अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की हॉर्स राइडिंग क्लब की करीब 500 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में फिलहाल एएमयू को राहत मिली है. उपजिलाधिकारी कोल की अदालत ने इस मामले में एएमयू और नगर निगम, दोनों को नोटिस जारी किए हैं. वहीं, जिलाधिकारी अलीगढ़ ने साफ किया है कि अदालत का फैसला आने तक जमीन पर पहले से जिसका कब्जा है, वही कब्जा बरकरार रहेगा.
नगर निगम ने जमीन पर लगाया था अपना बोर्ड
पूरा मामला अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हॉर्स राइडिंग क्लब की जमीन से जुड़ा है. एएमयू के मुताबिक, यह जमीन करीब 150 साल से विश्वविद्यालय के पास है. कुछ दिन पहले नगर निगम ने जमीन की पैमाइश कराने के बाद इसे अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू की थी. जमीन पर तार फेंसिंग कराने के साथ नगर निगम की संपत्ति के बोर्ड भी लगा दिए गए थे.
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इस कार्रवाई के बाद एएमयू के कुलपति मौके पर पहुंचे थे और उन्होंने नगर निगम की कार्रवाई को अवैध बताया था. इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर से अधिकारियों के सामने अपने दस्तावेज पेश किए गए.
3.863 हेक्टेयर जमीन को लेकर विवाद
विवादित जमीन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सेंचुरी गेट के रास्ते भमोला माफी के नगला पटवारी इलाके में है. करीब 3.863 हेक्टेयर जमीन को एएमयू की हॉर्स राइडिंग क्लब की जमीन बताया जा रहा है. एएमयू का दावा है कि यह जमीन लंबे समय से उसके पास है और इसके समर्थन में उसके पास दस्तावेज भी हैं.
शुक्रवार को एएमयू के संपत्ति विभाग के अधिकारियों और प्रॉक्टर नवेद अली ने पहले उपजिलाधिकारी कोल से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी अलीगढ़ से भी मुलाकात कर जमीन से जुड़े दस्तावेज दिखाए.
कोर्ट के फैसले तक नहीं होगी कोई कार्रवाई- डीएम
जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने बताया कि जमीन को लेकर विवाद उपजिलाधिकारी कोल की अदालत में चल रहा है. दोनों पक्षों यानी नगर निगम और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को नोटिस जारी किए गए हैं. उन्होंने कहा कि इस संपत्ति पर जिसका पहला अधिकार था, वह अधिकार फिलहाल सुरक्षित रहेगा.
डीएम ने कहा कि जब तक उपजिलाधिकारी कोल की अदालत से कोई आदेश नहीं आता, तब तक जमीन पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों ही संस्थाएं सरकारी हैं और जमीन से जुड़े दस्तावेज अदालत के सामने रखे जा सकते हैं.
एएमयू ने 1925 और 1940 के दस्तावेजों का दिया हवाला
एएमयू के प्रॉक्टर नवेद अली ने बताया कि विश्वविद्यालय ने जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी को अपने सभी कागजात दिखा दिए हैं. उन्होंने कहा कि यह संपत्ति लंबे समय से एएमयू के पास है.
उनके मुताबिक, 13 जून 1925 को अधिग्रहण अधिनियम 1894 के तहत सरकार ने इस जमीन का अधिग्रहण विश्वविद्यालय के लिए किया था. इसके बाद 19 नवंबर 1940 को यूनाइटेड प्रोविन्स के तत्कालीन गवर्नर ने भी इस जमीन को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए अग्रहीत किया था.
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नवेद अली ने कहा कि फिलहाल जमीन पर एएमयू का ही कब्जा है. अगर नगर निगम के पास भी जमीन से जुड़े कोई दस्तावेज हैं तो वह उन्हें अदालत में पेश कर सकता है. उन्होंने कहा कि अब उपजिलाधिकारी कोल की अदालत के फैसले के बाद ही पूरी स्थिति साफ होगी.
