जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा कि गोरखपुर से गोविष्टि यात्रा शुरू करने से पहले उन्हें धमकियां मिली. किसी के माई के लाल में हिम्मत नहीं है कि उन्हें मरवा दे. कोई पार्टियां उन्हें मरवाएंगी, तो सत्ता से बेदखल हो जाएंगी. वे गोरखपुर की निडर जनता का सम्बोधन नहीं कर पाए हैं. निडर और डरी जनता के बारे में बोलना पड़ रहा है. क्योंकि डराया जा रहा है. किसके द्वारा एक सत्ता और दूसरी परम सत्ता. सत्ता हमको डरा रही है. खूब धूप होगी, लेकिन आज देखिए मौसम कि परम् सत्ता हमारे साथ है. गाय की रक्षा करना है.
गाय को माता कहकर पुकारा नहीं जा सकता है. उसे मारना तो दूर उसका किसी भी तरह अनादर नहीं कर सकते हैं. क्या पाकिस्तान में उनके लिए कोई मांग रखें, तो क्या सरकार सुनेगी नहीं. क्या ईसाईयों की उनके देश में उनकी नहीं सुनी जाएगी, लेकिन भारत में गो माता की रक्षा की बात भारत की सरकार नहीं सुनती है. इसका मतलब भारत हिन्दू राष्ट्र नहीं है.
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सरकार जो सत्ता में है, वो हिन्दू पार्टी होती, जो सत्ता में है, तो गोमाता का संकल्प पूरा करती. इसमें तो एक-दो-चार इंजन और इंजन ही इंजन है. जनता के लिए डब्बा कहां है? है भी तो फर्स्ट क्लास का है. जिसमे उनके चापलूस के लिए है. देश तो हिन्दू राष्ट्र नहीं है और जो पार्टी सत्ता में है, वो भी हिन्दू पार्टी नहीं है.
गोविष्ट यात्रा को झंडी दिखाई झंडी
गोरखपुर के सहारा स्टेट स्थित भारत माता मंदिर के समक्ष रविवार 3 मई को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने गोविष्टि यात्रा को गोरखा झंडी दिखाकर रवाना किया. इस दौरान उन्होंने आगे कहा कि आपका काम कैसे होगा? आपको भ्रम निकलना होगा. जनता के मन में भ्रम पैदा हो गया है. सरकार हमारी प्रतिनिधि नहीं है, सरकार हम (जनता) हैं. भारत की वो जनता जो मतदान करती है, वो सत्ता में है. जो नहीं करती है वो विपक्ष में है. इसलिए मतदान करिए. तो आप जो चाहेंगे वो होगा. आप चाहेंगे कि गाय की रक्षा हो तो होगी. आप चाहेंगे, तो उसकी हत्या होगी.
ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वेद के मंत्र में कहा गया है कि गाय को मारने वाले असुर को हमने मार दिया. गोमाता को सताने वाले असुर को हमें मारना है. उन्हें मारने के लिए पहली उंगली को ऊपर उठना होगा. राज्यमाता गाय को घोषित करना है, तो उसके लिए आपको मुख्यमंत्री बनना पड़ेगा. जो मुख्यमंत्री है, वो गाय की रक्षा नहीं कर पा रहा है. इस मामले में कमजोर है. कहते हैं कि केंद्र की नहीं सुनता है, अपने मन की करता है. ऐसा प्रचार है. लेकिन वे जहां तक समझ पाए हैं, ये बिल्कुल गलत बात है. उसके अंदर साहस होता, तो गोरक्षनाथ जी की ओर हाथ करके केंद्र की परवाह किए बगैर वे गोमाता को राज्य माता घोषित कर देता. केंद्र के मंत्री भी उसका विरोध करते तो वह खड़ा हो जाता है कि खबरदार गाय हमारी माता है. जिसके लिए हम आपकी भी नहीं सुनेंगे. अगर यह तेवर दिखाता तो आज यहां बैठकर लोग उसके कसीदे पढ़ रहे होते. लेकिन वह मानता नहीं है वह डरता है कि मुसलमान और गो हत्यारे उसे वोट नहीं देंगे. उन्होंने कहा कि हिमन्त बिस्वा से पत्रकार ने पूछा आपको गौ हत्यारो का वोट चाहिए, तो भाजपा का मुख्यमंत्री कहता है कि चाहिए.
भाजपा को वोट का मतलब गौ हत्या को सपोर्ट
भाजपा को वोट दोगे तो गो हत्यारों और आपका वोट एक पात्र में रहेगा. आप गो हत्यारों का वोट ईवीएम मशीन में गो हत्यारों का वोट जाएगा. गाय का खून और दूध आप मिलाकर पियोगे? नहीं पियोगे. उन्हें बहुत डराने की कोशिश की गई. चाहे कितने भी बड़े योद्धा आए उन्हें परास्त कर दिया, तो इन्हें परास्त करने के देर नहीं लगेगी. हममें से बहुत से लोग इन्हें ही अपना समझ रहे हैं. 37 से ज्यादा कानून हिंदुओ के खिलाफ हैं. मंदिर तोड़े जा रहे हैं. भगवान के गले में फंदे डालकर जेसीबी से भाजपा ने खींचा.
