अनंतनाग में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (DPAP) के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से चुनावों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठते रहे हैं और उस पर उंगलियां भी उठाई जाती रही हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के पास इन आरोपों को साबित करने के लिए सबूत नहीं थे. अब, उनके मुताबिक, स्थिति अलग है क्योंकि दो चुनाव आयुक्तों ने खुद मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने कई बार अपनी आपत्तियां रखे जाने की बात कही है. यह बयान 27 सितंबर 2026 को सामने आया.
‘दो चुनाव आयुक्तों ने एक दर्जन से ज्यादा बार सवाल उठाए’
आजाद ने कहा कि इस बार दो चुनाव आयुक्तों ने खुद मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने एक दर्जन से ज्यादा बार सवाल उठाए और यह जानने की कोशिश की कि कहीं कुछ गलत तो नहीं किया जा रहा. उनके मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने अपनी चिंताओं से मुख्य चुनाव आयुक्त को अवगत कराया, लेकिन उन्होंने इन आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया और अपनी इच्छा के अनुसार काम किया.
VIDEO | Anantnag: DPAP chairman Ghulam Nabi Azad on the Election Commission row, says, “For the past few years, questions have been raised and fingers have been pointed at the Election Commission regarding elections. But political parties were not getting evidence. This time, the… pic.twitter.com/4VfpLiU5KT
— Press Trust of India (@PTI_News) September 26, 2026
आजाद ने कहा कि अब इस पूरे मामले को लेकर यह सवाल उठता है कि जिन नामों को मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद चुनाव कराए गए, क्या ऐसे चुनावों को वैध माना जाना चाहिए या फिर दोबारा चुनाव कराया जाना चाहिए.
‘विपक्ष की मांग गलत नहीं’
DPAP अध्यक्ष ने कहा कि ऐसी स्थिति में विपक्ष की ओर से दोबारा चुनाव कराने की मांग को गलत नहीं कहा जा सकता. उन्होंने कहा कि अगर तीन में से दो चुनाव आयुक्त किसी मामले को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो लोगों को उनकी बात पर भरोसा करना चाहिए और मामले में कार्रवाई की जानी चाहिए.
हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इस विवाद पर कहा गया है कि चुनाव आयुक्तों की ओर से उठाए गए सवाल और सुझाव निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा थे. आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राय या टिप्पणियां बहु-सदस्यीय संस्था में विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं और उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं.
मतदाता सूची में नाम हटाने को लेकर विवाद
आजाद की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं. इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची के डेटा से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं.
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