उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी और इस साल सामान्य से कम बारिश की संभावना को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार (1 मई) को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक में उन्होंने साफ कहा कि पेयजल, सिंचाई और राहत प्रबंधन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि हालात का पहले से आकलन कर पूरी तैयारी रखी जाए, ताकि किसी भी स्थिति में आम जनता और किसानों को परेशानी न हो.
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश के किसी भी हिस्से में पेयजल की कमी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जहां पाइप्ड पेयजल योजनाएं चल रही हैं, वहां उनकी नियमित निगरानी की जाए और जरूरत पड़ने पर टैंकर जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी पूरी तरह तैयार रखी जाएं.
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उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. गर्मी के इस दौर में छोटी सी लापरवाही भी बड़े संकट का कारण बन सकती है.
30 मई तक नहरों और तालाबों की सफाई पूरी करने के निर्देश
जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने 30 मई तक हर हाल में नहरों, तालाबों और पोखरों की डी-सिल्टिंग (सिल्ट सफाई) पूरी करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इससे जल भंडारण क्षमता बढ़ेगी और आने वाले समय में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध रहेगा.
साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि तालाबों से निकली मिट्टी को प्रजापति समाज और पारंपरिक कुम्हार शिल्पकारों को निःशुल्क दिया जाए. इससे एक ओर जल संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर कारीगरों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे.
सूखा प्रभावित जिलों पर विशेष नजर
मुख्यमंत्री ने पहले से सूखा प्रभावित रहे 18 जिलों पर खास निगरानी रखने को कहा. उन्होंने निर्देश दिए कि 15 जून से 30 जुलाई के बीच हालात का आकलन किया जाए और जरूरत पड़ने पर सूखा घोषित करने की प्रक्रिया समय से पूरी कर ली जाए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर स्थिति गंभीर होती है तो एनडीआरएफ की मदद लेने में देरी न की जाए. प्रशासन को हर स्तर पर तैयार रहने की जरूरत है.
कंट्रोल रूम सक्रिय रखने के निर्देश
सीएम ने शासन से लेकर जिला स्तर तक कंट्रोल रूम एक्टिव रखने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि हर जरूरी जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव और डीजीपी तक लगातार पहुंचती रहनी चाहिए. इसका मकसद यह है कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत फैसले लिए जा सकें और राहत कार्यों में देरी न हो.
किसानों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्थाएं मजबूत की जाएं. सभी नलकूप चालू हालत में रहें और जहां खराबी हो, उसे तुरंत ठीक किया जाए.
उन्होंने सिंचाई के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए. साथ ही जल के संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि पानी की बर्बादी पर सख्ती से रोक लगाई जाए.
फसल सुरक्षा और बीमा पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने फसल सुरक्षा को लेकर भी कई अहम निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि अनुदानित बीजों का वितरण समय पर हो और किसानों तक कृषि संबंधी सही सलाह पहुंचे.
फसल बीमा योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि नुकसान की स्थिति में समय पर आकलन हो और किसानों को क्लेम जल्द मिले. इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड धारकों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए.
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खाद्यान्न उपलब्धता और जमाखोरी पर सख्ती
खाद्यान्न सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सभी पात्र लोगों को समय पर राशन मिलना चाहिए. भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था बनी रहे और जरूरत पड़ने पर केंद्र से अतिरिक्त अनाज लिया जाए. उन्होंने जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए, ताकि बाजार में कृत्रिम संकट न पैदा हो.
भीषण गर्मी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट रहने को कहा. उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और लू से निपटने के लिए पूरी तैयारी रहे. इसके साथ ही लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए अभियान चलाने को भी कहा गया, ताकि लोग गर्मी से बचाव के उपाय अपनाएं और बीमारियों से सुरक्षित रहें.
पशुधन और वन्यजीवों के लिए भी जरूरी इंतजाम
मुख्यमंत्री ने पशुधन और वन्यजीवों के लिए भी विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि गो-आश्रय स्थलों में पानी, चारा और इलाज की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए. वन विभाग को निर्देश दिया गया कि अभ्यारण्यों और पक्षी विहारों में भी जानवरों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए, ताकि गर्मी में उनकी जान पर संकट न आए.
मौसम की सटीक जानकारी समय पर पहुंचे
अर्ली वेदर वार्निंग सिस्टम को और मजबूत करने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम से जुड़ी हर जानकारी समय पर आम लोगों और किसानों तक पहुंचनी चाहिए.
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 19 हजार से ज्यादा प्रशिक्षित आपदा मित्र, होमगार्ड और सिविल डिफेंस के स्वयंसेवक मौजूद हैं, जिनकी सेवाएं जरूरत पड़ने पर ली जाएं ताकि किसी भी आपदा से तुरंत निपटा जा सके.
बैठक में खरीफ फसल 2026-27 की तैयारियों की भी समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि नहरों का पानी सिर्फ शुरुआती हिस्सों तक सीमित न रहे, बल्कि अंतिम छोर तक पहुंचे.
उन्होंने टेल फीडिंग व्यवस्था को मजबूत करने, निगरानी बढ़ाने और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए. लक्ष्य रखा गया है कि अधिक से अधिक टेल तक पानी पहुंचे, ताकि हर किसान को सिंचाई का लाभ मिल सके.
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बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया कि आने वाले समय में गर्मी और कम बारिश बड़ी चुनौती बन सकती है, लेकिन अगर समय रहते तैयारी कर ली जाए तो हालात को नियंत्रित किया जा सकता है.
उन्होंने सभी विभागों से समन्वय बनाकर काम करने और जनता को राहत पहुंचाने में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए. सरकार का फोकस साफ है, हर हाल में पानी, राहत और किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना.
