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Bed Repair Tips: लकड़ी के पलंग से आती है चू-चू की आवाज? 5 मिनट में ऐसे करें बंद


How To Fix Squeaky Wooden Bed: रात को सोते समय करवट बदलते ही अगर लकड़ी का पलंग चू-चू या चरमराने की आवाज करने लगता है, तो यह काफी परेशान करने वाला हो सकता है. कई बार पलंग पर बैठते ही आवाज आती है, तो कभी हल्का सा हिलने या करवट बदलने पर भी चरमराहट शुरू हो जाती है. शुरुआत में यह छोटी समस्या लगती है, लेकिन लगातार आने वाली आवाज नींद और आराम दोनों खराब कर सकती है. अच्छी बात यह है कि हर बार इसके लिए नया पलंग खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. अक्सर कुछ ढीले जोड़, लकड़ी के हिस्सों के आपस में रगड़ने या पलंग के असंतुलित होने की वजह से ऐसी आवाज आती है, जिसे घर पर ही ठीक किया जा सकता है.

सबसे पहले पता करें आवाज कहां से आ रही है

पलंग की चरमराहट दूर करने से पहले यह पता लगाना जरूरी है कि आवाज किस हिस्से से आ रही है. कई बार गद्दे के स्प्रिंग, बेड के फ्रेम, लकड़ी की पट्टियों या पलंग के किसी जोड़ से आवाज आ सकती है. इसके लिए पहले गद्दा हटाकर खाली पलंग पर अलग-अलग जगह हल्का दबाव डालें और हिलाकर देखें. इससे यह समझने में आसानी होगी कि चू-चू की आवाज किस जगह से आ रही है.

अगर पलंग पर बैठने या हिलाने पर किसी खास कोने से आवाज आती है, तो वहीं ढीला जोड़ या लकड़ी का रगड़ने वाला हिस्सा हो सकता है. सही जगह की पहचान होने के बाद समस्या को ठीक करना काफी आसान हो जाता है.

ढीले स्क्रू और बोल्ट कसें

लकड़ी के पलंग में चरमराहट आने की सबसे आम वजह ढीले स्क्रू और बोल्ट होते हैं. लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर पलंग के जोड़ धीरे-धीरे ढीले हो सकते हैं. इससे पलंग हिलने लगता है और लकड़ी के हिस्से आपस में रगड़कर चू-चू की आवाज पैदा करते हैं. पलंग के सभी कोनों और जोड़ों को ध्यान से जांचें. जहां स्क्रू या बोल्ट ढीले दिखें, उन्हें सही टूल की मदद से अच्छी तरह कस दें. कई बार सिर्फ स्क्रू कसने से ही पलंग की आवाज काफी हद तक बंद हो जाती है. समय-समय पर इन्हें जांचना भी जरूरी है, ताकि पलंग दोबारा ढीला न पड़े.

Bed Repair Tips: लकड़ी के पलंग से आती है चू-चू की आवाज? 5 मिनट में ऐसे करें बंद

लकड़ी के जोड़ों में वैक्स लगाएं

अगर स्क्रू और बोल्ट कसने के बाद भी आवाज आ रही है, तो लकड़ी के दो हिस्सों के बीच घर्षण इसका कारण हो सकता है. लकड़ी के पलंग में यह समस्या खासतौर पर मौसम और नमी में बदलाव के कारण भी हो सकती है. लकड़ी थोड़ी फैल या सिकुड़ जाती है, जिससे जोड़ पहले की तरह फिट नहीं रहते और हिलने पर आवाज करने लगते हैं. ऐसे में चरमराने वाले हिस्से पर मोमबत्ती का वैक्स या बीजवैक्स हल्के हाथ से लगाया जा सकता है. इससे लकड़ी के हिस्सों के बीच घर्षण कम हो सकता है और आवाज भी घट सकती है. वैक्स लगाने से पहले यह जरूर पता कर लें कि आवाज किस जोड़ से आ रही है. जरूरत से ज्यादा वैक्स लगाने के बजाय सिर्फ प्रभावित जगह पर ही इस्तेमाल करें.

लकड़ी की पट्टियों के बीच लगाएं कुशनिंग

कई लकड़ी के पलंग में गद्दे के नीचे लकड़ी की स्लैट्स या पट्टियां लगी होती हैं. जब ये पट्टियां फ्रेम से रगड़ती हैं या हल्की हिलती हैं, तो चू-चू की आवाज आने लगती है. इस समस्या को कम करने के लिए लकड़ी की पट्टियों और फ्रेम के संपर्क वाली जगह पर कुशनिंग दी जा सकती है.

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इसके लिए पुराने कपड़े, तौलिया या मोटे कपड़े का छोटा टुकड़ा इस्तेमाल किया जा सकता है. कपड़े को उस जगह रखें जहां लकड़ी की पट्टी फ्रेम से टकराती या रगड़ती है. इससे दोनों सतहों के बीच सीधा संपर्क कम होगा और आवाज भी कम हो सकती है. हालांकि, कपड़ा इस तरह लगाएं कि पट्टियां अपनी जगह से खिसकें नहीं.

कॉर्क का भी कर सकते हैं इस्तेमाल

अगर लकड़ी के दो हिस्सों के बीच थोड़ा गैप है और हिलने पर वहीं से आवाज आती है, तो कॉर्क का छोटा टुकड़ा भी काम आ सकता है. कॉर्क को चरमराने वाले हिस्से के बीच सावधानी से लगाया जा सकता है. यह दोनों लकड़ी के हिस्सों के बीच कुशन की तरह काम करता है और आपसी रगड़ को कम करने में मदद करता है. लेकिन कॉर्क को बहुत ज्यादा दबाकर न लगाएं, क्योंकि इससे पलंग का संतुलन बिगड़ सकता है. केवल उतना ही इस्तेमाल करें, जिससे ढीला हिस्सा स्थिर हो जाए.

पलंग का संतुलन भी जरूर जांचें

कई बार समस्या पलंग में नहीं बल्कि फर्श में होती है. अगर जमीन समतल नहीं है, तो पलंग का कोई एक पैर थोड़ा ऊपर या नीचे रह सकता है. ऐसी स्थिति में पलंग पर बैठने या करवट बदलने पर पूरा फ्रेम हल्का हिलता है और चरमराने लगता है. इसे जांचने के लिए पलंग के चारों पैरों को देखें. अगर कोई पैर फर्श से पूरी तरह नहीं लग रहा है, तो उस जगह नीचे फोल्ड किया हुआ कपड़ा या पतला पैड लगाया जा सकता है. इससे पलंग स्थिर रहेगा और हिलने से होने वाली आवाज कम हो सकती है.

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