संविधान बदलने की कोशिश
समलैंगिकता अपराध नहीं रह गई. अंबेडकर के भक्त भी बन जाए रहे हैं और उनके संविधान को भी बदल दे रहे हैं. राष्ट्र माता नहीं तो मम माता कहने के तो गोमाता को कहने के अधिकारी हैं. सुन ले दुनिया और कह दें कि गाय हमारी माता है. एक नोट एक वोट गोरक्षा और रामाधाम के नाम पर दीजिए.
हर विधानसभा में गोरक्षा के लिए बनने वाले रामाधाम के लिए वोट दें. बूचड़खाने पर तीसरे चरण में धावा बोलेंगे. भारत का मुसलमान, ईसाई धार्मिक होता है. भारत का हिन्दू सेकुलर हो जाता है. 81 दिन में 81 युद्ध की चर्चा करेंगे. गोविष्टि यात्रा का शुभारंभ गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा से कर रहे हैं. है कोई माई का लाल जिसने उत्तर प्रदेश के सभी तीर्थ स्थल की परिक्रमा की हो. वे करके आएंगे यहां पर और कहेंगे, वो करके आये हैं. उन्होंने सत्ता या विपक्ष में रहने वाले किसी पार्टी से संबंध रखा है.
शंकराचार्य को किसी पार्टी का मोहताज होने की जरूरत नहीं है. वह अगर चाहे कि उत्तर प्रदेश में वह कहीं भी 5-7 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे, तो उनका सनातन धर्मी सड़क पर फूल बिछा देगा. आप लोगों ने प्रश्न उठाया कि सभी शंकराचार्य नहीं बोल रहे हैं. आप ही क्यों बोल रहे हैं? तो वह कहना चाहते हैं कि यह आवाज उनकी अकेले की आवाज नहीं है. यह उनका अकेले का आंदोलन नहीं है चारों शंकराचार्य मिलकर यह आंदोलन आगे बढ़ा रहे हैं. यह उनका अकेले का आंदोलन नहीं है. जैसे की पार्टी होती है. उसका एक प्रवक्ता बना दिया जाता है कि वह बोलेगा सब लोग नहीं बोलेंगे. इसी तरह चार शंकराचार्य में उन्हें आगे किया गया है जिससे गौ माता की आवाज में उठा सके. उनकी आवाज चारों शंकराचार्य की आवाज है.
उत्तर प्रदेश शंकराचार्य का प्रदेश है
उत्तर प्रदेश उत्तर भारत के शंकराचार्य का प्रदेश है, इसलिए यहां पर उत्तर भारत के शंकराचार्य को बोलने का अधिकार है. दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में वहां के शंकराचार्य बोलेंगे. वहां उनका हक नहीं बनेगा. पश्चिम के शंकराचार्य ने कहा है कि वह भी किसी दिन इस गोविष्टि यात्रा में सम्मिलित होंगे. यह भ्रम दिमाग से निकाल दीजिए कि एक शंकराचार्य का रहा है. यह चारों शंकराचार्य की आवाज है.
गोरखपुर सच में गोरखपुर हो जाए, तो चारों शंकराचार्य यहां पधार सकते हैं. कोई ऐसा शहर नहीं है. जो गोरखपुर के नाम पर गोरक्षा के नाम पर अपने शहर का नाम ही गोरखपुर रख देते हैं. योगी आदित्यनाथ को चिढ़ाने के लिए वह गोरखपुर नहीं आए हैं. वे जिस शहर जाएंगे, वहां उनकी एलआईयू पूरे उत्तर प्रदेश में है, वह पता कर लेगी. गोरखनाथ मंदिर में पहले जा चुके हैं.
गोरखनाथ बाबा के सानिध्य में बैठकर प्रार्थना कर चुके हैं. यात्रा पूरी होने के बाद वे फिर जाएंगे. गोरखपुर आने के पहले उन्हें धमकी मिली. बहुत से लोगों ने कहा कि यात्रा मत करिये. बहुत से लोगों ने अलनीनो का डर दिखाया. लेकिन वे नहीं माने. किसी माई के लाल में हिम्मत नहीं है कि उन्हें कोई मार दे. पार्टियां उन्हें मरवाती हैं, तो ये पार्टियां सत्ता से बेदखल हो जाएगी. गाँधीजी को गोडसे ने मारा था आज दाग धुल गया. कोई भी मरना नहीं चाहता है. वे भी गोसेवा के संकल्प के लिए ऐसा चाहते हैं. मुस्लिम और ईसाई समुदाय ने भी उनके इस अभियान का समर्थन किया है.
उन्होंने कहा कि उनके द्वारा योगी विरोध नहीं, गलती का विरोध है. वो दिन आ जाएगा, जब सब पार्टियां गो भक्त होगी. वोट से फर्क पड़ेगा. यहां हर विधानसभा में एक हजार वोट इधर-उधर कर दिए, तो फर्क पड़ जाएगा. तब इन्हें समझ में आ जायेगा. तब वोट से फर्क पड़ेगा. 8 हजार करोड़ के विमान से हमारे देश का प्रधानमंत्री चलता है और अन्य दिन खड़ा रहता है. वो किराए पर चले, तो देश को कुछ रेवेन्यू मिलेगा.
