सुप्रीम कोर्ट ने इस साल CBSE के कक्षा 6 के छात्रों को तीसरी भाषा की अनिवार्यता से राहत दी है. कोर्ट ने कहा है कि इस साल कक्षा 6 में पढ़ रहे बच्चों को वही छूट दी जाए, जो मौजूदा कक्षा 7 के छात्रों को दी गई है. इसका मतलब है कि इस साल छठी के बच्चे तीसरी भाषा पढ़ेंगे, लेकिन उसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर ही होगा. जब वह 10वीं में जाएंगे, तब भी उन्हें तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी.
कोर्ट के आदेश से साफ है कि तीन भाषा नीति की व्यवस्था 2027-28 के सत्र से लागू होगी. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में कहा गया था कि नई नीति के कारण लाखों छात्रों के सामने अचानक तीसरी भाषा पढ़ने की ज़रूरत पैदा हो गई है. याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि कई जगहों पर नई भाषाओं की किताबें तक उपलब्ध नहीं हैं और पर्याप्त शिक्षक भी नहीं हैं.
CJI ने जताई थी चिंता
20 अगस्त को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने छात्रों को हो रही दिक्कतों पर चिंता जताई थी. कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया था कि वह इस व्यवस्था को अगले साल से लागू करने पर विचार करे. सोमवार, 28 सितंबर को हुई सुनवाई में केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि लगभग 99 प्रतिशत स्कूलों में तीसरी भाषा की पढ़ाई की व्यवस्था हो गई है.
इस पर कोर्ट ने कहा कि CBSE के स्कूलों की संख्या को देखते हुए 1 प्रतिशत भी बड़ी संख्या है. इसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि CBSE की 3 भाषा नीति को 1 अप्रैल 2027 से लागू किया जाए. इसका अर्थ यह हुआ कि जो बच्चे अगले साल क्लास 6 में जाएंगे, उन्हें 2 भारतीय भाषा और 1 विदेशी भाषा पढ़नी होगी. अंग्रेजी को विदेशी भाषा की श्रेणी में रखा गया है. ऐसे में ज़्यादातर मामलों में व्यवहारिक रूप से यही होगा कि बच्चे अंग्रेज़ी के अलावा 2 भारतीय भाषाएं पढ़ेंगे.
CBSE ने क्या कहा?
फिलहाल कक्षा 7 और 8 में पढ़ रहे छात्रों को मिली छूट की जानकारी देते हुए CBSE ने बताया था कि यह बच्चे अगर पहले से दो गैर-भारतीय भाषाएं, जैसे अंग्रेजी और फ्रेंच, पढ़ रहे हैं तो वह इसे जारी रखते हुए एक भारतीय भाषा को तीसरी भाषा यानी R3 के रूप में ले सकते हैं. मौजूदा कक्षा 7 से 10 के लिए R3 की कोई CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं होगी और इसका आकलन स्कूल स्तर पर होगा. कोर्ट के आदेश के बाद अब यही व्यवस्था कक्षा 6 के बच्चों के लिए भी लागू हो गई है.
CBSE ने अपने हलफनामे में यह भी बताया है कि कक्षा 9 में R3 के आंतरिक मूल्यांकन में जो छात्र सफल नहीं होंगे, उन्हें भी कक्षा 10 में प्रमोट किया जाएगा. इन छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन में R3 में पास होने का दोबारा मौका दिया जाएगा. कक्षा 10 में की बोर्ड परीक्षा में पास होने के लिए स्कूल से मिले R3 पास सर्टिफिकेट का होना ज़रूरी होगा.
