की जनगणना के अनुसार, लद्दाख की कुल 274,289 आबादी में से 46.40% मुसलमान और 39.65% बौद्ध हैं. 7 ज़िलों में से 5 बौद्ध-बहुमत वाले हैं, और केवल 2 मुस्लिम-बहुमत वाले हैं. मूल रूप से, 39.65% आबादी के लिए 5 ज़िले और 46.40% आबादी के लिए केवल 2 ज़िले.”

आंकड़ों के अनुसार नए ज़िलों के गठन से पहले, इस क्षेत्र की आबादी मोटे तौर पर लेह और कारगिल ज़िलों के बीच लगभग बराबर बँटी हुई थी; 2011 की जनगणना के अनुसार, कारगिल की 140,802 की कुल आबादी में से 76.87% मुसलमान थे, जबकि लेह की 133,487 की कुल आबादी में से 66.40% बौद्ध थे.

जनसांख्यिकीय बनावट के अनुसार, पाँच ज़िलों—लेह, चांगथांग, ज़ांस्कर, शाम और नुब्रा—में बौद्ध धर्म अब बहुमत वाला धर्म होगा. और कारगिल तथा द्रास ज़िलों में इस्लाम बहुसंख्यक धर्म होगा, जिसका ज़िक्र AIMIM प्रमुख ने अपने ट्वीट में किया है.

लद्दाख के उपराज्यपाल VK Saxena ने सोमवार (27 अप्रैल) को केंद्र शासित प्रदेश में पाँच नए ज़िले बनाने की अधिसूचना को मंज़ूरी दे दी. इसके तहत, मौजूदा दो ज़िलों—लेह और कारगिल—में नुब्रा, शाम, चांगथांग, ज़ांस्कर और द्रास को जोड़ा गया है. 

LG सक्सेना ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि यह फ़ैसला “लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं और लंबे समय से चली आ रही माँग” को पूरा करने के लिए लिया गया था. यह फ़ैसला, जिसे अगस्त 2024 में गृह मंत्रालय ने मंज़ूरी दी थी, “विकसित और समृद्ध लद्दाख” के विज़न के अनुरूप था.

हालाँकि 2011 के बाद देश में कोई जनगणना नहीं हुई है, लेकिन जनसांख्यिकीय अनुमानों और 2011 की जनगणना के आँकड़ों के आधार पर, 2025 में लद्दाख की अनुमानित कुल आबादी लगभग 304,000 के करीब होगी.

2024 तक भारत में एक ज़िले की औसत आबादी लगभग 17 से 18 लाख है, लेकिन लद्दाख में अब औसत ज़िला आबादी लगभग 40 हज़ार है लेकिन ज़मीनी हक़ीक़र् इस के बिल्कुल उलट है –  2011 की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार, लद्दाख के नए बनाए गए ज़िलों की आबादी बहुत कम है. 

जहाँ नुब्रा की आबादी 22,000, चांगथांग की 13,000, द्रास की 22,000 और ज़ांस्कर की 14,000 है, वहीं ये भारत के सबसे कम आबादी वाले ज़िलों में से कुछ होंगे; जबकि शाम के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है –

लद्दाख का प्रशासनिक इतिहास काफ़ी उतार-चढ़ाव भरा रहा है; 1947 से 1979 तक, लद्दाख क्षेत्र में केवल एक ही ज़िला था, जिसका मुख्यालय लेह में था.

कारगिल के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए, तत्कालीन शेख अब्दुल्ला सरकार ने लद्दाख को लेह और कारगिल ज़िलों में बाँट दिया. इसके साथ ही, ज़ांस्कर को कारगिल के भीतर एक विशेष उप-मंडल का दर्जा दिया गया, क्योंकि हर सर्दियों में पाँच से छह महीने तक यह लद्दाख के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट जाता था.

1980 के दशक में, केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) का दर्जा पाने के लिए संघर्ष शुरू हुआ, और 1996 से, स्थानीय प्रशासन चलाने के लिए इस क्षेत्र में दो ‘हिल काउंसिल’ काम कर रही थीं. लेकिन 2019 में…

पाँच नए ज़िलों के बनने से कई सवाल उठते हैं: इन नए ज़िलों का स्वरूप और दायरा क्या होगा? क्या इनके पास भी लेह और कारगिल की तरह स्वायत्त ‘हिल डेवलपमेंट काउंसिल’ होंगी, या ये केवल एक डिप्टी कमिश्नर और एक पुलिस अधीक्षक के साथ सहायक ज़िलों के रूप में काम करेंगे?

“ये कठिन सवाल…” “आने वाले महीनों में यह बात निश्चित रूप से सामने आएगी, क्योंकि केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन—जिसे तीन महीने की समय-सीमा दी गई है—प्रशासनिक पहलुओं को सुलझाने पर काम कर रहा है; इसमें हर नए ज़िले के लिए पद बनाना और मुख्यालय तय करना शामिल है,” सेंटर फॉर रिसर्च के निदेशक नवांग त्सेरिंग शाक्सपो ने इस घटनाक्रम पर कहा.

लद्दाख एक कम आबादी वाला क्षेत्र है, जिसका मुख्य कारण यहाँ की कठोर जलवायु परिस्थितियाँ, बंजर पहाड़ और रेगिस्तान हैं. पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने इस क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में काफ़ी निवेश किया है. लेकिन पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए लड़ रहे लद्दाख में  यह प्रशासनिक कदम एक नई लड़ाई की नीव भी बन सकता है! 





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